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न गले मिले न हाथ मिलाया, दिल से बोले ईद मुबारक
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न गले मिले, न हाथ मिलाया, फिर भी बोले ईद मुबारक। कोरोना महामारी के कारण लगातार दूसरे साल ईद सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मनाई गई। लोगों ने एक दूसरे से दूरी बनाई और सोशल मीडिया और मोबाइल के जरिए मुबारकबाद दी।
मुकद्दस रमजान की नेमत के रूप में ईद-उल-फितर का जश्न मनाया गया। कोरोना पाबंदियों के बावजूद घरों से लेकर मस्जिदों तक त्योहार की खुशियां बिखरी। शुक्रवार की सुबह फज्र की अजान के बाद ईद की नमाज अदा की गई। कोरोना प्रोटोकॉल के अनुसार ईदगाह और मस्जिदों में पांच-पांच लोगों के साथ ईद की नमाज अदा गई। नमाजियों ने खुदा से कोरोना के खात्मे और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की शिफा के लिए दुआ मांगी। महामारी के कारण परिवार संग घर में ही नमाज अदा हुई। ईदगाहों में ईद-उल-फितर की नमाज अदा न कर पाने का मलाल हर किसी के दिल में रहा। मस्जिद इमाम अबू हनीफा अमानुल्लाहपुरा में मुफ्ती ए बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी, ईदगाह पुराना पुल में मौलाना शकील अहमद, मस्जिद खुदाबख्श जायसी लंगड़े हाफिज में मौलाना जकीउल्लाह असदुल कादरी, उस्मानपुरा जामा मस्जिद में मौलाना हारुन रशीद नक्शबंदी, मस्जिद लाट सरैंया में मौलाना जियाउर्रहमान, जामा मस्जिद नदेसर में मौलाना मजहरुल हक, मस्जिद खरबूजा शहीद में हाफिज शकील अहमद, ढाई कंगूरा मस्जिद चौहट्टा लाल खां में हाफिज नसीम अहमद बशीरी, मदनपुरा व सदर इमामबाड़ा सरैंया में मौलाना मुहम्मद जफर हुसैनी, पितरकुंडा व जामा मस्जिद दारानगर में मौलाना अमीन हैदर, ईमानिया अरबी कालेज मुकीमगंज में मौलाना मोहम्मद बाकर ने नमाज अदा कराई।
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मुकद्दस रमजान की नेमत के रूप में ईद-उल-फितर का जश्न मनाया गया। कोरोना पाबंदियों के बावजूद घरों से लेकर मस्जिदों तक त्योहार की खुशियां बिखरी। शुक्रवार की सुबह फज्र की अजान के बाद ईद की नमाज अदा की गई। कोरोना प्रोटोकॉल के अनुसार ईदगाह और मस्जिदों में पांच-पांच लोगों के साथ ईद की नमाज अदा गई। नमाजियों ने खुदा से कोरोना के खात्मे और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की शिफा के लिए दुआ मांगी। महामारी के कारण परिवार संग घर में ही नमाज अदा हुई। ईदगाहों में ईद-उल-फितर की नमाज अदा न कर पाने का मलाल हर किसी के दिल में रहा। मस्जिद इमाम अबू हनीफा अमानुल्लाहपुरा में मुफ्ती ए बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी, ईदगाह पुराना पुल में मौलाना शकील अहमद, मस्जिद खुदाबख्श जायसी लंगड़े हाफिज में मौलाना जकीउल्लाह असदुल कादरी, उस्मानपुरा जामा मस्जिद में मौलाना हारुन रशीद नक्शबंदी, मस्जिद लाट सरैंया में मौलाना जियाउर्रहमान, जामा मस्जिद नदेसर में मौलाना मजहरुल हक, मस्जिद खरबूजा शहीद में हाफिज शकील अहमद, ढाई कंगूरा मस्जिद चौहट्टा लाल खां में हाफिज नसीम अहमद बशीरी, मदनपुरा व सदर इमामबाड़ा सरैंया में मौलाना मुहम्मद जफर हुसैनी, पितरकुंडा व जामा मस्जिद दारानगर में मौलाना अमीन हैदर, ईमानिया अरबी कालेज मुकीमगंज में मौलाना मोहम्मद बाकर ने नमाज अदा कराई।
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