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Navratri Kanya Pujan: कन्या पूजन में दो से दस साल की बालिकाओं की पूजा का विशेष महत्व, जानिए क्या बोले ज्योतिष?

Wed, 29 Mar 2023 07:23 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Wed, 29 Mar 2023 07:23 AM IST
सार

बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय पांडेय के अनुसार कन्या पूजन के लिए दो से 10 वर्ष की कन्याओं को बहुत ही शुभ माना गया है। कथाओं में कहा गया है कि कन्या भोज के लिए आदर्श संख्या नौ होती है। वैसे लोग अपनी श्रद्धा अनुसार कम और ज्यादा कन्याओं को भी भोजन करा सकते हैं।

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Navratri Kanya Pujan: The special importance of worshiping two to ten year old girls in Kanya Pujan
कन्या पूजन

विस्तार

चैत्र नवरात्र में कन्या पूजन के बिना व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। अष्टमी और नवम तिथि पर कन्याओं की पूजा और भोज करवाने से देवी अन्नपूर्णा के साथ महालक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है। अष्टमी तिथि 28 मार्च को शाम 7:02 बजे से शुरू होगी और 29 मार्च को रात 09:07 बजे समाप्त होगी। इसके साथ ही नवमी तिथि आरंभ हो जाएगी। महानवमी रात 9:07 से शुरू होकर 30 मार्च को रात 11:30 बजे तक रहेगी।

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काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी के अनुसार शास्त्रों में नवरात्रि के अवसर पर कन्या पूजन या कन्या भोज को अत्यंत ही महत्वपूर्ण बताया गया है। नवरात्रि में देवी मां के सभी साधक कन्या को मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं। नवरात्र में हर दिन देवी की पूजा व्रत-उपवास और कन्या भोज करवाया जाता है। मार्कंडेय पुराण के मुताबिक नवरात्र की अष्टमी और नवमी तिथि पर देवी की महापूजा का विधान है। महापूजा के इन दो दिनों में ही पूरे नवरात्र का फल मिलता है।

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ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि भविष्यपुराण और देवीभागवत पुराण में कन्या पूजन का वर्णन है। इसके अनुसार नवरात्रि का पर्व कन्या भोज के बिना अधूरा है। लोग कन्या पूजा नवरात्रि में किसी भी दिन कर सकते हैं। लेकिन पौराणिक कथाओं के अनुसार, नवरात्रि के अंतिम दो दिन अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन का श्रेष्ठ दिन माना गया है।

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Navratri Kanya Pujan: The special importance of worshiping two to ten year old girls in Kanya Pujan
कन्या पूजन - फोटो : amar ujala

नौ कन्याओं को कराते हैं भोज

बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय पांडेय के अनुसार कन्या पूजन के लिए दो से 10 वर्ष की कन्याओं को बहुत ही शुभ माना गया है। कथाओं में कहा गया है कि कन्या भोज के लिए आदर्श संख्या नौ होती है। वैसे लोग अपनी श्रद्धा अनुसार कम और ज्यादा कन्याओं को भी भोजन करा सकते हैं। दो वर्ष की कन्या को कन्या कुमारी, तीन साल की कन्या को त्रिमूर्ति, चार साल की कन्या को कल्याणी, पांच साल की कन्या को रोहिणी, छह साल की कन्या को कालिका, सात साल की कन्या को चंडिका, आठ साल की कन्या को शांभवी, नौ साल की कन्या को दुर्गा और 10 साल की कन्या को सुभद्रा का स्वरूप माना जाता है।

पूजा विधि

प्रात: काल स्नान करके प्रसाद में खीर, पूड़ी और हलवा आदि बनाना चाहिए। इसके बाद कन्याओं को बुलाकर शुद्ध जल से उनके पांव धोने चाहिए। उन्हें साफ आसन पर बैठाकर भोजन परोसने से पहले मां दुर्गा को भोग लगाना चाहिए और फिर इसके बाद प्रसाद स्वरूप में कन्याओं को उसे खिलाना चाहिए। नौ कन्याओं के एक साथ एक छोटे बालक को भी भोजन कराने का प्रचलन है। कन्याओं को विदा करते वक्त अनाज, रुपये या वस्त्र भेंट करें। उनके पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

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