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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Navratri first day 14 baby girls born in Varanasi and they named Durga and Gauri

Navratri 2025: नवरात्रि के पहले दिन महादेव की काशी में जन्मीं 14 बेटियां, नाम पड़ा दुर्गा और गौरी

Tue, 23 Sep 2025 04:57 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 23 Sep 2025 04:57 PM IST
सार

Navratri 2025: नवरात्र में बेटियों की किलकारी से महिला अस्पताल गूंज उठा। पहले दिन जिला महिला अस्पताल में 20 बच्चों में 14 बालिकाओं ने जन्म लिया। इन बेटियों का नाम दुर्गा और गौरी पड़ा। 

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Navratri first day 14 baby girls born in Varanasi and they named Durga and Gauri
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik.com

विस्तार

नवरात्र के पहले दिन सोमवार को जिला महिला अस्पताल में 20 बच्चों में 14 बालिकाओं ने जन्म लिया। इन बच्चियों का नाम इनके माता-पिता ने मां दुर्गा के नाम पर रखा। इनमें कई ऐसे लोग थे, जिनकी शादी के बाद पहली संतान के रूप में बेटी हुई। इसे लेकर परिजन काफी खुश नजर आए। परिजनों का कहना था कि नवरात्र के शुभ दिन पर उन्हें मां दुर्गा के आशीर्वाद के तौर पर बेटी हुई है। इसलिए उनका नाम मां के आधार पर रखा गया।

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केस - 1
चौबेपुर के रमेश वर्मा की शादी 3 वर्ष पहले हुई थी। रविवार की रात वह अपनी पत्नी नम्रता को लेकर प्रसव के लिए जिला अस्पताल ले आए। यहां आधी रात उनकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। पहली संतान के रूप में बेटी होने पर वह फूले न समाए। उन्होंने अपनी बेटी का नाम दुर्गा रखा।
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केस - 2
चोलापुर के गणेश कुमार की पत्नी को 10 वर्षों से कोई संतान नहीं थी। सोमवार की सुबह उनकी पत्नी सुमन को जब बेटी हुई तो उनका आंगन खुशियों से भर उठा। उन्होंने अपनी बेटी को मां दुर्गा के नाम पर कल्याणी नाम दिया।


केस-3
दारानगर के मुनीष श्रीवास्तव की शादी 4 साल पहले शिवांगी से हुई थी। सोमवार को उनकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। उन्होंने अपनी बेटी का नाम गौरी रखा। कहा कि मां दुर्गा के प्रथम रूप शैलपुत्री को गौरी भी कहते हैं। इसलिए इसका नामकरण गौरी किया गया।
 

क्या बोलीं डॉक्टर
नवरात्र में बेटियों का जन्म लेना सौभाग्य की बात है। नाम रखना परिजनों की इच्छा पर है। अस्पताल की ओर से डिलीवरी के लिए आने वाले मरीजों को सभी सुविधाएं दी जा रही हैं। इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। -डॉ. नीना वर्मा, एसआईसी, जिला महिला अस्पताल 

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