Navratri 2023: पंडाल में मां की आराधना के लिए 30 महिलाएं देती हैं गुल्लक में पैसे, वर्षों से चली आ रही परंपरा
नवरात्र में जहां हर घर में मां की आराधना होती है, वहीं पूजा पंडालों में मां विराजती हैं और हर ओर उल्लास छाया रहता है। कुछ ऐसी महिलाएं हैं जो पंडाल और पूजन तक तन, मन व धन से अपने को अर्पित कर देती हैं। इन्हीं में से एक है यंग बॉयज क्लब।
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नवरात्र में जहां हर घर में मां की आराधना होती है, वहीं पूजा पंडालों में मां विराजती हैं और हर ओर उल्लास छाया रहता है। कुछ ऐसी महिलाएं हैं जो पंडाल और पूजन तक तन, मन व धन से अपने को अर्पित कर देती हैं। इन्हीं में से एक है यंग बॉयज क्लब। महिलाएं सालभर अपने खर्च में कटौती करके गुल्लक में पैसा जुटाती हैं। इसके बाद नवरात्र में क्लब को सौंप देती हैं। यह परंपरा 25 वर्ष से चली आ रही है।
लक्सा स्थित इस क्लब की समिति पूजा पंडाल की तैयारी करती है। समिति के अध्यक्ष एसबी सहाय ने बताया कि करीब 25 साल पहले समिति के पूर्व सचिव स्व. शेखर मुखर्जी ने महिलाओं को प्रेरित किया। इसके बाद रूम्पा मित्रा, नंदिता मुखर्जी, दीपा गोस्वामी, रूपा बोस, प्रिया मुखर्जी और जयति दास ने दुर्गा पूजा के लिए पूरे साल गुल्लक में पैसे जमा करना शुरू किया।
धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ने लगी और आज 30 महिलाएं गुल्लक में पैसे जमा करती हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में थोड़ी इसमें बाधा आई थी। मगर अब फिर से यह कार्य शुरू हो गया है। नवरात्र की षष्ठी तिथि तक करीब सभी महिलाएं गुल्लक पूजा समिति में जमाकर देती हैं। कुछ घर पर ही गुल्लक फोड़कर पैसे लाकर देती हैं। इससे पंडाल के खर्च में काफी सहयोग मिलता है। जयति और रूम्पा ने बताया कि महिलाओं को शुरू में जागरूक करना पड़ा था। अब वे खुद आगे आकर जमा करती हैं।
40 महिलाएं संभालती हैं पूजन की जिम्मेदारी
वाराणसी दुर्गोत्सव सम्मिलनी के पूजा पंडाल में मां की पूजा बांग्ला पद्धति से होती है। इसकी जिम्मेदारी 40 से अधिक महिलाएं संभालती हैं। पूजन सामग्री तैयार करने से लेकर पूजन करने में उनकी अहम भूमिका होती है। पूजा समिति के उपाध्यक्ष तरुण कुमार मुखर्जी ने बताया कि नवरात्र के षष्ठी से नवमी तक भोर से लेकर रात तक शिफ्टवार पंडाल में मौजूद रहती हैं। काकुली मुखर्जी, नंदिता दत्ता व नीतू अधिकारी ने बताया कि श्यामा प्रसाद भट्टाचार्य के नेतृत्व में फल, फूल व भोग प्रसाद तैयार किया जाता हैं। एकल दीक्षा लेने वाली महिलाएं ही मां का भोग बनाती हैं। महिलाएं पैसे भोग में पैसे भी दान करती हैं।