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स्वैच्छिक रक्तदान दिवस: वाराणसी में जोश और जज्बे के साथ रक्तदान करने पहुंचे महादानी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 01 Oct 2018 04:24 PM IST
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डीरेका अस्पताल परिसर में रक्तदान शिविर
- फोटो : अमर उजाला
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स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के मौके पर वाराणसी में लोगों ने जोश और जज्बे के साथ रक्तदान किया। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आईएमए भवन, लहुराबीर और रक्तमित्र परिवार के तत्वावधान में डीरेका अस्पताल परिसर में रक्तदान शिविर आयोजित हुआ। दोपहर तक 200 से ज्यादा यूनिट रक्तदान हुआ।
सुबह नौ बजे से शुरू अमर उजाला फाउंडेशन के शिविर में कुछ लोग पहली बार रक्त देने पहुंचे तो कुछ ऐसे भी रहे जिनके लिए रक्तदान का यह दूसरा-तीसरा तो दसवां मौका था। दूसरों की जान बचाने के संकल्प के साथ रक्तदान के लिए आए लोगों में महिलाओं की भी भागीदारी रही। यहां रक्तदान करने वालों को प्रमाण पत्र देने के साथ ही उन्हें रक्तदान की महत्ता के बारे में जानकारी भी दी गई।
रक्तदान करने से सेहत पर दुष्प्रभाव पड़ता है। यह जानकर बहुत से लोग इससे कतराते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। चिकित्सा विज्ञान की मानें तो एक स्वस्थ व्यक्ति को साल में कम से कम तीन बार रक्तदान कर सकता है।
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अब जबकि डेंगू का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, ऐसे में ब्लड बैंकों पर प्लेटलेट्स की मांग बढ़ जाती है। प्लेटलेटस भी तभी तैयार होगा, जब ब्लड बैंक में अलग-अलग ग्रुप के ब्लड रहेंगे। जरूरत के हिसाब अभी भी स्वैच्छिक रक्तदान करने वालों की संख्या बहुत कम है। ऐसे में इस तरह के शिविरों में किए जाने वाला रक्तदान जरूरतमंदों के लिए उपयोगी होता है।
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सुबह नौ बजे से शुरू अमर उजाला फाउंडेशन के शिविर में कुछ लोग पहली बार रक्त देने पहुंचे तो कुछ ऐसे भी रहे जिनके लिए रक्तदान का यह दूसरा-तीसरा तो दसवां मौका था। दूसरों की जान बचाने के संकल्प के साथ रक्तदान के लिए आए लोगों में महिलाओं की भी भागीदारी रही। यहां रक्तदान करने वालों को प्रमाण पत्र देने के साथ ही उन्हें रक्तदान की महत्ता के बारे में जानकारी भी दी गई।
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रक्तदान करने से सेहत पर दुष्प्रभाव पड़ता है। यह जानकर बहुत से लोग इससे कतराते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। चिकित्सा विज्ञान की मानें तो एक स्वस्थ व्यक्ति को साल में कम से कम तीन बार रक्तदान कर सकता है।
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अब जबकि डेंगू का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, ऐसे में ब्लड बैंकों पर प्लेटलेट्स की मांग बढ़ जाती है। प्लेटलेटस भी तभी तैयार होगा, जब ब्लड बैंक में अलग-अलग ग्रुप के ब्लड रहेंगे। जरूरत के हिसाब अभी भी स्वैच्छिक रक्तदान करने वालों की संख्या बहुत कम है। ऐसे में इस तरह के शिविरों में किए जाने वाला रक्तदान जरूरतमंदों के लिए उपयोगी होता है।