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नेशनल वॉलीबॉल महाकुंभ: पिता की वर्दी से मिली प्रेरणा, अब अपने परिवार, अनुशासन व सपनों की कहानी लिख रहे खिलाड़ी

Mon, 05 Jan 2026 04:57 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Mon, 05 Jan 2026 04:57 PM IST
सार

Varanasi News: 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में खेलने के लिए देशभर से आए कई खिलाड़ियों से अमर उजाला टीम ने बात की। इस दौरान खिलाड़ियों ने अपने अनुभव साझा किए। 

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National Volleyball Mahakumbh Players shared their experiences in Varanasi
जसवंत राठौर, पूरब जेठवा, अफरीना फातिमा और महक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सेना की वर्दी से मिली प्रेरणा, चार साल की उम्र से शुरू हुई मेहनत, बर्फीले लद्दाख से काशी तक का सफर और छोटे गांवों से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का संघर्ष...। 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में उतरे खिलाड़ी सिर्फ मुकाबला नहीं खेल रहे, बल्कि अपने परिवार, अनुशासन और सपनों की कहानी भी लिख रहे हैं। किसी को पिता और भाई का सहारा मिला, तो किसी ने बेहद कम उम्र में खेल को जीवन बना लिया। इन सभी की मंजिल एक है। राष्ट्रीय मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन। ऐसे कई खिलाड़ियों से अमर उजाला टीम ने बात की।

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पिता सेना में, वहीं से मिली खेल की प्रेरणा
आज के समय में अधिकांश युवाओं का रुझान क्रिकेट, हॉकी और बैडमिंटन की ओर है। पिता भारतीय सेना में कार्यरत हैं और बड़े भाई भी खेल क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। पिता ने वॉलीबॉल खेलने के लिए प्रेरित किया और शुरू से ही पूरा सहयोग दिया, जिसकी बदौलत आज मैं इस मुकाम पर हूं। -पूरब जेठवा, अंडमान
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चार साल की उम्र से खेल रहीं वॉलीबॉल
मुझे बचपन से वॉलीबॉल खेल ने आकर्षित किया। यही वजह है कि मैंने चार साल की उम्र से वॉलीबॉल खेलना शुरू कर दिया था। किसी भी खेल से हमें यही सीखने को मिलता है कि जीवन में कैसे एक साथ अनुशासन में चलना चाहिए। -महक, चंडीगढ़

काशी को यूट्यूब पर देख यहां खेलना सुखद

काशी आकर बहुत अच्छा लगा। कॉन्फिडेंस के साथ हमारी टीम अच्छा परफॉर्मेंस दिखाएगी। यहां का मौसम भी अच्छा है। लद्दाख में बहुत ठंड है। इसके पहले जम्मू में नेशनल खेला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जो स्पेस दिया है उसे हम बहुत मोटिवेशनल हुए हैं और उनके द्वारा काशी आने का निमंत्रण दिया गया है हम खेल के जरूर घूमेंगे। -अफरीना फातिमा, लद्दाख

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छोटे गांव से राष्ट्रीय मंच तक का सफर
हम एक छोटे से गांव से आए हैं और यहां तक पहुंचने के लिए बहुत संघषर् करना पड़ा है। बड़े भाई पुलिस में हैं। उन्होंने शुरू से मेरे खेल को सपोर्ट किया। खोलो इंडिया में 20 खेल हैं लेकिन सबसे ज्यादा मुझे बॉलीबॉल ने आकर्षित किया। -जसवंत राठौर, अंडमान

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