National Sports Day: खेल की दुनिया में भी बनारस का जलवा, इन खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया मान
पूर्वांचल में वाराणसी को खेलों की नर्सरी भी कहते हैं। जिला, प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनारसी खिलाड़ियों का जादू सर चढ़कर बोलता है। राष्ट्रीय खेल दिवस पर हम आपको काशी की समृद्ध खेल विरासत से रूबरू कराते हैं।
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वाराणसी में खेल सुविधाओं के बढ़ने से खिलाड़ियों की प्रतिभा में चमक आई है। दर्जनों खेलों के ऐसे खिलाड़ी रहे जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान की गई तैयारी की बदौलत कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीता। काशी में पारंपरिक खेलों के साथ आधुनिक और पुराने खेलों को भी बढ़ावा देने की पहल की गई है। कुश्ती, कबड्डी, एथलेटिक्स, जिमनास्टिक, खो-खो जैसे पारंपरिक खेलों के अलावा अब बनारस में खिलाड़ियों को कई नए खेल जैसे फिस्टबॉल, कुरास, स्केटिंग और मार्शल आर्ट की कई विधाओं में प्रतिभा दिखाने का मौका मिला है।
बनारस ने 10 ओलंपियन दिए
एथलेटिक्स, हॉकी, कुश्ती और तीरंदाजी में बनारस ने 10 ओलंपियन दिए हैं, अनंत राम भार्गव से शुरू हुआ यह सिलसिला आज भी जारी है। गायघाट के रहने वाले पहलवान अनंत राम भार्गव ने 1948 लंदन ओलंपिक में हिस्सा लिया था। चितईपुर के रहने वाले एथलीट गुलजारा सिंह ने 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में हिस्सा लिया।
कोइरीपुर खुर्द के रहने वाले चिक्कन पांडेय (लक्ष्मीकांत पांडेय) ने 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में हिस्सा लिया था। 1980 के मॉस्को ओलंपिक के खजूरी के हॉकी के उस्ताद मोहम्मद शाहिद, 1988 के सियोल ओलंपिक में हॉकी खिलाड़ी विवेक सिंह और 1996 के अटलांटा ओलंपिक में हॉकी खिलाड़ी राहुल सिंह ने हिस्सा लिया।
दारानगर के रहने वाले संजीव सिंह ने 1988 के सियोल ओलंपिक में तीरंदाजी में हिस्सा लिया। सुसवाही के संजय राय ने 2000 के सिडनी ओलंपिक की लंबी कूद में प्रतिभाग किया था। 2012 के लंदन ओलंपिक में चोलापुर के निमा मुमेरी गांव के नरसिंह यादव काशी का मान बढ़ा चुके हैं।
2012 के लंदन ओलंपिक में चोलापुर के बबियाव के एथलीट राम सिंह ने मैराथन में हिस्सा लिया था। बीते 2020 के टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम में ललित उपाध्याय और रामनगर के रहने वाले शिवपाल सिंह का चयन हुआ था। बीते कॉमनवेल्थ गेम्स में बनारस के विजय यादव और ललित ने पदक जीता जबकि पूर्णिमा पांडे और पूनम भारोत्तोलन में मामूली अंकों से पदक पाने में चूक गईं।
सिगरा स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय स्तर की मिलेंगी सुविधाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर सिगरा स्टेडियम को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम के रूप में विकसित किया जा रहा है। 400 करोड़ रुपये की लागत से सितंबर 2023 तक बनकर तैयार होने वाले स्टेडियम का काम शुरू हो गया है। उधर, लालपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर क्रीड़ा संकुल में भी खिलाड़ियों को अब सिंथेटिक ट्रैक, सिंथेटिक बास्केटबॉल कोर्ट की भी सुविधा मिलेगी।
बनारस में इन खेलों की सुविधा
बनारस में कुश्ती, कबड्डी, एथलेटिक्स, खो-खो, वॉलीबाल, फुटबॉल, हॉकी, तलवारबाजी, मार्शल आर्ट में कराटे, जूडो सहित कई आत्मरक्षा वाले खेल, नौकायान, तैराकी, भारोत्तोलन, जिमनास्टिक, क्रिकेट, बास्केटबॉल सहित कई खेलों के प्रशिक्षण की सुविधा है।
स्कूल में बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए सामान्य खेलों के साथ अब प्राचीन खेल गिल्ली डंडा, पिठ्ठू, होप स्कोच, बोरी रेस, लेमन रेस की प्रतियोगिता कराई जाएगी। इसकी शुरुआत खेल दिवस से होगी। - आरपी सिंह, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी