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पानी नहीं जनाब, पिला रहे हैं केमिकल

Wed, 28 Aug 2019 02:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 28 Aug 2019 02:15 AM IST
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nagar nigam
वाराणसी। पेयजल के क्लोरीनेशन के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही है। कई जगह क्लोरीनेशन हो ही नहीं हो रहा है। जहां हो भी रहा है वहां क्लोरीन की मात्रा नियंत्रित नहीं है। मेयर द्वारा कराई गई जांच में यह गड़बड़ी एक दो नहीं, बल्कि 24 नलकूपों में मिली है।
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शहरी क्षेत्र में कुल 500 पंप हाउस हैं। इसमें से 250 पुराने, 200 नए और 50 सुधारने के बाद चलाए जा रहे हैं। इन पंपों से दूषित पेयजल आपूर्ति की शिकायत पर मेयर ने जांच कराई। इसमें पता चला कि जो पानी शहरवासियों को पिलाया जा रहा है वह मानकों पर खरा नहीं है। कहीं क्लोरीन 0.5 पीपीएम से अधिक तो कहीं मिलाया ही नहीं जा रहा है। कहीं इसकी मात्रा काफी ज्यादा है। इस पर महापौर ने आईआईटी बीएचयू को पत्र लिखा। आईआईटी बीएचयू के केमिकल इंजीनियरिंग अनुभाग में इसकी जांच कराई तो पता चला कि पानी में क्लोरीन की मात्रा मानक से चार गुना ज्यादा है। यह मानव शरीर के लिए काफी घातक है।
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जुगाड़ वाली किट से क्लोरीनेशन
नगर निगम के मुख्य लेखाधिकारी मनोज कुमार त्रिपाठी ने चौकाघाट, घौसाबाद व जैतपुरा, सिगरा, गुलाब पार्क, मलदहिया, नाटी इमली, भरत मिलाप कॉलोनी, लेबर कॉलोनी के नलकूपों की जांच कराई तो वहां भी गड़बड़ी मिली। यहां भवन जर्जर हो चुके हैं। क्लोरीनेशन के लिए लगाए गए किट भी जुगाड़ के सहारे चल रही है।
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आईआईटी बीएचयू करेगा पानी की जांच
नगर निगम ने बीएचयू को पत्र लिखकर कहा है कि सामाजिक दर पर शहर की पेयजल व्यवस्था सही करने में सहयोग करें। आईआईटी बीएचयू के प्रो. पीके मिश्रा ने बताया कि नगर निगम का पत्र मिला है। इसके लिए डायरेक्टर से अनुमति की मांग की गई है। अनुमति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि क्लोरीन की मात्रा 0.5 पीपीएम से अधिक नहीं होनी चाहिए, जबकि यहां तो कोई मानक ही नहीं है। पानी में क्लोरीन की मात्रा ज्यादा होने पर पेट और गुर्दा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

---कोट---
जांच में बहुत सारी गड़बड़ियां मिली हैं। इसमें सुधार के लिए अवस्थापना निधि से काम कराया जाएगा। एक बार में तो यह संभव नहीं है। लेकिन धीरे-धीरे इसे सही करा लिया जाएगा। इसके लिए मेरठ और गजियाबाद के नगर निगम से संपर्क किया गया है। -मृदुला जायसवाल, मेयर
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