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महापौर और नगर आयुक्त ने नगर निगम अधिनियम का किया उल्लंघन
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सपा एमएलसी शतरूद्र प्रकाश ने प्रमुख सचिव नगर विकास को पत्र भेजकर अवगत कराया कि नगर निगम अधिनियम का पालन वाराणसी नगर निगम नहीं कर रहा है। महापौर और नगर आयुक्त ने नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 88 एक का जानबूझकर उल्लंघन किया है। ऐसी स्थिति में इनके ऊपर नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 531 के तहत शासन की ओर से धारा 534 की कार्रवाई की जाए।
सपा एमएलसी ने कहा कि नगर निगम को अधिनियम से मुक्त कर दिया जाए या फिर अधिनियम का पालन कराया जाए। फरवरी के बाद अब तक एक भी साधारण सभा की अधिवेशन नहीं बुलाई गई, जबकि दो महीने में कम से कम एक बैठक अनिवार्य है। महापौर ने 19 अक्टूबर को वर्चुअल बैठक बुलाई थी। इसके बाद नगर आयुक्त ने शासन से दिशा-निर्देश मांगा। महापौर के फैसले पर उन्होंने ऐसा पत्र क्यों लिखा यह तो वे स्वयं जानें। किंतु सबसे आपत्तिजनक तथ्य तो यह है कि वर्चुअल अधिवेशन बुलाए जाने की हरी झंडी देने के बाद भी आज तक वर्चुअल अधिवेशन बुलाया ही नहीं गया। बल्कि 19 को पूर्व से ही सदन आहूत करने का आदेश भी निष्क्रिय कर दिया गया। महापौर और नगर आयुक्त ने जानबूझ बदनियती से अधिनियम का उल्लंघन किया है। ऐसी स्थिति में अधिनियम का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए। इस संबंध में पहले पत्र और बाद में स्मरण पत्र दिया जा चुका है।
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सपा एमएलसी ने कहा कि नगर निगम को अधिनियम से मुक्त कर दिया जाए या फिर अधिनियम का पालन कराया जाए। फरवरी के बाद अब तक एक भी साधारण सभा की अधिवेशन नहीं बुलाई गई, जबकि दो महीने में कम से कम एक बैठक अनिवार्य है। महापौर ने 19 अक्टूबर को वर्चुअल बैठक बुलाई थी। इसके बाद नगर आयुक्त ने शासन से दिशा-निर्देश मांगा। महापौर के फैसले पर उन्होंने ऐसा पत्र क्यों लिखा यह तो वे स्वयं जानें। किंतु सबसे आपत्तिजनक तथ्य तो यह है कि वर्चुअल अधिवेशन बुलाए जाने की हरी झंडी देने के बाद भी आज तक वर्चुअल अधिवेशन बुलाया ही नहीं गया। बल्कि 19 को पूर्व से ही सदन आहूत करने का आदेश भी निष्क्रिय कर दिया गया। महापौर और नगर आयुक्त ने जानबूझ बदनियती से अधिनियम का उल्लंघन किया है। ऐसी स्थिति में अधिनियम का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए। इस संबंध में पहले पत्र और बाद में स्मरण पत्र दिया जा चुका है।
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