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Nag Panchami 2023: नागपंचमी पर दर्शन-पूजन के लिए उमड़े श्रद्धालु, कालसर्प दोष दूर करने के लिए कर रहे ये उपाय

Mon, 21 Aug 2023 09:21 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Mon, 21 Aug 2023 09:21 AM IST
सार

नागतीर्थ जैतपुरा स्थित नागकूप के पुजारी कुंदन पांडेय ने बताया कि नागकूप नागलोक में जाने मार्ग भी है। मान्यता है कि इससे कुंडली से कालसर्प दोष खत्म होता है। उन्होंने बताया कि इस प्राचीन कुंड में नागेश्वर महादेव का शिवलिंग है।

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Nag Panchami 2023: Devotees gathered for darshan-worship on Nagpanchami
नाग पंचमी - फोटो : Rohit Jha

विस्तार

सावन मास की पंचमी तिथि तीन साल बाद सोमवार को पड़ रही है और इसी दिन यानि आज नागपंचमी भी है। सुबह से ही घर से लेकर शिवालयों तक भगवान नाग देव की पूजन-अर्चन के लिए भीड़ उमड़ी है। जैतपुरा स्थित नागकूप पर दिनभर दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा है।

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लोग श्रद्धा व भक्ति भाव के साथ नागपंचमी पर घरों के दीवारों व दरवाजों पर नाग देवता के चित्र चिपका कर या गोबर से नाग देवता बनाकर पूजा कर रहे हैं। नागकूप में कालसर्प दोष दूर करने के लिए लोग दूध, लावा व बेलपत्र अर्पित कर रहे हैं। नागकूप पर रविवार को साफ-सफाई कर दर्शनार्थियों के लिए दर्शन सुलभ बनाने की तैयारी चलती रही। नागकूप पर भगवान नागेश्वर महादेव की पूजा व्याकरण के 108 बटुक भी बिल्वार्चन और दुग्धाभिषेक करेंगे। इस दौरान सुक्त और श्लोक अंत्याक्षरी होगा।

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Nag Panchami 2023: Devotees gathered for darshan-worship on Nagpanchami
नागकूप स्थित नागेश्वर महादेव के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

नागेश्वर महादेव को प्रिय है तुलसी की माला

नागतीर्थ जैतपुरा स्थित नागकूप के पुजारी कुंदन पांडेय ने बताया कि नागकूप नागलोक में जाने मार्ग भी है। मान्यता है कि इससे कुंडली से कालसर्प दोष खत्म होता है। उन्होंने बताया कि इस प्राचीन कुंड में नागेश्वर महादेव का शिवलिंग है। नागदेवता को तुलसी की माला प्रिय है। इसलिए तुलसी की माला भी चढ़ाई जाती है। कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए इस कूप में लोग स्नान भी करते हैं।

देशभर के विद्वान आज करेंगे शास्त्रार्थ

जैतपुरा स्थित नागकूप महर्षि पतंजलि की तपस्थली है। यहीं पर महर्षि पतंजलि ने अपने गुरु महर्षि पाणिनि के अष्टाध्यायी ग्रंथ पर महाभाष्य पूरा किया था। इसलिए यहां पर शास्त्रार्थ करने की परंपरा चली आ रही है। उत्तर प्रदेश नागकूप शास्त्रार्थ समिति के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि नागपंचमी पर यहां शास्त्रार्थ होगा। विभिन्न प्रांतों के संस्कृत शिक्षण संस्थानों के विद्वानों और शोध छात्र इसमें हिस्सा लेंगे। दोपहर एक बजे से शास्त्रार्थ शुरू होगा। पूर्व व उत्तर पक्ष के आधार पर नव्यन्याय शैली में शास्त्रार्थरा होगा। इसमें बीएचयू, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और शोध छात्र भी भाग लेंगे।

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