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बनारस में मोनो रेल चलाने के लिए कंपनी ने दिए प्रजेंटेशन, एक साल में हो जाएगा तैयार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 09 May 2018 04:09 PM IST
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- फोटो : demo pic
गलियों के शहर बनारस को यातायात व्यवस्था की सुगमता को लेकर मुंबई की एक कंपनी के अधिकारियों ने मंगलवार को नगर निगम में मोनो रेल चलाने का प्रजेंटेशन दिया। कंपनी के अधिकारियों ने इसकी विशेषता नगर निगम के अधिकारियों को बताई।
इसके बाद इस पर आगे शहर में काम करने की अनुमति की मांग की। इस पर अधिकारियों ने कहा कि इसके लिए पहले से ही वीडीए कार्य कर रहा है। ऐसे में मंडलायुक्त इस पर निर्णय ले सकते हैं।
नौम ट्रस कंपनी के फाइनेंशियल डायरेक्टर करन जज और प्रोजेक्ट डायरेक्टर अल्ताफ राजकोटवाला ने बताया कि यह एक रशियन टेक्नोलॉजी है। यह टेक्नोलॉजी शहर की तंग गलियों वह कम चौड़ाई वाले रास्ते के लिए विकसित की गई है।
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इसमें पतले पिलर के माध्यम से जमीन से करीब 30 से 40 फीट ऊंचाई पर ट्रैक बिछाया जाएगा। वहीं शहर की स्ट्रीट लाइट भी उसी पिलर में ही लगाए जाएंगे।
यह ट्रेन एक साल के अंदर तैयार करके रनिंग स्टेज में हैंडओवर कर दी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि इसकी टर्निंग भी सौ मीटर के दायरे में हो जाती है इससे यह काशी के लिए सबसे उपयुक्त व्यवस्था होगी।
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इसके बाद इस पर आगे शहर में काम करने की अनुमति की मांग की। इस पर अधिकारियों ने कहा कि इसके लिए पहले से ही वीडीए कार्य कर रहा है। ऐसे में मंडलायुक्त इस पर निर्णय ले सकते हैं।
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नौम ट्रस कंपनी के फाइनेंशियल डायरेक्टर करन जज और प्रोजेक्ट डायरेक्टर अल्ताफ राजकोटवाला ने बताया कि यह एक रशियन टेक्नोलॉजी है। यह टेक्नोलॉजी शहर की तंग गलियों वह कम चौड़ाई वाले रास्ते के लिए विकसित की गई है।
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इसमें पतले पिलर के माध्यम से जमीन से करीब 30 से 40 फीट ऊंचाई पर ट्रैक बिछाया जाएगा। वहीं शहर की स्ट्रीट लाइट भी उसी पिलर में ही लगाए जाएंगे।
यह ट्रेन एक साल के अंदर तैयार करके रनिंग स्टेज में हैंडओवर कर दी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि इसकी टर्निंग भी सौ मीटर के दायरे में हो जाती है इससे यह काशी के लिए सबसे उपयुक्त व्यवस्था होगी।
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पहले से चल रहा मेट्रो के डीपीआर बनाने का कार्य
metro
बनारस में मेट्रो चलाने के लिए राइट्स की टीम ने पहले चरण के सर्वे का कार्य कर लिया है। पहले टीम ने यहां की ट्रैफिक व्यवस्था और किस तरह की व्यवस्था की काशी में जरूरत है उसके लिए अभी सर्वे का कार्य कर चुकी है।
अगले चरण में अपना डीपीआर तैयार करके वीडीए को सौंपेगी। जबकि पहली बार में हुए सर्वे में राइट्स की टीम ने बीएचयू से भेल व सारनाथ से बीएचयू क्षेत्र के लिए डीपीआर बनाया था, लेकिनइस डीपीआर में कमी के चलते इस दूसरे चरण का सर्वे कराया जा रहा है।
अगले चरण में अपना डीपीआर तैयार करके वीडीए को सौंपेगी। जबकि पहली बार में हुए सर्वे में राइट्स की टीम ने बीएचयू से भेल व सारनाथ से बीएचयू क्षेत्र के लिए डीपीआर बनाया था, लेकिनइस डीपीआर में कमी के चलते इस दूसरे चरण का सर्वे कराया जा रहा है।