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बसंत पंचमी पर होगी मां वाग्देवी की आराधना
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बसंत पंचमी पर ज्ञान की देवी मां वाग्देवी की आराधना होगी। शिव की नगरी में मां सरस्वती की आराधना की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार शहर से गांव तक मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित होंगी और दर्शन पूजन होंगे। जिले भर में तीन सौ से अधिक स्थानों पर मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।
बसंत पंचमी का त्योहार पांच फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन शिक्षण संस्थानों के अलावा कई जगहों पर पंडालों में वीणावादिनी माता सरस्वती की प्रतिमा सजाई जाती है और उनका पूजन किया जाता है। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि पांच फरवरी को मां सरस्वती की आराधना करने के लिए पांच घंटे और 28 मिनट का शुभ मुहूर्त मिल रहा है। पंचमी तिथि पर भक्त सुबह 7:19 मिनट से दोपहर 12:35 मिनट तक माता सरस्वती की पूजा कर सकते हैं।
वहीं, नदेसर, जगतगंज, दशाश्वमेध, चौक, रामघाट, चौखंभा आदि क्षेत्रों में मूर्ति स्थापना की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मूर्तिकारों के भी चेहरे खिले हुए हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण काल के कारण प्रतिमाओं के आर्डर कम हुए हैं। पांडेय हवेली के मूर्तिकार बंशी ने बताया कि ढाई महीनों से मूर्तियां बनाई जा रही हैं। कोरोना की वजह से मूर्तियों के आर्डर कम हैं। कोनिया के शंकर ने बताया कि मूर्ति निर्माण का काम अंतिम दौर में हैं। एक मूर्ति बनाने में दस दिन का समय लगता है। दुर्गा ने बताया कि हर साल वह 30 मूर्तियां बनाते हैं लेकिन अभी तक आर्डर कम हैं।
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सरस्वती फाटक पर विराजेंगी मां सरस्वती
श्री काशी विश्वनाथ धाम में बसंत पंचमी पर मां सरस्वती का विग्रह सरस्वती फाटक पर विराजमान होंगी। लगभग दो साल के लंबे अंतराल के बाद विग्रह को अपने पुराने स्थान पर विराजमान कराया जाएगा। सरस्वती फाटक से काशी में सरस्वती पूजन की शुरुआत हुई थी। सरस्वती मंदिर परिवार से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा ने बताया कि नौवीं शताब्दी में आदिशंकराचार्य ने मां सरस्वती की प्रतिमा को फाटक पर स्थापित किया था। काशी में पिछले 13 सौ सालों से सरस्वती पूजन की परंपरा अनवरत चली आ रही है।
पूजा की विधि
ज्योतिषाचार्य पं. दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि पंचमी तिथि पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा का संकल्प लें। इस दौरान पीले रंग का वस्त्र धारण करें। इसके बाद गंगाजल से पूजा स्थल पर छिड़काव के साथ पूजा आरंभ करें। चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर मां सरस्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। देवी सरस्वती को पीला वस्त्र, पीला चंदन, पीला फूल, पीला भोग, हल्दी, अक्षत और केसर को अर्पित करें। इसके बाद मां को भोग लगाएं और मां सरस्वती की आरती करें।
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बसंत पंचमी का त्योहार पांच फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन शिक्षण संस्थानों के अलावा कई जगहों पर पंडालों में वीणावादिनी माता सरस्वती की प्रतिमा सजाई जाती है और उनका पूजन किया जाता है। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि पांच फरवरी को मां सरस्वती की आराधना करने के लिए पांच घंटे और 28 मिनट का शुभ मुहूर्त मिल रहा है। पंचमी तिथि पर भक्त सुबह 7:19 मिनट से दोपहर 12:35 मिनट तक माता सरस्वती की पूजा कर सकते हैं।
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वहीं, नदेसर, जगतगंज, दशाश्वमेध, चौक, रामघाट, चौखंभा आदि क्षेत्रों में मूर्ति स्थापना की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मूर्तिकारों के भी चेहरे खिले हुए हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण काल के कारण प्रतिमाओं के आर्डर कम हुए हैं। पांडेय हवेली के मूर्तिकार बंशी ने बताया कि ढाई महीनों से मूर्तियां बनाई जा रही हैं। कोरोना की वजह से मूर्तियों के आर्डर कम हैं। कोनिया के शंकर ने बताया कि मूर्ति निर्माण का काम अंतिम दौर में हैं। एक मूर्ति बनाने में दस दिन का समय लगता है। दुर्गा ने बताया कि हर साल वह 30 मूर्तियां बनाते हैं लेकिन अभी तक आर्डर कम हैं।
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सरस्वती फाटक पर विराजेंगी मां सरस्वती
श्री काशी विश्वनाथ धाम में बसंत पंचमी पर मां सरस्वती का विग्रह सरस्वती फाटक पर विराजमान होंगी। लगभग दो साल के लंबे अंतराल के बाद विग्रह को अपने पुराने स्थान पर विराजमान कराया जाएगा। सरस्वती फाटक से काशी में सरस्वती पूजन की शुरुआत हुई थी। सरस्वती मंदिर परिवार से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा ने बताया कि नौवीं शताब्दी में आदिशंकराचार्य ने मां सरस्वती की प्रतिमा को फाटक पर स्थापित किया था। काशी में पिछले 13 सौ सालों से सरस्वती पूजन की परंपरा अनवरत चली आ रही है।
पूजा की विधि
ज्योतिषाचार्य पं. दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि पंचमी तिथि पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा का संकल्प लें। इस दौरान पीले रंग का वस्त्र धारण करें। इसके बाद गंगाजल से पूजा स्थल पर छिड़काव के साथ पूजा आरंभ करें। चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर मां सरस्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। देवी सरस्वती को पीला वस्त्र, पीला चंदन, पीला फूल, पीला भोग, हल्दी, अक्षत और केसर को अर्पित करें। इसके बाद मां को भोग लगाएं और मां सरस्वती की आरती करें।