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मदर्स डे स्पेशल : मुसीबतों से लड़कर बेटियों के अरमान पूरे कर रही मां

Sun, 14 May 2017 06:29 PM IST
amarujala.com- Written by: तबस्सुम
amarujala.com- Written by: तबस्सुम Updated Sun, 14 May 2017 06:29 PM IST
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Mother's Day Special: A mother fulfilling daughters' arman by fighting with troubles
नंदिनी देवी - फोटो : अमर उजाला

जिंदगी के अखाड़े में मुफलिसी से एक मां का दंगल जारी है। मुसीबतें हैं कि कम नहीं हो रहीं, और मां है कि जीतने की जिद पर अड़ी है। करीब 15 साल से ठेले पर डोसा बेचकर वो मां अपने बच्चों की जिंदगी संवारने में लगी है। अब तो उसकी कोशिशें रंग लाने लगी हैं।

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एक बेटी ने टेबल टेनिस में नेशनल खेला है। दूसरी बेटी का सेलेक्शन स्पोर्ट्स एथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) में हो गया है। वह एथलीट है। तीन बड़ी बेटियों को पढ़ाकर उनकी शादी करा दी है। महमूरगंज के निरालानगर की नंदिनी देवी का सपना है कि उनकी बेटियां खेल में देश और बनारस का नाम रोशन करें।
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नंदिनी के पति रतन लाल मौर्या पानी की सप्लाई करते हैं। दो बेटे और पांच बेटियों वाले परिवार का इससे गुजारा नहीं हो पा रहा था। उस पर बड़े बेटे की आंख के इलाज में लाखों रुपये खर्च हो गए। गृहस्थी की गाड़ी बेपटरी हो गई। तब नंदिनी ने काम करने की ठानी।
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करीब 15 साल पहले किराए के एक कमरे में, जिसमें पूरा परिवार बड़ी मुश्किल से आ पाता है, के बाहर ठेले पर डोसा बनाकर बेचना शुरू किया। हालात मुश्किल थे, बावजूद नंदिनी ने पांचों बच्चों को पढ़ाया। छोटी दो बेटियों बिरांद्री और एकता का झुकाव खेल की तरफ था लेकिन माली हालत इजाजत नहीं दे रहे थे।

बावजूद नंदिनी ने बेटियों के सपनों की खातिर संघर्ष किया। दिन में घर के काम निपटाती। शाम होते ठेला लगाती। रात तक मेहनत के बाद 250-300 रुपये की आमदनी होती। इसेे वह बेटियों की खेल की सुविधाओं में खर्च कर देती। टेबिल टेनिस के महंगे रैकेट, प्रैक्टिस के लिए ब्रांडेड शूज, देर से ही सही लेकिन बेटियों को दिलाती।


बिरांद्री अब एक कान्वेंट स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर है। उसे बीपीएड करना है लेकिन दिक्कत पैसों की है। प्रैक्टिस के साथ उसने नौकरी शुरू कर दी है। बिरांद्री का कहना है कि मां ने कड़ी मेहनत कर उन्हें यहां तक पहुंचाया है।



नंदिनी कहती हैं कि गरीबी जीवन में एक परीक्षा है। इससे भागा नहीं, सीखा है मैंने। मेरी पूरी कोशिश होती है कि भले ही घर में दाल रोटी ही बने लेकिन बेटियों की प्रैक्टिस न रुकने पाए।

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