मदर्स डे: सलाम इन मांओं को, जिनके बेटे सरहद पर तैनात हैं... छाती चाैड़ी कर देगा इनका अनुभव; होगा गर्व
Mother’s Day 2025: भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान इन दिनों बॉर्डर पर तैनात फौजियों की कुशलक्षेम के लिए उनकी माताएं सबसे ज्यादा चिंतित रहीं। मदर्स डे की पूर्व संध्या पर शनिवार को बॉर्डर पर तैनात फौजियों की माताओं से अमर उजाला ने बातचीत की।
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India Pakistan War: वीर सैनिकों की मांओं का बुलंद स्वर में कहना था कि ऊपर वाले से यही प्रार्थना रहती है कि बेटा हमारा सुरक्षित रहे। मगर, देश की सुरक्षा में आंच न आने पाए। देश सबसे पहले है और घर-परिवार उसके बाद...।
डर तो लगता ही है, गर्व भी होता है
गाजीपुर के पटकनिया गांव के मूल निवासी और पहड़िया में रहने वाले राघवेंद्र प्रताप सिंह 52 बटालियन सीआरपीएफ में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में तैनात हैं। उनकी मां रामसखी रघुवंशी ने कहा कि हमारा बेटा अपने मामा कैप्टन योगिंद्र नाथ सिंह और चाचा हवलदार श्रीकांत सिंह से प्रेरित होकर सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था।
भारत और पाकिस्तान के बीच जो स्थिति रहती है, उसके चलते अपने बेटे को लेकर डर तो लगता ही है। मगर, उससे ज्यादा अपने बेटे पर गर्व भी होता है। मेरा बेटा हमेशा कहता है कि इस देश और मिट्टी की रक्षा का संकल्प हमने लिया है। तुम चिंता मत करना मां...।
एनसीसी के समय सेना में जाने का बेटे ने बना लिया था मन
रोहनिया के दरेखू निवासी पवन सिंह जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में सेना में तैनात हैं। उनकी मां विमला देवी ने कहा कि हमारा बेटा एनसीसी का बेस्ट कैडेट था और उसी समय वह सेना में जाने का मन बना लिया था। हमें गर्व है कि हमारे कलेजे का टुकड़ा भारतीय फौज में है और मैं उसकी मां हूं। पवन से गुरुवार की रात बात हुई थी। उसने कहा था कि मां हमारी चिंता मत करना, मैं अपने साथियों के साथ सुरक्षित हूं।
गर्व है कि हमारा बेटा देश की हिफाजत कर रहा है
चौबेपुर के अजांव गांव की रहने वाली मीरा उपाध्याय ने बताया कि उनके तीन बेटे हैं। बड़ा बेटा सचिन उपाध्याय एक वर्ष पूर्व जम्मू-कश्मीर से रिटायर्ड हो गया। बीच वाला बेटा आशीष उपाध्याय जम्मू-कश्मीर में सेना में तैनात है। सबसे छोटा बेटा बंगलूरू में दक्षिण भारत की सीमा पर तैनात हैं। पति मंशा उपाध्याय भी सूबेदार पद से रिटायर्ड हैं। हमें गर्व है कि हमारा बेटा देश की हिफाजत कर रहा है।
बेटे के फोन का इंतजार कर रहे हैं
मिर्जापुर के कटका के मूल निवासी और फुलवरिया क्षेत्र की मानस नगर कॉलोनी में रहने वाले शैलेश पाल इस समय जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में तैनात है। उनकी मां केवला देवी ने बताया कि देश की सीमा पर तनाव की स्थिति को लेकर हमारा फौजी बेटा फोन पर बता रहा था कि क्या चल रहा था। उसने समझाया भी था कि मां आप लोग परेशान मत होना और हमारी चिंता मत करना। हम जब फ्री रहेंगे तो फोन कर बात जरूर करेंगे। इसलिए बेटे के फोन का इंतजार कर रहे हैं।
लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर डटा है बेटा
राजातालाब के नरोत्तमपुर गांव निवासी मनीष कुमार सिंह इन दिनों लद्दाख में भारत-चीन की सीमा पर डटे हुए हैं। मनीष की माता रामा देवी ने कहा कि वर्ष 2007 में जुलाई में हमारा बेटा आईटीबीपी में भर्ती हुआ था। दो साल तक अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास की सुरक्षा में वह रहा। इन दिनों मनीष भारत-चीन की सीमा पर तैनात है। मनीष पढ़ाई के समय से ही देश सेवा की बात करता था। मां की ममता अपने बच्चों के लिए भला कहां कभी कम होती है।
परिवार की दूसरी पीढ़ी भी देश सेवा में है
चिरईगांव के जाल्हूपुर मधुकरपुर गांव के रहने वाले प्रकाश यादव पठानकोट में भारतीय सेना में तैनात हैं। उनकी मां गीता यादव ने कहा कि हमारे पति रामानंद यादव फौज से सेवानिवृत्त हैं। उनके बाद तीन बेटों में हमारा सबसे बड़ा बेटा प्रकाश सेना में गया।
हमें गर्व है कि हमारे परिवार की दूसरी पीढ़ी भी मां भारती की सेवा में लगी है। मेरा बेटा दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देना जानता है। हालांकि उसकी मां होने के कारण चिंता भी होती है। मगर, वह कहता है कि मां तुम एक फौजी की मां हो। इसलिए हमारी चिंता मत करना।