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Varanasi News: गर्भावस्था में मां नहीं रख रही पोषण का ख्याल, बच्चों में बढ़ रहा मोतियाबिंद का खतरा

Fri, 22 Nov 2024 03:25 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 22 Nov 2024 03:25 AM IST
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Mother is not taking care of nutrition during pregnancy, risk of cataract is increasing in children
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गर्भावस्था में मां नहीं रख रही पोषण का ख्याल, बच्चों में बढ़ रहा मोतियाबिंद का खतरा

-बीएचयू अस्पताल में हर सप्ताह 20 साल से कम उम्र के पांच बच्चों की आंख का हो रहा ऑपरेशन
-प्रसव से पहले विटामिन डी, कैल्शियम की कमी है मुख्य वजह

माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। गर्भावस्था में महिलाओं को सेहत पर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। इसमें जरा सी लापरवाही से न केवल उनकी सेहत बल्कि होने वाले बच्चे की सेहत पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। कोई बच्चा मानक से कम वजन पैदा होता है तो किसी को अन्य समस्याएं रहती हैं। इस समय बच्चों और किशोरों में मोतियाबिंद की समस्या बढ़ी है। बीएचयू अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में हर सप्ताह 20 साल से कम उम्र के 5 बच्चों, किशोरों की आंखों का ऑपरेशन किया जा रहा है। डॉक्टर इसके पीछे गर्भावस्था में महिलाओं में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी को मुख्य वजह बता रहे हैं।

आंखों में मोतियाबिंद की समस्या होने को पहले लोग बढ़ती उम्र की बीमारी मानते थे लेकिन अब यह कम उम्र में ही होने लगी है। बीएचयू नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में बच्चों और किशोरों में आंखों की रोशनी कमजोर होने की समस्या लेकर अभिभावक पहुंच रहे हैं। डॉक्टर कुछ लोगों को जांच करवाने की सलाह दे रहे हैं तो कुछ की जांच में मोतियाबिंद की पुष्टि होने के बाद ऑपरेशन भी किया जा रहा है। सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात यह है कि मोतियाबिंद की जद में छह माह के बच्चे भी आ रहे हैं।
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नवंबर में छह माह के बच्चे की आंख का हुआ ऑपरेशन

आईएमएस बीएचयू क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के प्रोफेसर दीपक मिश्रा का कहना है कि पिछले सप्ताह ही छह माह के बच्चे की आंखों में सही रोशनी न होने की समस्या लेकर परिजन आए। जांच में मोतियाबिंद की पुष्टि के बाद ऑपरेशन कर लेंस लगाया। चिकित्सकीय भाषा में इसे कंजेनिटाइल कंट्रेक्ट कहा जाता है। हर ओपीडी में औसतन 10 ऐसे बच्चे आते हैं, जिनकी उम्र 20 साल से कम है। हर सप्ताह विभाग में करीब 5 बच्चों की आंखों का ऑपरेशन होता है। कम उम्र में मोतियाबिंद और आंखों की रोशनी कमजोर होने की वजह प्रसव से पहले मां का सही तरह से खान-पान न होना ही है।
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बरतनी होंगी ये सावधानियां -
-प्रसव के पहले कैल्शियम, विटामिन मिलता रहे इसलिए पहले महीने से ही खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
-डॉक्टर की सलाह पर नियमित जांच भी करवाना चाहिए।
-किसी तरह की समस्या हो तो बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दवा नहीं खानी चाहिए।
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