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Varanasi News: गुंदेचा बंधुओं के स्वरों और प्रो. विश्वंभरनाथ के पखावज से मां गंगा-शिव को एकाकार
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शिवाराधना को समर्पित अंतरराष्ट्रीय ध्रुपद मेले की अंतिम निशा में कलाकारों ने सुर, लय और ताल से भगवान शिव के अभिषेक किया। ध्रुपद तीर्थ तुलसीघाट से दिग्गज कलाकार उमाकांत गुंदेचा और अनंत रमाकांत गुंदेचा के ध्रुपद के स्वरों को संकट मोचन के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने पखावज से विस्तार देकर मां गंगा और शिव को एकाकार किया।
महाराज बनारस विद्या मंदिर न्यास एवं ध्रुपद समिति की ओर से आयेाजित ध्रुपद मेले के समापन पर नौ कलाकारों ने हाजिरी लगाई। मुख्य आकर्षण समिति के आयोजक प्रख्यात कलाकार उमाकांत गुंदेचा और अनंत रमाकांत गुंदेचा के साथ मेला के संयोजक प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र की जुगलबंदी रही। उन्होंने गुंदेजा बंधुओं ने गायन की प्राचीन विधा ध्रुपद को साधा तो चिरपरिचित अंदाज में प्रो. विश्वंभरनाथ ने पखावज से शिवत्व का एहसास कराया। गुंदेचा बंधुओं ने जयति जयति जय गणेश...प्रथमेश का वंदन किया। इसके बाद भगवान शिव पर आधारित वंदिशों को स्वर से माहौल से शिवमय बना दिया। महंत जी ने पखावज पर लयकारियों से सभी को मुग्धकर दिया। तानपुरे पर किम वुरी और मोमोको ने संगत की। वरिष्ठ कलाकार पं. डालचंद्र शर्मा और शिष्य पं. मन मोहन नायक का पखावज वृंद वादन की प्रस्तुति हुई। संवादिनी पर मोहित साहनी ने संगत की। आशुतोष भट्टाचार्या ने राग छायानट में बंदिश को स्वर दिया। बोल थे- कृपा करो तुम भोला नाथ शंभो...। अन्य बंदिशों से शिव की उपासना की। पखावज पर आदित्यदीप और तानपुरे पर सात्विक भट्टाचार्या व प्रशांत गौंड ने संगत की। अहमदबाद के पेलवा नायक, कैलिफोर्निया की गायत्री, रांची के कृष्ण मोहन पाठक, शैलेंद्र कुमार पाठक ने गयान से विभोर किया। संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य, जगदीश्वरी चौबे तथा नागेंद्र शर्मा ने किया।
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महाराज बनारस विद्या मंदिर न्यास एवं ध्रुपद समिति की ओर से आयेाजित ध्रुपद मेले के समापन पर नौ कलाकारों ने हाजिरी लगाई। मुख्य आकर्षण समिति के आयोजक प्रख्यात कलाकार उमाकांत गुंदेचा और अनंत रमाकांत गुंदेचा के साथ मेला के संयोजक प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र की जुगलबंदी रही। उन्होंने गुंदेजा बंधुओं ने गायन की प्राचीन विधा ध्रुपद को साधा तो चिरपरिचित अंदाज में प्रो. विश्वंभरनाथ ने पखावज से शिवत्व का एहसास कराया। गुंदेचा बंधुओं ने जयति जयति जय गणेश...प्रथमेश का वंदन किया। इसके बाद भगवान शिव पर आधारित वंदिशों को स्वर से माहौल से शिवमय बना दिया। महंत जी ने पखावज पर लयकारियों से सभी को मुग्धकर दिया। तानपुरे पर किम वुरी और मोमोको ने संगत की। वरिष्ठ कलाकार पं. डालचंद्र शर्मा और शिष्य पं. मन मोहन नायक का पखावज वृंद वादन की प्रस्तुति हुई। संवादिनी पर मोहित साहनी ने संगत की। आशुतोष भट्टाचार्या ने राग छायानट में बंदिश को स्वर दिया। बोल थे- कृपा करो तुम भोला नाथ शंभो...। अन्य बंदिशों से शिव की उपासना की। पखावज पर आदित्यदीप और तानपुरे पर सात्विक भट्टाचार्या व प्रशांत गौंड ने संगत की। अहमदबाद के पेलवा नायक, कैलिफोर्निया की गायत्री, रांची के कृष्ण मोहन पाठक, शैलेंद्र कुमार पाठक ने गयान से विभोर किया। संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य, जगदीश्वरी चौबे तथा नागेंद्र शर्मा ने किया।
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