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‘मोस्ट बैकवर्ड-युवा दलित’ मोदी के स्टार्टअप इंडिया से खुशः कलराज मिश्र

Tue, 28 Feb 2017 08:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 28 Feb 2017 08:26 PM IST
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 'Most Backward-young Dalit Modi startup Khusः Kalraj Mishra from India
कलराज मिश्र - फोटो : amar ujala

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पांचवें चरण की सोमवार को पोलिंग के बाद यूपी में चुनावी घमासान पूर्वांचल में आखिरी दो दौर के होने वाले मतदान की ओर बढ़ जाएगा। अब सूबे में किसके सिर जीत का सेहरा सजेगा, कौन सरकार बनाएगा? किसी दल को पूर्ण जनादेश मिलेगा या फिर खंडित जनमत होगा? जैसे सवालों पर विश्लेषक और दिग्गज माथापच्ची करने लगे हैं। यूपी की सियासत में दखल रखने वाले भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री कलराज मिश्र पश्चिम से कानपुर, अवध से ब्रज और गोरखपुर से काशी प्रांत तक अधिकतर जगहों पर बसपा से, कहीं रालोद से और कुछ स्थानों पर सपा-कांग्रेस गठबंधन से भाजपा का मुकाबला मान रहे हैं। यहां पेश हैं उनसे हुई बातचीत के खास अंश...।
 


यूपी समेत आजमगढ़-गोरखपुर मंडल से लेकर वाराणसी और मिर्जापुर मंडल तक आप किससे मुकाबला मानते हैं? 
यूपी में जनरलाइज कर के कहना ठीक नहीं होगा। पहले चरण में ज्यादातर स्थानों पर बीएसपी से, कुछ जगहों पर रालोद और कहीं-कहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन से लड़ाई है। दूसरे चरण में कहीं बीएसपी तो कहीं सपा लड़ी है। अवध में 2012 में जहां सिर्फ सपा थी, वहां भी हमने बेहतर प्रदर्शन किया है। सबकी लड़ाई भाजपा से है।  

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टिकट बंटवारे से उपजे अंतर्विरोध के बाद काशी से कौशांबी तक बागी भाजपा की राह में कांटे बनकर खड़े हैं। इससे पूर्वांचल में नुकसान होगा? 
इस बार क्षणिक विरोधों से अलग पूर्वांचल में जो अच्छी बात हुई है, वह यह कि ‘मोस्ट बैकवर्ड’ और ‘युवा दलित’ पीएम मोदी के ‘स्टार्ट अप इंडिया’, ‘एससीएसटी हब’ से प्रभावित होकर जातिगत राजनीति से अलग हुआ है। अब वह जाति की राजनीति में फंसने की बजाय आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है। इसका फायदा इस चुनाव में मिलेगा।  

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सपा-कांग्रेस गठबंधन भी सरकार बनाने का दावा कर रहा है? 
पिछड़ों को मुलायम सिंह यादव की सपा के भीतर हाल के दिनों में सामने आई निसहायता को देख काफी धक्का लगा है। गैर कांग्रेसवाद का नारा देने वाली सपा द्वारा राहुल गांधी से हाथ मिलाने के कारण सपा से जुड़ा बड़ा तबका नाराज है। कांग्रेस का वोट सपा के साथ जुड़ेगा, संभव नहीं लगता।

यूपी में कितनी सीटें मिलने की उम्मीद है? 
नंबर तो नहीं बताएंगे लेकिन मेरा अनुमान है कि हमें बहुमत प्राप्त होगा। पीएम मोदी के काम और जनता का भरोसा जीतने की वजह से हर वर्ग भाजपा के साथ नजर आ रहा है। 
खंडित जनादेश मिला तो भाजपा किसका सहयोग लेगी?
अपनी जनसभाओं में भी कह चुका हूं कि सरकार बनाने के लिए बसपा से सहयोग नहीं लिया जा सकता। और किसी दल से हाथ मिलाने का तो औचित्य ही नहीं है। 
 

 

सरकार बनी तो सीएम कौन होगा, आप या यूपी का कोई दूसरा चेहरा?
सीएम की रेस में मैं नहीं हूं। पार्टी का सिपाही हूं और निर्देश पर काम करता रहा हूं। सीएम कौन बनेगा, यह तय करना पार्टी नेतृत्व का काम है। बहुमत मिलने के बाद पार्लियामेंट्री बोर्ड सीएम के नाम का चयन करेगा।


भाजपा की सरकार बनी तो सबसे पहले कौन सा कदम उठाएंगे? 
मोदी जी कह चुके हैं कि पहली कैबिनेट की बैठक में किसानों की कर्ज माफी का निर्णय लेंगे। साथ ही प्रदेश में विकास की प्रक्रिया को बढ़ाने, भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन देने के लिए कुछ मापदंडों पर आधारित जर्जर कानून-व्यवस्था को मजबूत कर सुशासन देंगे।
भाजपा हमेशा परिवारवाद-वंशवाद के खिलाफ रही है लेकिन कैंट सीट पर ऐसा नहीं हुआ? 
 

 

पार्टी में काम करने वाले नेता को टिकट देना उचित है। प्रश्नगत मामले में भी परिवार के नाते टिकट नहीं दिया गया है।

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