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MLC बृजेश सिंह को कोर्ट से झटका, सिकरौरा नरसंहार कांड में नाबालिग नहीं
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 13 Oct 2017 10:36 AM IST
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एमएलसी बृजेश सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
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यूपी के बहुचर्चित सिकरौरा नरसंहार मामले में आरोपित एमएलसी बृजेश सिंह को गुरुवार को कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। एडीजे (प्रथम) पीके शर्मा की कोर्ट ने बृजेश सिंह को वारदात के दौरान बालिग माना है। इसके साथ ही मामले की सुनवाई की अगली तिथि 23 अक्तूबर नियत की गई है।
कोर्ट के फैसले के साथ ही इस मामले में बृजेश सिंह के खिलाफ ट्रायल चलने का रास्ता खुल गया। वहीं, इसकी जानकारी होते ही बृजेश और कचहरी में जुटे उनके समर्थक मायूस दिखे।
चंदौली के बलुआ थाने के सिकरौरा गांव में नौ अप्रैल, 1986 की रात 11 बजे ग्राम प्रधान रामचंद्र यादव और उनके परिजनों समेत सात लोगों की हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोप में बृजेश सिंह को वारदात की अगली सुबह गिरफ्तार किया गया था।
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इस वारदात में बृजेश को भी गोली लगी थी। वादिनी हीरावती देवी और उनके विधिक पैरोकार राकेश न्यायिक ने हाईकोर्ट से आदेश लेकर मामले की त्वरित सुनवाई के लिए वाराणसी सत्र न्यायालय में मुकदमा स्थानांतरित कराया था।
वादिनी का बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई ही थी कि बृजेश सिंह ने कोर्ट में आवेदन कर दलील दी कि वारदात के दौरान वो नाबालिग थे और उनकी जन्मतिथि हाईस्कूल प्रमाणपत्र में एक जुलाई, 1968 है।
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कोर्ट के फैसले के साथ ही इस मामले में बृजेश सिंह के खिलाफ ट्रायल चलने का रास्ता खुल गया। वहीं, इसकी जानकारी होते ही बृजेश और कचहरी में जुटे उनके समर्थक मायूस दिखे।
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चंदौली के बलुआ थाने के सिकरौरा गांव में नौ अप्रैल, 1986 की रात 11 बजे ग्राम प्रधान रामचंद्र यादव और उनके परिजनों समेत सात लोगों की हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोप में बृजेश सिंह को वारदात की अगली सुबह गिरफ्तार किया गया था।
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इस वारदात में बृजेश को भी गोली लगी थी। वादिनी हीरावती देवी और उनके विधिक पैरोकार राकेश न्यायिक ने हाईकोर्ट से आदेश लेकर मामले की त्वरित सुनवाई के लिए वाराणसी सत्र न्यायालय में मुकदमा स्थानांतरित कराया था।
वादिनी का बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई ही थी कि बृजेश सिंह ने कोर्ट में आवेदन कर दलील दी कि वारदात के दौरान वो नाबालिग थे और उनकी जन्मतिथि हाईस्कूल प्रमाणपत्र में एक जुलाई, 1968 है।
वारदात को हो गए 31 वर्ष
इस पर वादिनी के विधिक पैरोकार राकेश न्यायिक ने आपत्ति जताई। साथ ही, आर्म्स लाइसेंस, डीएल, पासपोर्ट सहित अन्य महत्वपूर्ण कागजात प्रस्तुत कर न्यायालय को बताया कि बृजेश की जन्मतिथि नौ नवंबर, 1964 है और वे वारदात के दौरान बालिग थे।
अदालत ने इस मामले में सुनवाई के बाद बृजेश की जन्मतिथि 1964 को सही पाया और फैसला सुनाया कि सिकरौरा नरसंहार के दौरान वो बालिग थे। वारदात के 31 वर्ष बाद वृद्ध हो चली हीरावती का बयान इस प्रकरण में महत्वपूर्ण होगा।
प्रकरण में जमीन विवाद में सात लोगों की नृशंस हत्या और आपराधिक इतिहास को कोर्ट ने गंभीर माना है। इस मामले में अभियोजन की पैरवी अपर शासकीय अधिवक्ता राशिद जमाल सिद्दीकी, वादिनी के अधिवक्ता योगेंद्र नारायण सिंह, विश्राम यादव, अश्वनी गुप्ता और अमरेंद्र विक्रम सिंह ने की।
अदालत ने इस मामले में सुनवाई के बाद बृजेश की जन्मतिथि 1964 को सही पाया और फैसला सुनाया कि सिकरौरा नरसंहार के दौरान वो बालिग थे। वारदात के 31 वर्ष बाद वृद्ध हो चली हीरावती का बयान इस प्रकरण में महत्वपूर्ण होगा।
प्रकरण में जमीन विवाद में सात लोगों की नृशंस हत्या और आपराधिक इतिहास को कोर्ट ने गंभीर माना है। इस मामले में अभियोजन की पैरवी अपर शासकीय अधिवक्ता राशिद जमाल सिद्दीकी, वादिनी के अधिवक्ता योगेंद्र नारायण सिंह, विश्राम यादव, अश्वनी गुप्ता और अमरेंद्र विक्रम सिंह ने की।