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अपनों के बीच पहुंचकर भावुक हुए एमएलसी एके शर्मा
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मुहम्मदाबाद गोहना। अधिकारी से राजनेता बने पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एके शर्मा शनिवार को रात लगभग 9:30 बजे अपने पैतृक गांव काझाखुर्द पहुंचे। इस दौरान उनके स्वागत के लिए वहां उमड़े जनसैलाब और मौजूद लोगों का प्यार देखकर उनकी आंखें नम हो गई।
उन्होंने कहा कि लगभग 32 सालों से परदेस में रहकर चाहे जितना भी नाम यश, वैभव मिला हो, लेकिन आज अपनों के बीच आकर और उनके प्यार और से मेरी आंखें नम हो गई है। मेरा राजनीति में आना सेवा का एकमात्र माध्यम है। मैं ताउम्र लोगों की सेवा करता रहूंगा और संकल्प लेता हूं कि मेरा शेष जीवन लोगों की सेवा और विकास के लिए समर्पित रहेगा।
इसके पूर्व लखनऊ से अपने पैतृक गांव लगभग 250 से अधिक चार पहिया वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे एके शर्मा का पूरे रास्ते में जबरदस्त स्वागत किया गया। लखनऊ, बाराबंकी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर और आजमगढ़ जनपद में सैकड़ों तोरण द्वार बनाए गए और उनके काफिले को रोककर स्वागत किया गया। गांव की सीमा पर भी उनका स्वागत हुआ। गांव में उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज में मूर्ति पर माल्यार्पण किया और पूर्व जिला अध्यक्ष सुशील राय को याद किया। इस दौरान स्वागत करने वालों में प्रमुख रूप से रामसनेही राय, मथुरा राय, राघवेंद्र राय, विनोद यादव, अनिल राय, नरेंद्र तिवारी, संजय राय, धीरेंद्र राय, सुमित राय, शैलेन्द्र राय, तारकेश्वर राय, रुधिर राय, बंटी राय आदि समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि लगभग 32 सालों से परदेस में रहकर चाहे जितना भी नाम यश, वैभव मिला हो, लेकिन आज अपनों के बीच आकर और उनके प्यार और से मेरी आंखें नम हो गई है। मेरा राजनीति में आना सेवा का एकमात्र माध्यम है। मैं ताउम्र लोगों की सेवा करता रहूंगा और संकल्प लेता हूं कि मेरा शेष जीवन लोगों की सेवा और विकास के लिए समर्पित रहेगा।
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इसके पूर्व लखनऊ से अपने पैतृक गांव लगभग 250 से अधिक चार पहिया वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे एके शर्मा का पूरे रास्ते में जबरदस्त स्वागत किया गया। लखनऊ, बाराबंकी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर और आजमगढ़ जनपद में सैकड़ों तोरण द्वार बनाए गए और उनके काफिले को रोककर स्वागत किया गया। गांव की सीमा पर भी उनका स्वागत हुआ। गांव में उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज में मूर्ति पर माल्यार्पण किया और पूर्व जिला अध्यक्ष सुशील राय को याद किया। इस दौरान स्वागत करने वालों में प्रमुख रूप से रामसनेही राय, मथुरा राय, राघवेंद्र राय, विनोद यादव, अनिल राय, नरेंद्र तिवारी, संजय राय, धीरेंद्र राय, सुमित राय, शैलेन्द्र राय, तारकेश्वर राय, रुधिर राय, बंटी राय आदि समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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