{"_id":"6a2876417bf04d214f074836","slug":"mixed-martial-arts-craze-in-the-city-of-akhadas-asian-games-preparations-underway-in-kashi-400-undergoing-training-varanasi-news-c-20-vns1103-1423440-2026-06-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: अखाड़ों के नगर में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स का क्रेज, एशियन गेम्स की तैयारी काशी में, 400 को ट्रेनिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: अखाड़ों के नगर में मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स का क्रेज, एशियन गेम्स की तैयारी काशी में, 400 को ट्रेनिंग
विज्ञापन
देसी-विदेशी पहलवानों के अखाड़ों का शहर बनारस अब मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स आर्ट्स (एमएमए) तेजी से सीख रहा है। पहली बार मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स को एशियन गेम्स का हिस्सा बनाए जाने के बाद काशी में 400 से ज्यादा युवाओं को स्ट्राइकिंग, राउंड किक, टेक डाउन, सबमिशन, सुपरमैन पंच जैसे मूव और तकनीक की ट्रेनिंग दी जा रही है। खेल प्रशासन और कॉलेजों की तैयारी है कि कम से कम 10-12 खिलाड़ियों को अंतिम रूप से तैयार किया जाए। इन्हें जापान में 19 सितंबर से चार अक्तूबर के बीच होने जा रहे एशियाड में भेजने के लिए लगातार अभ्यास कराया जा रहा है।
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि मार्शल आर्ट्स फिटनेस के साथ लोगों में सेल्फ डिफेंस की भी खूबी बढ़ा रहा है। इसके पीछे मुख्य वजह है काशी की कुश्ती और अखाड़ा वाली परंपरा। जो इस परंपरा को जी रहा या देख रहा तो उसकी रुचि इसमें बढ़ रही है। इस गेम में मुक्केबाजी, कुश्ती, कराटे और जिउ-जित्सु के भी कुछ-कुछ अंश हैं।
एक कॉलेज में 42 विद्यार्थी सीख रहे मार्शल आर्ट्स
काशी के विकास इंटर कॉलेज में 42 छात्र-छात्राओं को निशुल्क मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दी जा रही है। कोच गोपाल का कहना है कि 2026 एशियाई खेलों में एमएमए को शामिल किए जाने से खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ गया है। काशी के स्कूलों और कॉलेजों में आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र, योग्य कोच और नियमित प्रतियोगिताओं की व्यवस्था की जाए तो यहां के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
विज्ञापन
शहर के डीएनए में है पहलवानी
जिला ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष डॉ. एके सिंह ने बताया कि काशी कुश्ती और पारंपरिक अखाड़ों वाला नगर रहा है। पहलवानी इस शहर के डीएनए में है। यही वजह है कि इस गेम को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। इस विरासत को आधुनिक ट्रेनिंग से जोड़ा जाए तो नए खिलाड़ियों के साथ ही देश को भी इसका फायदा देखने को मिलेगा।
विज्ञापन
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि मार्शल आर्ट्स फिटनेस के साथ लोगों में सेल्फ डिफेंस की भी खूबी बढ़ा रहा है। इसके पीछे मुख्य वजह है काशी की कुश्ती और अखाड़ा वाली परंपरा। जो इस परंपरा को जी रहा या देख रहा तो उसकी रुचि इसमें बढ़ रही है। इस गेम में मुक्केबाजी, कुश्ती, कराटे और जिउ-जित्सु के भी कुछ-कुछ अंश हैं।
विज्ञापन
एक कॉलेज में 42 विद्यार्थी सीख रहे मार्शल आर्ट्स
काशी के विकास इंटर कॉलेज में 42 छात्र-छात्राओं को निशुल्क मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दी जा रही है। कोच गोपाल का कहना है कि 2026 एशियाई खेलों में एमएमए को शामिल किए जाने से खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ गया है। काशी के स्कूलों और कॉलेजों में आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र, योग्य कोच और नियमित प्रतियोगिताओं की व्यवस्था की जाए तो यहां के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
विज्ञापन
शहर के डीएनए में है पहलवानी
जिला ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष डॉ. एके सिंह ने बताया कि काशी कुश्ती और पारंपरिक अखाड़ों वाला नगर रहा है। पहलवानी इस शहर के डीएनए में है। यही वजह है कि इस गेम को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। इस विरासत को आधुनिक ट्रेनिंग से जोड़ा जाए तो नए खिलाड़ियों के साथ ही देश को भी इसका फायदा देखने को मिलेगा।