फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Mirzapur soldier was martyred at the age of twenty

20 साल की उम्र में ही शहीद हो गया था मिर्जापुर का लाल, परिवार का आज यह हाल      

Thu, 26 Jul 2018 12:39 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर Updated Thu, 26 Jul 2018 12:39 PM IST
विज्ञापन
Mirzapur soldier was martyred at the age of twenty
राकेश की तस्वीर दिखाती उसकी भाभी - फोटो : अमर उजाला
यूपी के मिर्जापुर में बिरोही निवासी राकेश सिंह कारगिल युद्ध के एक साल बाद दुश्मनों की गोली से शहीद हो गए थे। उस दौरान केंद्र सरकार ने पेट्रोल पंप और प्रदेश सरकार ने पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद उनके परिवार को देने की घोषणा की गई थी लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
विज्ञापन


लद्दाख में तैनाती के दौरान 23 नवंबर 2000 को राजपूत रेजीमेंट के जवान राकेश सिंह दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। उस वक्त उनकी उम्र महज 20 साल थी। वह अविवाहित थे। शहीद होने के दो साल पहले वह सेना में भर्ती हुए थे। राकेश के शहीद होने के बाद केंद्र सरकार ने दस लाख रुपये की आर्थिक मदद की।
विज्ञापन


मिर्जापुर की तत्कालीन सांसद फूलन देवी के प्रयास से पेट्रोल पंप की फाइल लखनऊ से लेकर दिल्ली तक दौड़ती रही लेकिन पेट्रोल पंप नहीं मिला। राकेश सिंह के भाई ओंकेश सिंह बताते हैँ कि प्रदेश सरकार ने पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद का आश्वासन दिया था लेकिन कोई मदद नहीं मिली। फूलन देवी अक्सर उनके घर आती थीं। अगर उनकी मौत न हुई होती तो शायद पेट्रोल पंप मिल गया होता।
विज्ञापन
विज्ञापन


राकेश से बड़े भाई राजेश और छोटे भाई ओंकेश बेरोजगार हैं और घर पर खेती करते हैं। खेती के भरोसे ही पूरा परिवार है। राकेश सिंह के शहीद होने बाद 2010 में छह महीने के अंतराल पर पिता राज बहादुर और माता कृष्णावती का देहांत हो गया।

ओंकेश एक निजी कंपनी में नौकरी करते थे लेकिन परिवार की हालत देख उन्हें नौकरी छोड़कर घर लौटना पड़ा। राकेश सिंह के शहीद होने के बाद तत्कालीन जिला प्रशासन और जन प्रतिनिधियों ने गांव में शहीद राकेश सिंह के नाम से गेट बनाया था लेकिन उसका उद्घाटन आज तक नहीं हुआ। ओंकेश सिंह ने बताया कि कई बार उद्घाटन की तारीख पड़ी लेकिन हर बार वह टलती गई।


शहीद राकेश सिंह की बीमार मां कृष्णावती को देखने भाजपा नेता वरुण गांधी 2010 में उनके घर गए थे। उन्होंने कृष्णावती के इलाज के लिए एक लाख रुपये की मदद का वादा किया था लेकिन उसमें से बीस हजार रुपये ही मिले।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed