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नहीं मिली एंबुलेंस, बीमार बहन को कंधे पर लेकर दौड़ता रहा भाई, मौत
ब्यूरो,अमर उजाला,मिर्जापुर
Updated Wed, 28 Jun 2017 10:47 PM IST
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महिला ने भाई के कंधे पर तोड़ा दम
- फोटो : अमर उजाला
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सूबे में सरकार बदल गई लेकिन हालात बदलने का नाम ही नहीं ले रहे। जहां कुछ दिन पहले सीएम योगी ने प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के लिए हाईटेक एंबुलेंस शुरू की है, वहीं यह घटना व्यवस्थाओं को असली चेहरा दिखा रही है।
यह घटना है केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के संसदीय क्षेत्र की। यहां एंबुलेंस के अभाव में एक बीमार बहन ने भाई के कंधे पर प्राण त्याग दिए।
सीएचसी मड़िहान से जिला चिकित्सालय रेफर की गई महिला को बुधवार को एंबुलेंस नहीं मिली। उसने दूसरे वाहन की तलाश में दौड़ रहे भाई के कंधे पर ही दम तोड़ दिया।
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तहसील क्षेत्र के ददरा पहाड़ी की सावित्री (22) पत्नी शिवकुमार मायके जुड़िया गांव में रह रही थी। आठ माह पूर्व सरकारी अस्पताल में उसने बच्चे को जन्म दिया था। उसी समय से वह बीमार रहने लगी थी।
धीरे-धीरे उसकी तबीयत अधिक खराब होने पर बुधवार की सुबह घर वाले उसे गांव के ही एक डॉक्टर के पास ले गए। वहां उसने सूई लगाई तो कुछ देर बाद सावित्री बेहोश हो गई। इसके बाद उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।
वहां डॉक्टर कौशल कुमार ने हालत गंभीर देख उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। महिला को ले जाने के लिए घर वालों ने 108 नंबर पर फोन कर एंबुलेंस बुलाई तो एंबुलेंस कर्मी ने दो घंटे बाद आने के लिए कहा।
इस दौरान महिला की हालत बिगड़ती चली गई। प्राइवेट वाहन की व्यवस्था करने में परिवार की असमर्थता के चलते भाई सावित्री को कंधे पर उठा कर सड़क पर ले जाने लगा। सावित्री ने उसके कंधे पर ही दम तोड़ दिया।
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यह घटना है केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के संसदीय क्षेत्र की। यहां एंबुलेंस के अभाव में एक बीमार बहन ने भाई के कंधे पर प्राण त्याग दिए।
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सीएचसी मड़िहान से जिला चिकित्सालय रेफर की गई महिला को बुधवार को एंबुलेंस नहीं मिली। उसने दूसरे वाहन की तलाश में दौड़ रहे भाई के कंधे पर ही दम तोड़ दिया।
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तहसील क्षेत्र के ददरा पहाड़ी की सावित्री (22) पत्नी शिवकुमार मायके जुड़िया गांव में रह रही थी। आठ माह पूर्व सरकारी अस्पताल में उसने बच्चे को जन्म दिया था। उसी समय से वह बीमार रहने लगी थी।
धीरे-धीरे उसकी तबीयत अधिक खराब होने पर बुधवार की सुबह घर वाले उसे गांव के ही एक डॉक्टर के पास ले गए। वहां उसने सूई लगाई तो कुछ देर बाद सावित्री बेहोश हो गई। इसके बाद उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।
वहां डॉक्टर कौशल कुमार ने हालत गंभीर देख उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। महिला को ले जाने के लिए घर वालों ने 108 नंबर पर फोन कर एंबुलेंस बुलाई तो एंबुलेंस कर्मी ने दो घंटे बाद आने के लिए कहा।
इस दौरान महिला की हालत बिगड़ती चली गई। प्राइवेट वाहन की व्यवस्था करने में परिवार की असमर्थता के चलते भाई सावित्री को कंधे पर उठा कर सड़क पर ले जाने लगा। सावित्री ने उसके कंधे पर ही दम तोड़ दिया।
मौत के बाद भी महिला को नसीब नहीं एंबुलेंस
वाहन नहीं मिलने पर कंधे पर ही शव ले गए घर
- फोटो : अमर उजाला
हद तो तब हो गई जब महिला की मौत होने के बाद भी उसके शव को ले जाने के लिए कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची। वहां लाचार भाई रोता-बिलखता रहा लेकिन अस्पताल प्रशासन मौन रहा। भाई ने अपनी बहन के शव को कंधे पर लादा और घर ले गया।
मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विधु गुप्ता ने कहा कि महिला नाजुक अवस्था में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आई थी। उसे जिला अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई गई थी लेकिन उससे पहले ही उसने दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य केंद्र पर शव वाहन नहीं है। परिवार वाले उसे कैसे ले गए, इस बारे में कोई जानकारी नहीं।
मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विधु गुप्ता ने कहा कि महिला नाजुक अवस्था में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आई थी। उसे जिला अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई गई थी लेकिन उससे पहले ही उसने दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य केंद्र पर शव वाहन नहीं है। परिवार वाले उसे कैसे ले गए, इस बारे में कोई जानकारी नहीं।