UP: वाराणसी के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान, पिंडरा के करखियांव की झील को 10 करोड़ से किया जाएगा विकसित
Varanasi News: कमिश्नरी सभागार में बैठक के दौरान पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटन विकास परियोजनाओं में स्थानीय सांस्कृतिक पहचान और विरासत को संरक्षित रखते हुए पर्यटकों को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराया जाए।
विस्तार
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बृहस्पतिवार की सुबह कमिश्नरी सभागार में बैठक की। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 109.20 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 36 पर्यटन परियोजनाओं की समीक्षा की। पिंडरा क्षेत्र स्थित करखियांव गांव की झील को लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से इको टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किए जाने का प्रस्ताव दिया गया।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटन विकास परियोजनाओं में स्थानीय सांस्कृतिक पहचान और विरासत को संरक्षित रखते हुए पर्यटकों को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि एक करोड़ रुपये तक की सभी स्वीकृत निर्माणाधीन परियोजनाओं को नवंबर तक हर हाल में पूरा किया जाए।
सभी विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजनाओं को गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में संस्कृति विभाग की महत्वपूर्ण प्रस्तावित परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। इनमें वाराणसी उत्तर विधानसभा क्षेत्र स्थित बत्तीस खंभा, बकरियाकुंड, गुरुधाम मंदिर और अजगरा स्थित पंचो शिवाला के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार का प्रस्ताव शामिल है।
पर्यटन विभाग की 36 प्रस्तावित परियोजनाओं में वाराणसी की 22, जौनपुर की छह, गाजीपुर की पांच और चंदौली की तीन परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों के सुंदरीकरण, आधारभूत पर्यटन सुविधाओं के विकास और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा गया है। बैठक में अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमित अभिजात भी मौजूद रहे।
घाट, ऑडिटोरियम और मंदिर विकास की परियोजनाएं बनेंगी आकर्षण का केंद्र
कैंट विधानसभा क्षेत्र स्थित सती माई मंदिर, प्राचीन रामबाग मंदिर, रोहनिया का प्राचीन शिवधाम मंदिर, पिंडरा स्थित पौहारी बाबा मंदिर, निर्माण दास बाबा कुटी और भगवान राम-जानकी महावीर मंदिर का विकास शामिल है। इसके अलावा शिवपुर स्थित सराय मोहनाघाट पर लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से स्थायी घाट निर्माण, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में लगभग 17 करोड़ रुपये की लागत से एक हजार क्षमता वाले ऑडिटोरियम का निर्माण और परंपरा केंद्र के विकास जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। वाराणसी के प्रमुख व ऐतिहासिक स्थलों पर साइनेज स्थापित किए जाने का प्रस्ताव भी शामिल है।
निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान गाजीपुर स्थित शहीद वीर अब्दुल हमीद स्मारक के विकास एवं सौंदर्यीकरण, रोहनिया में लगभग 24.63 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित संत रविदास संग्रहालय और लगभग 5.21 करोड़ रुपये की लागत वाले मुंशी प्रेमचंद स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। मुंशी प्रेमचंद संग्रहालय परियोजना वर्तमान में टेंडर प्रक्रिया में है। धर्मार्थ कार्य विभाग की ओर से जौनपुर स्थित बड़े हनुमान मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं विकास, वाराणसी स्थित भिंगराज अनाथालय परिसर में लगभग 24.04 करोड़ रुपये की लागत से अनाथालय निर्माण और दंडी सेवाश्रम परिसर में लगभग 23.41 करोड़ रुपये की लागत से ''सेवाश्रम'' के विकास से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। इन परियोजनाओं के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक सरोकारों को पर्यटन विकास से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।