यादों में मिल्खा सिंहः उड़न सिख की वाराणसी आने की रह गई इच्छा अधूरी, सम्मान में रखा जाएगा स्टेडियम का नाम
दुनिया के बड़े-बड़े एथलीटों को धूल चटाने वाले उड़न सिख मिल्खा सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी वाराणसी आने की इच्छा अधूरी रह गई। 2012 में एक कार्यक्रम में उन्हें आना था लेकिन ऐन वक्त पर उनकी पत्नी की तबीयत खराब हो गई तो उन्होंने आने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया।
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भारत के महान फर्राटा धावक उड़न सिख मिल्खा सिंह पंचतत्व में विलीन हो गए। उनकी वाराणसी आने की इच्छा अधूरी रह गई। वह 2012 में सनबीम सनसिटी में आने वाले थे, लेकिन पत्नी की अस्वस्थता के कारण वह नहीं आ सके। सनबीम समूह के दीपक मधोक ने बताया कि 2012 में सनबीम सनसिटी के उद्घाटन पर हमने उड़न सिख मिल्खा सिंह को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया था।
इस दौरान हमने सनसिटी के स्टेडियम का नाम उनके नाम पर करने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने आने पर अपनी सहमति जताई थी। ऐन वक्त पर उनकी पत्नी की तबीयत खराब हो गई तो उन्होंने आने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया। जब उनसे बात हुई तो हमने स्टेडियम का नाम उनके नाम पर रखने की बात कही, तो उन्होंने कहा कि नहीं जब हम बनारस आएंगे तभी करिएगा।
उन्होंने आश्वासन दिया था कि जल्द ही वह बनारस आएंगे और स्कूल के बच्चों से मिलेंगे। तब आप अपने स्टेडियम का नाम हमारे नाम पर रखिएगा। दीपक मधोक ने बताया कि उनकी स्मृति में हम अपने संस्थान के तीनों स्टेडियम में से एक स्टेडियम का नाम जरूर रखेंगे।
कोरोना संक्रमण काल बीतने के बाद इस पर विचार किया जाएगा। हमारी तरफ से उनको यही श्रद्धांजलि होगी। गौरतलब है कि मिल्खा सिंह का लगभग एक महीने तक कोरोना संक्रमण से जूझने के बाद चंडीगढ के पीजीआईएमईआर में निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे। इससे एक सप्ताह पहले उनकी पत्नी और भारतीय वॉलीबॉल टीम की पूर्व कप्तान निर्मल कौर का भी निधन हो गया था।
बीएचयू में मिल्खा सिंह को दी गई श्रद्धांजलि
आईएमएस निदेशक प्रो. बी आर मित्तल ने कहा कि मिल्खा सिंह को खेल प्रेमियों के साथ ही देश के लिए अपूरणीय क्षति बताया। कार्यक्रम में प्रो. विजयनाथ मिश्रा, प्रो. आरएन चौरसिया, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.अभिषेक पाठक, व अन्य खेल प्रेमी मौजूद रहे।