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Varanasi News: मेघा भगत ने काशी से देश को दिया रामलीला का अनुष्ठान

Thu, 21 Sep 2023 12:11 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 21 Sep 2023 12:11 PM IST
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Megha Bhagat gave the ritual of Ramlila to the country from Kashi
कण-कण शंकर की नगरी काशी ने ही देश को रामलीला का अनुष्ठान दिया। काशी ने आज भी 480 साल से ज्यादा पुरानी परंपरा को अपने आंगन में सहेज रखा है। मेघा भगत ने 480 साल पहले चित्रकूट की रामलीला की शुरुआत की, जो रामचरित मानस से भी अधिक प्राचीन है।
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नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने बताया कि बनारस की रामलीला तुलसीदास के रामचरित मानस लिखे जाने से पहले से होती आ रही है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने 1908 के फैसले में लिखा है कि चित्रकूट रामलीला के संचालक मेघा भगत सन 1543 में विद्यमान थे और मानस की रचना 1576 में पूरी हुई है। मेघा भगत की रामलीला वाल्मीकि नारायण और हनुमन नाटक से प्रेरित थी। उनकी लीलाएं वैष्णव मंदिर की झांकियों से प्रेरित थीं। रामलीला का मंचन ही है, जहां राम व कृष्ण और राम व शिव एकाकार हो जाते हैं। राम आते हैं तो हर-हर महादेव का उद्घोष होता है। साल भर राधे-राधे कहने वाले वैष्णवजन महीने भर के लिए रामजी को ठाकुरजी मान लेते हैं। भले ही सबसे अधिक प्राचीन रामलीला का गौरव चित्रकूट और लाटभैरव की रामलीला को जाता है लेकिन रामनगर की लीला का सम्मोहन व आकर्षण कहीं और नजर नहीं आता है। मेघा भगत की लीला जहां झांकी प्रधान थी वहीं तुलसी की रामलीला संगीतमय स्वरूप होती है।
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आठ किलोमीटर में फैला हुआ रामलीला का रंगमंच
व्योमेश शुक्ला का कहना है कि बनारस की रामलीला रंगकर्मियों के लिए अभिभावक और गुरु की भूमिका निभाती है। उसे ध्यान से देखने और समझने की जरूरत है। रामलीला जीवन का सबसे नैसर्गिक अभिनय है। रंगमंच इस बात की कल्पना भी मुश्किल से कर सकेगा कि एक रंगमंच ऐसा भी है जो कई किलोमीटर में फैला हुआ है। राम का जन्म कहीं और हो रहा है। सीता जी की मिथिला कहीं और है। राम वन में जाते हैं तो वह एक तीसरा मोहल्ला है। राम रावण के बीच की लड़ाई चौथी जगह पर होती है। जहां-जहां पात्र जाते हैं वहां-वहां दर्शक भक्ति भाव से उनका पीछा करते हुए पहुंच जाते हैं। रामनगर की रामलीला में जब मानस की पंक्तियां गाई जा रही होती हैं तब हजारों की संख्या में नेमी दर्शक मानस की अपनी प्रतियां खोलकर उस गायन को मूल पाठ से मिलाते रहते हैं। ऐसा विद्वान दर्शक दुनिया के किसी भी कोने में मिलना असंभव है। दर्शकों की भागीदारी वाला थियेटर भी कहीं और नहीं है। रामनगर का मंच विशाल है जो लगभग 20 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
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रामलीला में मिलती हैं तीन अलग शैलियां
पातालपुरी मठ के महंत बालक दास का कहना है कि रामलीला में तीन प्रमुख शैलियां मिलती हैं। झांकी लीला, तुलसी लीला और घटित लीला। झांकी लीला वैष्णव पद्धति की लीला है। तुलसी लीला गोस्वामी तुलसीदास द्वारा आरंभ की गई। घटित लीला का स्वरूप रामनगर में देखा जा सकता है। रामलीला के अनुष्ठान का आरंभ संकल्प और मुकुट पूजन से होता है।

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चित्रकूट में मिली रामलीला की प्रेरणा
महंत बालक दास बताते हैं कि रामलीला के जनक मेघा भगत को लीला की प्रेरणा चित्रकूट में मिली थी। मंदाकिनी तट पर दो बालक धनुष-बाण लेकर पहुंचे। वे घाट पर धनुष-बाण रखकर गए लेकिन लौटे नहीं। वहीं आकाशवाणी हुई, ‘जाओ, काशी में रामलीला करो। भरतमिलाप लीला के दिन भगवान स्वयं लीला प्रभु राम के रूप में अवतरित होंगे और वहां तुम्हें भगवान के साक्षात दर्शन होंगे।’ मेघाभगत ने काशी में चित्रकूट रामलीला प्रारंभ की। वे ही रामलीला के प्रवर्तक थे।
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