फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Medical science of Mauni Amavasya dip: On this day, Ganga water contains maximum number of bacteria, instead of infection, immunity boosters are formed.

मौनी अमावस्या की डुबकी का मेडिकल साइंस : इस दिन गंगाजल में सबसे ज्यादा जीवाणु, संक्रमण के बजाय बनते हैं इम्यूनिटी बूस्टर

Wed, 29 Jan 2025 12:59 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jan 2025 12:59 AM IST
विज्ञापन
Medical science of Mauni Amavasya dip: On this day, Ganga water contains maximum number of bacteria, instead of infection, immunity boosters are formed.
बीएचयू समेत देश भर के 31 वैज्ञानिकों ने की प्रयागराज में गंगाजल के 760 नमूनों की जांच
विज्ञापन

2013 और 2019 के कुंभ में 6 शाही स्नान पर सात स्नान घाटों से लिए गए ये सैंपल
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। महाकुंभ में मौनी अमावस्या का स्नान, पौराणिक ही नहीं बल्कि मेडिकल साइंस की नजर में भी बहुत बड़ा महत्व रखता है। इस दिन गंगा की एक डुबकी कुछ देर की ही ताजगी देगी, लेकिन जीवन भर काम आने वाली इम्यूनिटी से भर देगी। खतरनाक जीवाणुओं से लड़ने की प्रतिरोधक शक्ति अपने अंदर होगी। बीएचयू, मोती लाल नेहरू प्रयागराज और केजीएमयू लखनऊ समेत देश भर के 31 वैज्ञानिकों की टीम ने 2013 के महाकुंभ और 2019 के कुंभ में 6 शाही स्नान के दिन सात स्नान घाट से गंगाजल के 760 नमूने लिए। पानी की जांच करने पर पता चला कि इस दिन नदी में सबसे ज्यादा माइक्रोबियल लोड है। यानी कि पानी में सूक्ष्म जीवियों की संख्या बढ़ी हुई थी। दुनिया भर से आए भांति-भांति के लोगों से निकले जीवाणु गंगाजल में घुले मिले थे, लेकिन इनसे संक्रमण की बजाय रोग से लड़ने की शक्ति मिलती दिखी। इस रिसर्च के अनुसार, पानी के बहाव और फैलाव की वजह से जीवाणुओं का लेयर पतला या गैर सक्रिय हो जाता है। ऐसे में यहां नहाने वालों को संक्रमित करने के बजाय उनकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करते हैं। क्योंकि शरीर में इन जीवाणुओं का असर काफी हल्का होता है जो कि वैक्सीन की मैकेनिज्म की तरह से काम करने लगते हैं। ऐसे में मौनी अमावस्या पर गंगाजल नेचुरल वैक्सीन की तरह काम करता है।
शोध का संयोजन करने वाले बीएचयू के पूर्व रिसर्चर डॉ. वाचस्पति त्रिपाठी ने कहा कि कुंभ में शाही स्नान से पहले और बाद में गंगा के पांच स्पॉट से पानी के 760 नमूने लिए गए। ये पानी कुंभ के पूर्व, मकर संक्रांति, पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के शाही स्नान के दौरान इकट्ठा किए गए। सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में इस पानी का माइक्रोबियल लोड का पता लगाया गया। साथ ही उनकी फिजिकल-केमिकल स्टडी की गई। डॉ. राणा गोपाल इस रिसर्च के प्रिंसिपल ऑफ इंवेस्टिगेशन है।
विज्ञापन

श्रद्धालुओं को नहीं हुए कोई रोग
डॉ. वाचस्पति त्रिपाठी के अनुसार, महाकुंभ में आए 1000 लोगों की 2019 के कुंभ में जांच की गई तो पता चला कि उन्हें कोई बीमारी ही नहीं हुई। उनके खून का सैंपल लेकर जांच की गई। साथ ही उन्हें बीते छह साल में किस तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ा, इसकी भी जानकारी ली गई। श्रद्धालुओं और कल्पवासियों ने कहा कि इस बीच उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई। कहा कि शोध 14 साल से जारी है। बीते मेले में जो सैंपल लिए गए थे और जिन लोगों ने स्नान किया था उनका फिर से सैंपल लेकर जांच की जा रही है। आगे भी शोध जारी रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article