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फिरोज खान के समर्थन में आईं मायावती और प्रियंका वाड्रा, शासन पर लगाया ढुलमुल रवैया अपनाने का आरोप 

Thu, 21 Nov 2019 11:24 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Thu, 21 Nov 2019 11:24 AM IST
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Mayawati and Priyanka came in support of Feroze Khan, accusing the government
मायावती का ट्वीट - फोटो : a

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ फिरोज खान की नियुक्ति और इसके विरोध का प्रकरण अब और विवादित होता नजर आ रहा है। छात्र गुट और राजनीतिक दल दो धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं। भाजपा के पूर्व सांसद और अभिनेता परेश रावल से से लेकर मायावती और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा ने भी ट्वीट कर फिरोज खान का समर्थन किया है और शासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। 

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बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट किया- "बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत अध्यापक के रूप में पीचयडी स्कालर फिरोज की नियुक्ति को लेकर शासन और प्रशासन का ढुलमुल रवैया ही मामले को तूल दे रहा है कुछ लोगों के शिक्षा को धर्म और जाति की राजनीति से जोड़ने के कारण उपजे इस विवाद को बिल्कुल भी उचित नहीं ठहराया जा सकता है।"
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दो मिनट बाद ही एक दूसरे ट्वीट में कहा-"बीएचयू प्रशासन द्वारा एक अति योग्य मुस्लिम को शिक्षक के रूप में नियुक्त करना योग्यता को उचित मुकाम देना ही माना जाएगा। इसके विरोध में मनोबल गिराने वाला कोई भी काम किसी को भी करने की इजाजत बिल्कुल भी नहीं देनी चाहिए। सरकार इस तुरंत समुचित ध्यान दे तो बेहतर होगा।"
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कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा ने ट्वीट किया- "हमारी भाषाएं और संस्कृति हमारी विशेषता हैं। संस्कृत भाषा में लिखा गया है, सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया:।
दूसरे ट्वीट में कहा— सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को इस संवैधानिक अधिकारी की रक्षा करनी चाहिए।"   

बताते चलें कि बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय(एसवीडीवी) में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर सैकड़ों छात्र सिंह द्वार पर उतर आए हैं। तो वहीं लगातार 14वें दिन से छात्र भी विरोध में धरने पर बैठे हैं। डा फिरोज के समर्थन में बीएचयू उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद भी आए हैं।

डॉ. फिरोज खान के समर्थन में जॉंइट एक्शन कमेटी के बैनर तले छात्रों ने सिंह द्वार पर जुटकर फिरोज के समर्थन में नारे भी लगाए। उनका कहना था कि शिक्षक की नियुक्ति का विरोध गलत है, इस पर विश्वविद्यालय को जल्द से जल्द फैसला लेने की मांग की गई। 


भाषा को धर्म से जोड़कर देखना गलत- प्रो. आफताब

बीएचयू प्रशासन ने जो भी किया नियुक्ति में वह सही है। यह नई बात नहीं है। बीएचयू उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद आफाकी कहते हैं कि विश्वविद्यालय का मतलब है कि चाहे वह कोई हो किसी धर्म, जाति का हो। अगर योग्य है तो नियुक्ति करना गलत नहीं है। अगर चयन समिति ने डॉ. फिरोज खान की योग्यता के अनुसार उनका फैसला लिया है तो इसका विरोध नहीं होना चाहिए।



विभिन्न विश्वविद्यालय में कई ऐसे छात्र हैं जो संस्कृत पढ़ रहे हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे छात्र भी है जो उर्दू पढ़ रहे हैं। बीएचयू में ही संस्कृत पढ़ने वाली एक मुस्लिम छात्रा को दीक्षांत समारोह में टॉपर होने पर सर्वाधिक मेडल मिल चुका है। क्या ऐसे लोग संस्कृत नहीं पढ़ सकते हैं।  

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