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मौनी अमावस्या पर मौन रहकर स्नान से मिलेगा शुभफल, 11 फरवरी को मनाया जाएगा महापर्व 

Fri, 05 Feb 2021 02:41 PM IST
हरि User न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: हरि User Updated Fri, 05 Feb 2021 02:41 PM IST
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Mauni Amavasya 2021 date auspicious results will be given by bathing silently on Mauni Amavasya
मौनी अमावस्या - फोटो : अमर उजाला

मौनी अमावस्या पर मौन रहकर मां गंगा में स्नान करने वालों को शुभ फल प्राप्त होंगे। अमावस्या तिथि में गंगा स्नान, दान और श्राद्ध के साथ पीपल के पेड़ की पूजा करने का विशेष महत्व है। चंद्रमा व सूर्य के मकर राशि में एक साथ होने से मौनी अमावस्या का संयोग बनता है।

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मौनी अमावस्या का महापर्व 11 फरवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि अमावस्या तिथि बुधवार 10 फरवरी को रात 1:09 बजे लगेगी और बृहस्पतिपवार 11 फरवरी को रात 12:36 बजे तक रहेगी। बृहस्पतिवार को पूरे दिन अमावस्या का मान रहेगा। पितरों की शांति के लिए श्राद्ध भी किए जाएंगे। इस दिन मौन रहकर स्नान करने की धार्मिक मान्यता है। इस दिन शुभ संयोग में गंगा स्नान के बाद दान पुण्य का फल मिलता है।
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मौनी अमावस्या के आवश्यक नियम 

  • प्रातः या संध्या के समय स्नान के पहले संकल्प लें।
  • स्नान से पहले जल को अपने हाथ से स्पर्श करके माथे पर लगाकर प्रणाम करें।
  •  जल में काले तिल डालकर भगवान सूर्यनारायण को अर्घ्य दें।
  • इसके बाद मौन रहकर ही मंत्र जाप करें।
  • अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न. वस्त्र आदि अन्य वस्तुओं का दान करें।
  • यदि आप मौन व्रत नहीं कर रहे हों तो इस बात का खास ध्यान रखें कि किसी के लिए भूलकर किसी के लिए अपशब्द न निकालें।
ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि मौनी अमावस्या पर पीपल के वृक्ष के समक्ष भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के साथ परिक्रमा से आरोग्य व सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर दान मेरू समान फल देने वाला होता है। पितरों के निमित्त कांसे के खाली बर्तन में दूध, जल, काले तिल, काले वस्त्र, स्वर्ण और गेहूं आदि का दान करना लाभकारी माना गया है। शनि, राहु एवं केतु ग्रह की शांति के लिए काले तिल, तिल का तेल, सरसों का तेल एवं काले रंग की वस्तुओं का दान करना विशेष फलदायी है।

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