Masane ki Holi: वाराणसी में संवेदनशील इलाके में मंडराए ड्रोन, पुलिस की मौजूदगी के बीच सुरक्षा मानकों की अनदेखी
गंगा घाटों के अलावा विश्वनाथ धाम के साथ ही उसके आसपास के दायरे में प्रशासनिक अनुमति के बगैर ड्रोन कैमरे के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म की होली शुरू हुई तो कई ड्रोन कैमरे ऊपरी हिस्से में मंडराते दिखे।
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वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म की होली के दौरान पुलिस की मौजूदगी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। अति संवेदनशील श्री काशी विश्वनाथ धाम के आसपास ही ड्रोन कैमरे मंडराते रहे। हुजूम के बीच पुलिस यह पता लगाने में असफल रही कि ड्रोन कैमरे किसके हैं। यह स्थिति तब है, जब हाल ही में बाबतपुर एयरपोर्ट की निदेशक को चिट्ठी भेज कर ड्रोन हमले की धमकी दी गई थी।
गंगा घाटों के अलावा विश्वनाथ धाम के साथ ही उसके आसपास के दायरे में प्रशासनिक अनुमति के बगैर ड्रोन कैमरे के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म की होली शुरू हुई तो कई ड्रोन कैमरे ऊपरी हिस्से में मंडराते दिखे। इस पर कई लोगों ने आपत्ति जताई, लेकिन पुलिस और आयोजक मूकदर्शक बने रहे।
लोगों का कहना था कि विश्वनाथ धाम का द्वार मणिकर्णिका घाट से सटा है। इसके बावजूद लापरवाही बरती गई। एसीपी दशाश्वमेध अवधेश कुमार पांडेय ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। चौक थाना प्रभारी से रिपोर्ट मांगी गई है। कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।
तस्वीरों में देखें: काशी में धधकती चिताओं के बीच भस्म से खेली गई होली, महाश्मशान मणिकर्णिका पर उमड़ा जनसैलाब
नशे में धुत युवक पर बरसीं लाठियां
चिता भस्म की होली के दौरान मणिकर्णिका घाट पर नशे में धुत होकर महिलाओं से बदसलूकी के एक आरोपी पर पुलिस की लाठियां बरसीं। उसे दौड़ाकर पीटा गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी धक्का-मुक्की कर रहा था। एक व्यक्ति का डमरू लेकर भागने लगा था। स्थिति अनियंत्रित होते देख कर घाट पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने बल प्रयोग किया। बाद में युवक के दोस्तों ने माफी मांगी और त्योहार का हवाला दिया। इसके बाद पुलिस ने हिदायत देते हुए उसे घर भेजवाया।
धधकती चिताओं के बीच चिता भस्म से होली
जन्म और मृत्यु की मंगलकामना से शिवभक्तों ने महाश्मशान पर चिता भस्म की होली खेली। श्रद्धालु डमरुओं की निनाद और हर-हर महादेव के जयकारे, पान और ठंडई के साथ एक-दूसरे को मणिकर्णिका घाट की भस्म लगा रहे थे। आसमान में कुछ देर तक भस्म व गुलाल की चादर सी छा गई, इसके साथ ही काशी में होली का जश्न शुरू हो गया।
रंगभरी पर बाबा विश्वनाथ को गुलाल अर्पित कर भक्तों ने होली खेलने की अनुमति ली और दूसरे दिन महाश्मशान में चिता भस्म की होली खेलने पहुंच गए। धधकती चिताओं के बीच शिवगणों का रूप धारण कर भक्तों ने भस्म और गुलाल उड़ाकर जश्न मनाया।
शनिवार को मणिकर्णिका तीर्थ और गलियां हर-हर महादेव के जयघोष से गुंजायमान होती रही। हर ओर गूंज रहे डमरू की निनाद के साथ भस्म से होली की शुरुआत हुई। घाट और गलियां लोगों से अटी पड़ी थीं। इसके पूर्व सुबह से ही बाबा मसान नाथ की विधिविधान से पूजा हुई। बाबा महाश्मशान नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष चैनु प्रसाद गुप्ता ने बाबा महाश्मशान नाथ और माता मसान काली (शिव शक्ति) की मध्याह्न आरती कर जया, विजया, मिष्ठान, व कारन का भोग लगाया। चिता भस्म व गुलाल चढ़ाने के साथ ही मसान की होली शुरू हो गई।