वाराणसी: पंचायत चुनाव ड्यूटी में कोरोना संक्रमित कई शिक्षकों ने गंवाई जान, परिवार पर दुखों का टूटा पहाड़
पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। उनके घर पर अब कमाई का कोई जरिया नहीं है।
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जिन कंधों पर देश के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी है। जो समाज को शिक्षा के माध्यम से राह दिखाते हैं। वो शिक्षक आज कोरोना काल में भी अपना फर्ज निभा रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई हो या बीता पंचायत चुनाव हर मोर्चे पर तैनात रहे। मगर इनमें से कई शिक्षक कोरोना काल में अपनी जान गंवा बैठे। पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने वाले कई शिक्षकों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जो दूसरों के बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाते हैं आज उनके बच्चों का कल अंधकार में नजर आ रहा है। इनके परिवारों के सपनों को मानों ग्रहण लग गया। बच्चे अनाथ हो गए। डबडबाई आंखों से पत्नियां अपने सुहाग के वापस नहीं आने का गम छिपाते हुए बच्चों को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि पति तो वापस नहीं आएंगे बस नौकरी मिल जाए तो बच्चों का भविष्य संवर जाए।
दस साल के बेटे के सिर से उठा पिता का साया
वाराणसी में प्राथमिक विद्यालय जोल्हा में सहायक अध्यापक पद पर रहे अनंत कुमार राय 9 अप्रैल को पंचायत चुनाव की ट्रेनिंग में गए थे। शाम को लौटे तो तबीयत खराब हो गई। पंचायत चुनाव में जान गंवाने वालों में अनंत सबसे कम उम्र के शिक्षक थे। गमगीन पत्नी निधि बताती हैं कि जब अनंत की तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो मलेरिया, टाइफाइड की जांच कराई। साथ ही कोरोना जांच के बारे में पता चला कि 10 दिन बाद रिपोर्ट आएगी। उधर, पति का ऑक्सीजन लेवल कम होता जा रहा था। निधि ने परिचित चिकित्सक से सलाह ली।
उन्होंने दोनों को चेस्ट का सिटी स्कैन कराने को कहा। रिपोर्ट आने के बाद दोनों होम आइसोलेट हो गए। 19 अप्रैल को अनंत की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बड़ी मुश्किल से होमी भाभा कैंसर अस्पताल में भर्ती कराया गया। थोड़ी हालत सुधरी, लेकिन 24 अप्रैल को अनंत की अचानक हालत बिगड़ने लगी और उनकी मृत्यु हो गई। निधि कहती हैं आखिरी वक्त में न बेटा उनसे मिल पाया न ही मैं। पति पिछले 11 महीने से विभाग की कोरोना की दवाइयों का वितरण भी कर रहे थे। बेटा सौभाग्य अभी 10 साल का है। पिता के जाने का गम उसके चेहरे पर साफ झलकता है। निधि बताती हैं अनंत ने बेटे के लिए ढेर सारे सपने देखे थे वह बिखर गए हैं।
अनंत राय की पत्नी निधि राय ने बताया कि मृतक आश्रित के तहत विभाग में आवेदन किया है। मैंने एमएससी, बीएड किया है। शिक्षक बनने के लिए टीईटी क्वालिफाई करना जरूरी है। विभाग से टीईटी क्वालिफाई करने के लिए समय मांगा है। विभाग ने आवेदन स्वीकार कर लिया है। कार्यालय से फोन भी आया था।
खराब स्वास्थ्य व्यवस्था ने ली पति की जान
सेवापुरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बिहड़ा में कार्यरत सुनील चक्रवाल ने भी पंचायत चुनाव के दौरान जान गंवा दी। पत्नी रंजना चक्रवाल के आंसू थम नहीं रहे। वह कहती हैं कि पति की मौत खराब स्वास्थ्य व्यवस्था की वजह से हुई है। सुनील 19 अप्रैल को प्राथमिक विद्यालय चित्रसेनपुर में पीठासीन अधिकारी के रूप में तैनात थे। चुनाव के दौरान वह बेहोश हो गए। जिसके बाद बूथ के बाहर उन्हें लिटाकर कर्मी मतदान कराने में जुट गए। उनकी हालत बिगड़ती रही, लेकिन मुझे सूचना नहीं दी गई।
शाम पांच बजे फोन पर बताया गया कि पति की तबीयत खराब है। आनन-फानन मतदान केंद्र पहुंची और उन्हें अस्पताल के लिए लेकर निकली, लेकिन कहीं बेड नहीं मिला। कई अधिकारियों को फोन किया, लेकिन मदद नहीं मिली। हारकर रात 10 बजे बीएचयू इमरजेंसी में उन्हें भर्ती कराया। डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखने की सलाह दी। पति के सहयोगियों एवं विभाग के कई अधिकारियों को फोन लगाया, लेकिन वेंटिलेटर नहीं मिला। रंजना कहती हैं काश मतदान केंद्र पर बेहोश होने के बाद ही सूचना दे दी गई होती तो आज पति जिंदा होते। दोनों बेटों के सिर से पिता का साया उठ गया है। मेरी जिंदगी में पंचायत चुनाव, कोरोना और खराब स्वास्थ्य सुविधा ने जो खालीपन दिया है, वो कभी भर नहीं सकता।
सुनील की पत्नी रंजना चक्रवाल ने बताया कि मृतक आश्रित कोटे से तृतीय श्रेणी के लिए आवेदन किया था। लेकिन नियमों के अनुसार मुझे चतुर्थ श्रेणी के तहत ही नौकरी देने का प्रावधान है। बेसिक शिक्षा मंत्री के कल के निर्देश पर फिर से आवेदन की इच्छा शिक्षक संगठनों के माध्यम से उठाई है।