मन की बात: बटुकों का क्रिकेट और संस्कृत में कमेंट्री पीएम मोदी को पसंद आई, खेल मंत्रालय से की ये अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह मन की बात में वाराणसी में पिछले दिनों में हुए बटुकों के क्रिकेट और संस्कृत में हुई कमेंट्री का जिक्र किया। मन की बात में पीएम मोदी ने स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री से क्षेत्रीय भाषाओं और संस्कृति को प्रोत्साहित करने की भी अपील की।
पीएम मोदी ने भारतीय खेलों में क्षेत्रीय भाषाओं में कमेंट्री को बढ़ावा देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मैं स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री और निजी संस्थानों से इस बारे में विचार करने की अपील करता हूं। पीएम मोदी ने मन की बात के दौरान एक ऑडियो क्लिप सुनाया, जो वाराणसी में बटुकों के बीच खेले गए क्रिकेट के दौरान संस्कृत में हुई क्रिकेट कमेंट्री का था।
संत रविदास का किया स्मरण
मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत गुरु रविदास का स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने संत रविदास और वाराणसी की चर्चा करते हुए कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मैं वहां से जुड़ा हुआ हूं। कहा कि संत रविदास जी के शब्द, उनका ज्ञान हमारा पथप्रदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास इस बात को कहते थे कि जो जैसा है वैसा ही चलता रहे, ऐसा नहीं होना चाहिए।
पीएमओ ने मांगी जानकारी
प्रधानमंत्री ने आज मन की बात में जिस क्रिकेट की बात की थी उसके बारे में पीएमओ ने भी कुछ दिन पहले जानकारी मांगी थी। जल्द ही विश्व फलक पर काशी का यह अनोख संस्कृत क्रिकेट नए कलेवर में नजर आएगा। संस्कृत में फलकम, कंदुकम और त्रिदंडम की यह नई कमेंट्री दुनिया को सुनने को मिलेगी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध शास्त्रार्थ महाविद्यालय की ओर से प्रतियोगिता का आयोजन पिछले दस सालों से किया जा रहा है।
भारतीय संस्कृति और देवभाषा से जुड़ने के कारण हर साल होने वाला यह आयोजन काशी ही नहीं देश भर के संस्कृत, संस्कृति और क्रिकेट प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। केंद्र की मोदी सरकार संस्कृत और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई स्तर पर प्रयास कर रही है। बटुकों के क्रिकेट के बारे में पीएमओ कार्यालय की रूचि भी उसी प्रयास का एक हिस्सा बताया जा रहा है।
धोती-कुर्ता और त्रिपुंड लगाकर खेलते हैं खिलाड़ी
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के खेल के मैदान पर संस्कृत क्रिकेट के दौरान सभी खिलाड़ी पारंपरिक वेशभूषा धोती-कुर्ता और माथे पर त्रिपुंड लगाकर मैदान पर उतरते हैं। मैच की कमेंट्री भी संस्कृत में होती है तो अंपायर भी पारंपरिक परिधान में रुद्राक्ष की माला पहने अपना निर्णय देते हैं।