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UP: काशी में शवों को जलाने के लिए लकड़ी नहीं, बायोमास ब्रिकेट्स का होगा इस्तेमाल; फसलों के वेस्ट से होगा तैयार
Fri, 04 Apr 2025 10:01 AM IST
प्रगति चंद
जमुना दयाल, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
जमुना दयाल, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Fri, 04 Apr 2025 10:01 AM IST
सार
Varanasi Latest News: काशी में अब शवों को जलाने के लिए लकड़ी की जगह बायोमास ब्रिकेट्स का इस्तेमाल किया जाएगा। फसलों के वेस्ट से बायोमास ब्रिकेट्स बनेंगे। इससे किसानों को फायदा मिलेगा।
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बायोमास ब्रिकेट्स से तैयार की जा रही चिता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अगले सप्ताह से मणिकर्णिका घाट पर फसल के अवशेषों से तैयार किए गए बायोमास ब्रिकेट्स की मदद से शवों को जलाने की सुविधा मिलेगी। एक शव को जलाने में लगने वाले पांच से नौ मन (200 से 360 किलो) लकड़ी की जगह 180 से 200 किलो बायोमास ब्रिकेट्स में शव को जलाया जा सकेगा। इससे तीन से पांच हजार रुपये बचत के साथ पर्यावरण और किसानों को फायदा भी मिलेगा।
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पंजाब की एक कंपनी ने ऐसे तैयार किया है बायोमास ब्रिकेट्स
बायोमास ब्रिकेट्स को पंजाब की एक कंपनी ने धान, सरसों और अरहर जैसी कई फसलों के अवशेषों से तैयार किया है। इसे कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के काशी के घाटों पर प्रायोगिक तौर पर शुरू किया जाएगा। कंपनी के प्रबंध निदेशक, लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) मोनीश आहूजा ने बताया कि बायोमास ब्रिकेट्स लकड़ी का एक अच्छा विकल्प हैं।
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कम होगी पेड़ों की कटाई
ब्रिकेट्स के निर्माण में फसल के अवशेषों का प्रयोग होता है, इससे पेड़ों की कटाई कम होगी। इसके साथ ही, कार्बन उत्सर्जन में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आती है और दाह संस्कार की कुल लागत में भी लगभग 40 प्रतिशत की बचत होती है।
इन शहरों में हो रहा बायोमास ब्रिकेट्स का उपयोग
उन्होंने बताया कि पुणे के चार और औरंगाबाद के 34 श्मशान घाटों के अलावा दिल्ली, गुरुग्राम, अहमदनगर और गुवाहाटी जैसे शहरों में भी बायोमास ब्रिकेट्स का उपयोग कर शवों को जलाया जा रहा है। महाराष्ट्र, पंजाब, गोवा, असम और दिल्ली के कुछ श्मशान घाटों पर भी बायोमास ब्रिकेट्स का उपयोग किया जा रहा है।
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पर्यावरण संरक्षण में मिलेगी मदद
श्मशान घाटों पर बायोमास ब्रिकेट्स का उपयोग एक दूरदर्शी कदम है जो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। यह न केवल अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को सस्ता करेगा बल्कि पेड़ों की कटाई को कम करके और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करके पर्यावरण को संरक्षित करने में भी मदद करेगा।
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पर्यावरण संरक्षण में मिलेगी मदद
श्मशान घाटों पर बायोमास ब्रिकेट्स का उपयोग एक दूरदर्शी कदम है जो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। यह न केवल अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को सस्ता करेगा बल्कि पेड़ों की कटाई को कम करके और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करके पर्यावरण को संरक्षित करने में भी मदद करेगा।