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CM in Varanasi: पूर्वजों का संकल्प पूरा कर रहे मोदी... काशी में बोले योगी, श्रीराम मंदिर का किया शिला पूजन

Thu, 03 Apr 2025 09:26 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 03 Apr 2025 09:26 PM IST
सार

काशी में श्रीराम मंदिर के लिए सीएम योगी ने शिला पूजन किया। इस दाैरान सैकड़ों संतों-संन्यासियों की उपस्थिति रही। सीएम ने अपने गुरुओं का स्मरण कर कहा कि हमारी पीढि़यां बहुत ही भाग्यशाली हैं।

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CM in Varanasi said narendra Modi is fulfilling resolution of ancestors worship of Shri Ram temple
काशी में श्रीराम मंदिर का शिला पूजन करते सीएम और अन्य संत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

CM Yogi in Varanasi मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है, जिसने समृद्ध विरासत को अपनी आंखों के सामने देखा है। पूज्य संतों की लंबी विरासत ने जिस संकल्प के साथ पूरा जीवन जिया था, सभी ने 22 जनवरी 2024 को अयोध्या धाम में उसे मूर्त रूप लेते हुए देखा, जब काशी के सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करकमलों से 500 वर्ष बाद श्रीरामजन्मभूमि के भव्य मंदिर में रामलला विराजमान हुए।

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मुख्यमंत्री व गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कश्मीरीगंज स्थित श्रीरामजानकी मंदिर का भूमि पूजन किया। उन्होंने यहां दर्शन-पूजन भी किया और गायों को भी गुड़ खिलाया। 
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मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतृत्व, संतों व अशोक सिंहल के सानिध्य में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन तेज गति से बढ़ा। जब लोग कहते थे कि यह काम असंभव है, तब आंदोलन के केंद्रबिंदु अशोक सिंहल कहते थे कि कोई कार्य असंभव नहीं है। 

संतों को किया याद
पूज्य संत भी कहते थे कि यह हमारे जीवन का संकल्प है और हम लोग सफल होंगे। इस अभियान से मेरे पूज्य गुरुदेव, दादा गुरु, परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज, पूज्य नृत्य गोपाल दास जी महाराज, सतुआ बाबा आदि संत भी जुड़े थे।

जब मैं इन संतों से पूछता था कि महाराज क्या होगा, तो वे कहते थे कि सफलता मिलेगी। मैं कहता था कि आपकी आयु ढल रही है, कैसे सफलता मिलेगी। तो वे कहते थे कि फिर जन्म लेंगे, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर बनाकर रहेंगे। वहां एक ही संकल्प था हर हाल में राम मंदिर के माध्यम से राष्ट्र मंदिर के निर्माण को भव्य स्वरूप देना है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मां गंगा, यमुना, सरस्वती की त्रिवेणी में  सभी ने भव्य-दिव्य महाकुम्भ प्रयागराज को देखा है। 45 दिन के आयोजन में एक स्थान पर 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु सहभागी बने। यह देख दुनिया अभिभूत थी। उसके सामने अकल्पनीय, अविस्मरणीय दृश्य था। जो लोग कहते थे कि हिंदू समाज में भेदभाव है, उनकी आंखें खुली रह गईं कि एक ही संगम में सब स्नान कर रहे हैं। वहां जाति, मत, संप्रदाय का कोई भेद नहीं है। यही तो सनातन धर्म की सही पहचान है, जिस पहचान को महाकुंभ ने फिर से दे दिया। 

काशीवासियों ने देश को दिया श्रेष्ठ प्रतिनिधि
मुख्यमंत्री ने कहा कि भव्य राष्ट्रमंदिर के भव्य स्वरूप का श्रेय काशीवासियों को जाता है, क्योंकि इन्होंने ऐसा प्रतिनिधि चुनकर संसद में भेजा है। यह सारा कार्य पीएम मोदी के करकमलों से हो रहा है। काशी ने देश को ऐसा प्रतिनिधि दिया है, जो न केवल पूर्वजों के संकल्प की पूर्ति कर रहे हैं, बल्कि राष्ट्र मंदिर को भी भव्य स्वरूप देने का कार्य कर रहे हैं। 

सीएम योगी ने कहा कि इस प्राचीन राम मंदिर का इतिहास बहुत गौरवशाली है। लोग 50 साल तक की उपलब्धियों पर गर्मी दिखाते हैं, लेकिन यहां का इतिहास सात-सवा सात सौ वर्षों का है। 1398 संवत में जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी के प्रथम शिष्य अनंताचार्य जी महाराज द्वारा यहां राम मंदिर को स्थापित किया। वर्तमान में संवत 2082 चल रहा है। 

मुख्यमंत्री ने कहाकि विदेशी आक्रांताओं ने इसे छेड़ा है यानी यहां कुछ तो रहा होगा। इतिहास बताता है कि जगद्गुरु अनंताचार्य, उनके शिष्य नरहरिदास और उनके शिष्य गोस्वामी तुलसीदास ने शैशवावस्था के पांच वर्ष वेद व वेदांत के अध्ययन के लिए इसी स्थान पर व्यतीत किए थे। तुलसीदास के रामचरित मानस और सुंदरकांड का पाठ हर सनातन धर्मावलंबियों के घर हर मांगलिक कार्य में होता है। उस बीज का रोपण यहां से होता है और इसका केंद्रबिंदु प्राचीन श्रीराम मंदिर है। 

सीएम ने अपने गुरुओं का किया जिक्र
सीएम योगी ने कहा कि अनेक ज्ञानियों, तपस्वियों, त्यागियों ने इसे कर्मसाधना की भूमि के रूप में स्वीकार किया। बाबा कीनाराम, स्वामी विवेकानंद, मां आनंदमयी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, जगद्गुरु भगवताचार्य, जगद्गुरु शिवरामाचार्य, श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष रहे महंत रामचंद्र दास परमहंस जी महाराज, वर्तमान अध्यक्ष मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज, पूर्व सांसद रामविलास वेदांती आदि संतों की समृद्ध परंपरा इसी प्राचीन राम मंदिर की देन है। यहीं से इन्होंने संन्यास के जीवन की शुरुआत की। 

सीएम योगी ने इस परंपरा की 23वीं पीढ़ी के रूप में स्वामी डॉ. रामकमलाचार्य वेदांती जी महाराज का जिक्र किया। बोले कि यह विरासत के संरक्षण का अभिनव प्रयास है, जो हर सनातन धर्मावलंबियों के लिए नई प्रेरणा, प्रकाश व मार्ग है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं कहता था कि महाकुम्भ पूज्य संतों का कार्यक्रम है, वे ही इसका नेतृत्व करेंगे। इससे देवों और पितरों का आशीर्वाद खुद ही प्राप्त हो जाएगा। इससे महाकुम्भ ने सफलता भी अर्जित की।

सीएम बोले- सनातन संस्कृति एक परंपरा है
सीएम ने वासंतिक नवरात्रि व रामनवमी की बधाई दी। बोले-रामनवमी पर संकल्प होना चाहिए कि भगवान राम का यह प्राचीन मंदिर दिव्य-भव्य रूप में फिर से जगमगाकर प्राचीन गौरव की परंपरा के साथ आगे बढ़ता रहे, क्योंकि इन परंपराओं ने भारत की विरासत को बहुत कुछ दिया है। जिस पवित्र परंपरा में हर कोई विकसित हुआ, उस परंपरा का संरक्षण, समर्थन, सहयोग प्रदान करना हमारा नैतिक दायित्व व कर्तव्य है। 

सीएम ने कहा कि सतुआ बाबा की परंपरा जगदगुरु विष्णु स्वामी संप्रदायाचार्य की ही परंपरा थी, जिसमें वल्लभाचार्य जी ने दीक्षा ग्रहण कर उसे बढ़ाया। काशी की परंपरा से जो भी जुड़ा, बाबा विश्वनाथ की कृपा व मां गंगा के आशीर्वाद ने उसे महारथ हासिल कराया। काशी के कण-कण में शंकर का वास है। भगवान विश्वनाथ के प्रसाद को ग्रहण कर जन्म और जीवन को धन्य करना चाहिए। 

समारोह में जगद्गुरु स्वामी डॉ. रामकमलाचार्य वेदांती जी महाराज, स्वामी संतोषाचार्य उर्फ सतुआ बाबा, अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती, विहिप के केंद्रीय महामंत्री अशोक तिवारी, प्रदेश सरकार के मंत्री रविंद्र जायसवाल, दयाशंकर मिश्र 'दयालु', विधायक नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव, सुशील सिंह, विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, विशाल सिंह 'चंचल' आदि मौजूद रहे।

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