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विधान परिषद में उठा काशी विश्वनाथ मंदिर की मंगला आरती का मुद्दा
ब्यूरो,अमर उजाला,लखनऊ/वाराणसी।
Updated Fri, 14 Jul 2017 10:59 AM IST
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काशी विश्वनाथ मंदिर
- फोटो : amarujala
सपा के शतरुद्र प्रकाश ने गुरुवार को विधान परिषद में काशी विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती के दौरान बड़े अफसरों व उनके परिवारों के भरे रहने का मामला उठाया।
उन्होंने कहा कि 25 जुलाई 2016 को सावन के पहले सोमवार पर जिला व पुलिस प्रशासन के लोग अपने परिवार के साथ दर्शन कर रहे थे। उस दिन टिकट के बावजूद सामान्य दर्शनार्थियों को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया था।
जवाब में धर्मार्थ कार्य मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि यह घटना सपा सरकार के समय की है। उन्हें अपनी सरकार में सही जवाब आने का यकीन नहीं था, इसलिए उन्होंने अब यह प्रश्न लगाया है।
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धर्मार्थ कार्य मंत्री ने कहा कि 25 जुलाई 2016 को किसी भी सामान्य दर्शनार्थी को मंदिर में प्रवेश से वंचित नहीं किया गया था। इस पर शतरुद्र प्रकाश ने कहा कि यह प्रश्न उन्होंने तभी लगाया था लेकिन यह टलते-टलते अब लगा है।
मंत्री का जवाब सदन को गुमराह करने वाला है। इसी बीच सभापति ने प्रश्नकाल समाप्त होने की घोषणा कर दी। इस पर शतरुद्र प्रकाश ने सदन को गुमराह करने के लिए विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश कर दिया।
बाद में सभापति ने मंत्री से इस मामले को अपने स्तर से दिखवाने को कहा।शतरुद्र ने बताया कि सभापति ने मंत्री से इस मामले की जांच कराने के लिए कहा है। जांच नहीं हुई तो वह सरकार को सदन की अवमानना का नोटिस देंगे।
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उन्होंने कहा कि 25 जुलाई 2016 को सावन के पहले सोमवार पर जिला व पुलिस प्रशासन के लोग अपने परिवार के साथ दर्शन कर रहे थे। उस दिन टिकट के बावजूद सामान्य दर्शनार्थियों को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया था।
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जवाब में धर्मार्थ कार्य मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि यह घटना सपा सरकार के समय की है। उन्हें अपनी सरकार में सही जवाब आने का यकीन नहीं था, इसलिए उन्होंने अब यह प्रश्न लगाया है।
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धर्मार्थ कार्य मंत्री ने कहा कि 25 जुलाई 2016 को किसी भी सामान्य दर्शनार्थी को मंदिर में प्रवेश से वंचित नहीं किया गया था। इस पर शतरुद्र प्रकाश ने कहा कि यह प्रश्न उन्होंने तभी लगाया था लेकिन यह टलते-टलते अब लगा है।
मंत्री का जवाब सदन को गुमराह करने वाला है। इसी बीच सभापति ने प्रश्नकाल समाप्त होने की घोषणा कर दी। इस पर शतरुद्र प्रकाश ने सदन को गुमराह करने के लिए विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश कर दिया।
बाद में सभापति ने मंत्री से इस मामले को अपने स्तर से दिखवाने को कहा।शतरुद्र ने बताया कि सभापति ने मंत्री से इस मामले की जांच कराने के लिए कहा है। जांच नहीं हुई तो वह सरकार को सदन की अवमानना का नोटिस देंगे।