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मंगला आरती में नहीं चला वीआईपी का रुतबा
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 09 Aug 2016 02:27 AM IST
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बाबा विश्वनाथ
सावन सोमवार पर बाबा विश्वनाथ की मंगला आरती में पहली बार रुतबा नहीं चला। लाल, नीली बत्ती का न तो रसूख काम आया न तो वर्दी का रुआब। सहज दर्शन के निमित्त बनाए गए मंदिर प्रशासन के नियमों का हर आमो-खास को पालन करना पड़ा। यही वजह थी कि पहली बार गर्भगृह के दो द्वारों पर आम दर्शनार्थियों को जगह मिली। हालांकि दो द्वारों पर अफसरों और नेताओं के लिए आसन लगाया गया था लेकिन टिकट लेने वाले दर्शनार्थियों को जहां बेरोकटोक प्रवेश मिला, वहीं बिना बाधा के वह मंगला आरती के दर्शन भी कर सके। इसके पीछे तीन दिन पहले मुख्य सचिव दीपक सिंघल के टिकट लेकर रुद्राभिषेक कराने और आम दर्शनार्थी की तरह हाजिरी लगाने को बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
पहले जहां मंगला आरती शुरू होने से पहले प्रोटोकॉल के आधार पर वीआईपी को पुलिस घेरा बनाकर मंदिर में प्रवेश कराती थी और चारों द्वारों पर बैठाती थी, वहीं इस बार बदलाव की झलक देखने को मिली। पहले जहां वीआईपी के चक्कर में टिकट लेने वाले आम दर्शनार्थियों को आरती खत्म होने तक पुलिस सुरक्षा प्वाइंटों पर रोके रहती थी, वहीं इस बार रात दो से 2:20 बजे के बीच ही आम दर्शनार्थियों को बेरोक टोक मंदिर में प्रवेश मिल गया। साथ ही, पूर्वी और दक्षिणी द्वार आम भक्तों के लिए आरक्षित किए गए थे।
आईजी के अलावा मंत्री व अन्य प्रभावशाली लोगों को भी कुछ देर के लिए कतार में लगकर बढ़ना पड़ा। बैकुंठ महादेव में वीआईपी बैठे थे। कठघरा आरती के बाद लगा दिया गया। जबकि पहले वीआईपी को बाबा का स्पर्श कराने के बाद ही कठघरा लगाया जाता था। सहज दर्शन की व्यवस्था का असर यह रहा कि प्रमुख सचिव धर्मार्थ नवनीत सहगल ने भी टिकट कटवाकर रुद्राभिषेक कराया। बता दें कि अमर उजाला ने सावन के पहले सोमवार की मंगला आरती में ‘गर्भगृह के चारों द्वारों पर अफसरों का कब्जा’ शीर्षक से इस मामले को प्रमुखता से उठाया था।
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पहले जहां मंगला आरती शुरू होने से पहले प्रोटोकॉल के आधार पर वीआईपी को पुलिस घेरा बनाकर मंदिर में प्रवेश कराती थी और चारों द्वारों पर बैठाती थी, वहीं इस बार बदलाव की झलक देखने को मिली। पहले जहां वीआईपी के चक्कर में टिकट लेने वाले आम दर्शनार्थियों को आरती खत्म होने तक पुलिस सुरक्षा प्वाइंटों पर रोके रहती थी, वहीं इस बार रात दो से 2:20 बजे के बीच ही आम दर्शनार्थियों को बेरोक टोक मंदिर में प्रवेश मिल गया। साथ ही, पूर्वी और दक्षिणी द्वार आम भक्तों के लिए आरक्षित किए गए थे।
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आईजी के अलावा मंत्री व अन्य प्रभावशाली लोगों को भी कुछ देर के लिए कतार में लगकर बढ़ना पड़ा। बैकुंठ महादेव में वीआईपी बैठे थे। कठघरा आरती के बाद लगा दिया गया। जबकि पहले वीआईपी को बाबा का स्पर्श कराने के बाद ही कठघरा लगाया जाता था। सहज दर्शन की व्यवस्था का असर यह रहा कि प्रमुख सचिव धर्मार्थ नवनीत सहगल ने भी टिकट कटवाकर रुद्राभिषेक कराया। बता दें कि अमर उजाला ने सावन के पहले सोमवार की मंगला आरती में ‘गर्भगृह के चारों द्वारों पर अफसरों का कब्जा’ शीर्षक से इस मामले को प्रमुखता से उठाया था।
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