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उम्रकैद की सजा मिलने के बाद 32 वर्ष से था फरार, सोनभद्र से गिरफ्तार
Fri, 02 Apr 2021 09:17 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Fri, 02 Apr 2021 09:17 PM IST
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- फोटो : istock
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वाराणसी के करधना (बोधपुर) गांव में हत्या के एक मामले में अदालत से आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद 32 वर्षों से फरार चल रहे महेंद्र पटेल को बृहस्पतिवार की रात मिर्जामुराद थाने की पुलिस ने सोनभद्र के राबर्ट्सगंज से गिरफ्तार किया। शुक्रवार को महेंद्र को अदालत में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
तीन दशक से ज्यादा समय से फरार महेंद्र को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को एसपी ग्रामीण ने पांच हजार रुपये का नगद इनाम दिया है। मिर्जामुराद थाना अंतर्गत करधना (बोधपुर) गांव में वर्ष 1986 में जमीन विवाद को लेकर जगन्नाथ पटेल की तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
इस मामले में करधना (बोधपुर) निवासी महेंद्र पटेल समेत दो लोग नामजद आरोपी थे। अदालत द्वारा वर्ष 1989 में हत्या के इस मामले में महेंद्र पटेल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट का फैसला आने से पहले ही जमानत पर बाहर रह रहा महेंद्र अपनी चल और अचल संपत्ति को बेचकर चंदौली में लगभग 14 वर्षों तक रहा।
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इस दौरान उसने एक बंदूक का लाइसेंस भी अपने नाम से बनवाया। इसके बाद वर्ष 2004 में पुन: वह अपना ठिकाना बदलकर सोनभद्र जिले के राबर्ट्सगंज थाना अंतर्गत बहेरा गांव में बिजली विभाग में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने लगा।
कोर्ट के वारंट के आधार पर मिर्जामुराद थाने के एसआई अजीत प्रताप यादव और कांस्टेबल धर्मेंद्र पाल व अशरफी ने राबर्ट्सगंज में दबिश देकर महेंद्र को गिरफ्तार किया। इस संबंध में एसपी ग्रामीण अमित वर्मा ने बताया कि वर्षों से फरार सजायाफ्ता महेंद्र को गिरफ्तार कर मिर्जामुराद थाने की पुलिस ने अच्छा काम किया है। इसलिए पुलिस टीम को पुरस्कृत किया गया है।
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तीन दशक से ज्यादा समय से फरार महेंद्र को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को एसपी ग्रामीण ने पांच हजार रुपये का नगद इनाम दिया है। मिर्जामुराद थाना अंतर्गत करधना (बोधपुर) गांव में वर्ष 1986 में जमीन विवाद को लेकर जगन्नाथ पटेल की तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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इस मामले में करधना (बोधपुर) निवासी महेंद्र पटेल समेत दो लोग नामजद आरोपी थे। अदालत द्वारा वर्ष 1989 में हत्या के इस मामले में महेंद्र पटेल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट का फैसला आने से पहले ही जमानत पर बाहर रह रहा महेंद्र अपनी चल और अचल संपत्ति को बेचकर चंदौली में लगभग 14 वर्षों तक रहा।
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इस दौरान उसने एक बंदूक का लाइसेंस भी अपने नाम से बनवाया। इसके बाद वर्ष 2004 में पुन: वह अपना ठिकाना बदलकर सोनभद्र जिले के राबर्ट्सगंज थाना अंतर्गत बहेरा गांव में बिजली विभाग में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने लगा।
कोर्ट के वारंट के आधार पर मिर्जामुराद थाने के एसआई अजीत प्रताप यादव और कांस्टेबल धर्मेंद्र पाल व अशरफी ने राबर्ट्सगंज में दबिश देकर महेंद्र को गिरफ्तार किया। इस संबंध में एसपी ग्रामीण अमित वर्मा ने बताया कि वर्षों से फरार सजायाफ्ता महेंद्र को गिरफ्तार कर मिर्जामुराद थाने की पुलिस ने अच्छा काम किया है। इसलिए पुलिस टीम को पुरस्कृत किया गया है।