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संकटमोचन संगीत समारोह: गंगा रेती पे बंगला छवाय द राजा... मालिनी अवस्थी ने चैती- दादरा को दिए सुर

Wed, 08 Apr 2026 03:05 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 08 Apr 2026 03:05 PM IST
सार

Varanasi News: संकटमोचन संगीत समारोह की पहली निशा पर ‘गंगा रेती पे बंगला छवाय द मोरे राजा’ सुनाकर मालिनी अवस्थी ने पांचवीं प्रस्तुति का अंत किया। इस दौरान श्रद्धालु झूम उठे। 

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Malini Awasthi gave musical performance at Sankat Mochan Music Festival
लोक गायिका मालिनी अवस्थी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संकटमोचन संगीत समारोह की पहली निशा पर रात डेढ़ बजे से सूर्योदय तक भोजपुरी, दादरा, चैती, भजन, कथक और सितार वादन जैसे शास्त्रीय संगीत का मेल हुआ। अकरम खां ने तबला बजाया तो 70 साल के पंजाबी कलाकार को पहली बार हनुमान दरबार में सितार बजाने का मौका मिला। आधी रात करीब डेढ़ बजे लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने भोजपुरी, दादरा, चैती और भजन के संग शास्त्रीय संगीत का फ्यूजन सुनाया। 

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बीच-बीच में श्रोताओं से बातें करते हुए जब भोजपुरी चैती ''सूतल सइयां के जगावे हो रामा तोरी मीठी बोलिया'' पर सुर लगाया तो दूरदराज के श्रोताओं को उनके गांव खेड़े की याद सताने लगी। फिर राग विहाग में ‘लंका जो धाय गयो’, ‘नदिया तू धीरे बहो रे’,‘आओ पिया सूनी पड़ी है सेजिया हमार’ और ‘गंगा रेती पे बंगला छवाय दा मोरे राजा’ सुनाकर मालिनी अवस्थी ने पांचवीं प्रस्तुति का अंत किया। हारमोनियम पर पं.धर्मनाथ मिश्र और तबला पर शुभ महाराज ने संगत की।

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पद्म विभूषण पं. छन्नू लाल मिश्र के पौत्र के राहुल मिश्र ने सारंगी की साज पर तबले के साथ प्रयोग किया और बनारस घराने की तकनीक से श्रोताओं का परिचय कराया। तबले पर हाथ इतना तेज चल रहा था कि डमरू जैसी ध्वनि निकलने लगी। प्रस्तुति से पहले राहुल ने कहा कि 15 साल पहले 2011 में वह इस मंच पर दादा पं. छन्नू लाल मिश्र के साथ तबला बजाया था। तब बड़े महंत पं. वीरभद्र मिश्रा भी थे, लेकिन आज वो दोनों ही नहीं है। ये प्रस्तुत उनके लिए श्रद्धांजलि है। बनारस की चार गतें बजाकर पंडित अनोखे लाल को भी याद किया।

भोर में चार बजे संगीत नाटक अकादमी विजेता और पंजाब के 70 वर्षीय हरविंदर शर्मा ने कहा कि उनको पहली बार ये मौका मिला है। ये भी कहा कि तबले पर संगत कर रहे उस्ताद अकरम खां के साथ वह 50 साल जुगलबंदी कर रहे हैं और ये मरते दम तक चलेगा। उन्होंने राग अहीरभैरव और ललित का मिश्रण गाया और श्रोताओं को नींद से जगाकर संकट मोचन की आरती का ध्यान करा दिया। 

इस दौरान आरती शुरू हो गई तो प्रस्तुत रोक दी गई और आपाल में आरोही-अवरोही स्वरों को सितार पर सुनाने के साथ प्रस्तुति का अंत कर दिया। अंतिम प्रस्तुति लेकर कोलकाता से पहली बार आईं शिखा भट्टाचार्य ने हनुमत वंदना पर कथक किया। तोड़ा, टुकड़ा, तिहाई, फर्द संग चक्करदार परन का स्टेप किया। तुलसी दास की विनय पत्रिका की कथाओं पर भाव-भंगिमा संग नृत्य कर समारोह की पहली निशा का समापन कर दिया।

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