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देश के लिए बनाई जाए सांस्कृतिक नीति : बिरजू महाराज
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 24 Sep 2015 02:14 AM IST
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कथक सम्राट बिरजू महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत के लिए सांस्कृतिक नीतियां बनाकर बिल पास करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक कलाकारों, साहित्यकारों को उनका हक नहीं मिलेगा, तब तक देश का विकास नहीं होगा। देश को आर्थिक तौर पर मजबूत करने की जरूरत तो है ही, देश की सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त किया जाना चाहिए। बुधवार को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की 107वीं जयंती पर बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में आयोजित तीन दिवसीय ‘भारतीय शिक्षा-संस्कृति महोत्सव’ का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कलाकारों, साहित्यकारों के हक में आवाज उठाई।
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास की ओर से आयोजित महोत्सव के उद्घाटन सत्र में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि देश भर में हमें सांस्कृतिक वातावरण पैदा करना है। इसके लिए प्रधानमंत्री से सांस्कृतिक नीति बनाने की मांग की गई है। उनसे मांग की गई है कलाकारों, साहित्यकारों को जीवन जीने की बेहतर सुविधाएं दी जाएं। उन्होेंने कहा कि कलाकार, किसान और सेना देश में इन तीनों को ही उनका पूरा हक मिलना चाहिए। कलाकार जहां सांस्कृतिक चेतना देने का काम करते हैं, वहीं साहित्यकार अपनी कलम से समाज को जागृत करते हैं।
न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार ने बताया कि इस महोत्सव में संस्कृति के विभिन्न आयामों का संगम होगा। इस महोत्सव में मुंशी प्रेमचंद, दिनकर, टैगोर, विवेकानंद, मालवीय जी पर संगोष्ठी होगी। उन्होंने सांस्कृतिक भारत के निर्माण का महासंकल्प लेने का आह्वान किया। संयोजक डॉ. रतन कुमार पांडेय, सह संयोजक विक्रम आनंद, डॉ. सुभाष चंद्र राय, निशा राय, प्रो. विजय राम रतन, आनंद कुमार आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास की ओर से आयोजित महोत्सव के उद्घाटन सत्र में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि देश भर में हमें सांस्कृतिक वातावरण पैदा करना है। इसके लिए प्रधानमंत्री से सांस्कृतिक नीति बनाने की मांग की गई है। उनसे मांग की गई है कलाकारों, साहित्यकारों को जीवन जीने की बेहतर सुविधाएं दी जाएं। उन्होेंने कहा कि कलाकार, किसान और सेना देश में इन तीनों को ही उनका पूरा हक मिलना चाहिए। कलाकार जहां सांस्कृतिक चेतना देने का काम करते हैं, वहीं साहित्यकार अपनी कलम से समाज को जागृत करते हैं।
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न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार ने बताया कि इस महोत्सव में संस्कृति के विभिन्न आयामों का संगम होगा। इस महोत्सव में मुंशी प्रेमचंद, दिनकर, टैगोर, विवेकानंद, मालवीय जी पर संगोष्ठी होगी। उन्होंने सांस्कृतिक भारत के निर्माण का महासंकल्प लेने का आह्वान किया। संयोजक डॉ. रतन कुमार पांडेय, सह संयोजक विक्रम आनंद, डॉ. सुभाष चंद्र राय, निशा राय, प्रो. विजय राम रतन, आनंद कुमार आदि मौजूद रहे।
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