महारानी लक्ष्मीबाई: काशी में मना जन्मोत्सव...निकाली रैली, डॉ. शरद बोले- रील में नहीं, रियल में ढूंढे जीवन
महारानी लक्ष्मीबाई के जन्मोत्सव पर भव्य रैली का आयोजन किया गया। लड़कियों ने लक्ष्मीबाई का रूप धारण कर लोगों को जागरूक किया। उनकी जीवनी पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
विस्तार
Varanasi News: रील में नहीं रियल में जीवन ढूंढना चाहिए। भारत है तो ही विश्वनाथ, राम, कृष्ण और हम हैं। भारत को जीवित रखने के लिए त्याग की आवश्यकता होती है। समता, प्रेम, समरता की प्रतीक वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई प्रत्येक को नेतृत्व सामर्थ्य देती है। ये बातें राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख डॉ. शरद रेणु ने कहीं। अस्सी स्थित गोयनका संस्कृत विद्यालय में महारानी लक्ष्मीबाई सेवा न्यास की ओर से महारानी लक्ष्मीबाई के 190वें जन्मोत्सव का आयोजन किया गया।
उन्होंने कहा कि स्त्री के शील का प्रतिमान लक्ष्मीबाई हैं। दक्षिण की महारानी अबक्का का चरित्र, शील, निडरता, महारानी दुर्गावती के आत्मविश्वास को धारण करने के लिए हैं। हमारे देश की प्रत्येक बेटी में यह शौर्य होना चाहिए। विशिष्ट अतिथि आशा गुप्ता ने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई को ही अपनी प्रेरणा मानने का संकल्प हो। न्यास के महामंत्री अधिवक्ता राजेंद्र प्रताप पांडेय ने कहा कि रानी एक शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार। अध्यक्षता वीणा पांडे ने की।
भारतीय संस्कृति की बात
भारत की बालिकाएं राष्ट्र रक्षा के लिए तैयार : कार्यक्रम में पाणिनि, निवेदिता शिक्षा सदन, संत अतुलानंद, आदर्श शिक्षा मंदिर, सरस्वती शिशु मंदिर सहित अन्य अग्रणी शिक्षण संस्थानों ने भारतीय संस्कृति, संस्कारों एवं राष्ट्रभक्ति से ओत प्रोत मंचीय प्रस्तुति देकर अपना योगदान दिया।
इस दाैरान अतुलानंद की छात्रा महारानी लक्ष्मीबाई स्वरूप अश्वारोही रही। आदर्श शिक्षा मंदिर के प्रतिभागियों ने गणेश वंदना प्रस्तुत किया। पाणिनि संस्कृत महाविद्यालय की छात्राओं ने मंगलाचरण प्रस्तुत करने के साथ भाला, लेजियम, तलवार प्रदर्शन से सिद्ध किया कि भारत की बालिकाएं राष्ट्र रक्षा के लिए तैयार हैं।
एकल गीत गोपीराधा बालिका इंटर कॉलेज की कीर्ति ने गाया। इस अवसर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र की क्षेत्र प्रचारिका शशि बघेल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रांत के प्रांत प्रचारक रमेश, न्यासी मंत्री डॉ. रंजना श्रीवास्तव, कोषाध्यक्षदुर्गा पांण्डेय, न्यासी डॉ. मंजू द्विवेदी, आरती अग्रवाल आदि मौजूद रहीं। संयोजन अंजू सिंह, सह संयोजिका कविता मालवीय व चारुशिला ने किया। संचालन प्रियांशु ने किया।