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महाबोधि की कृतियों में रंग भरेगा जापान
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 01 Feb 2016 02:29 AM IST
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दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था से जुड़ीं सारनाथ के महाबोधि मंदिर की अनोखी कलाकृतियों की चमक जल्द वापस आएगी। लगभग आठ दशक पुरानी ये कलाकृतियां समुचित रखरखाव न हो पाने से धुंधली पड़ चुकी हैं। अब जापान के विशेषज्ञ इन कलाकृतियों में रंग भरेंगे।
पिछले दिनों जापान सरकार के निर्देशन में यहां आई विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय टीम ने कलाकृतियों का बारीकी से निरीक्षण किया। उसके फोटो और वीडियो बनाए। जापानी टीम ने कलाकृतियों को उनके पहले के स्वरूप में लाने का काम जल्द शुरू कराने के संकेत भी दिए। साथ ही, मंदिर की दीवारों में आई दरार की मरम्मत कराने का भरोसा दिलाया।
भारत और जापान के बीच संबंधों की प्रगाढ़ता का ही असर है कि मूलगंध कुटी विहार स्थित महाबोधि मंदिर के संरक्षण के लिए जापान सरकार ने कदम बढ़ाए हैं। पिछले दिसंबर महीने में पीएम मोदी के साथ जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे काशी आए थे। उसके बाद से काशी और जापान के रिश्तों में और मजबूती आई है। महाबोधि मंदिर की प्राचीन कलाकृतियों और दीवारों में आई दरार को दुरुस्त करने के लिए उठाए जा रहे इस कदम को भी उसीसे जोड़कर देखा जा रहा है।
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भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों को रखने के लिए 1931 में बनकर (1929 में शुरू हुआ था इसका निर्माण) तैयार हुए महाबोधि मंदिर की दीवारों में अब दरार आने के साथ ही उस पर उकेरी गई अनोखी चित्रकारी की रंगत भी फीकी पड़ गई है।
इनके संरक्षण के लिए महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों ने जापान सरकार से संपर्क किया था। हाल ही में जापान सरकार के निर्देशन में वहां के कलाकारों की तीन सदस्यीय टीम यहां महाबोधि मंदिर पहुंची थी। टीम ने धूमिल पड़ चुकीं मंदिर के अंदर की कलाकृतियों के अलावा दीवारों में आई दरार का निरीक्षण किया। उसकी मौजूदा स्थिति, संभावनाओं और उन्हें उनके स्वरूप में वापस लाने के विकल्पों पर मंथन किया। निरीक्षण के बाद टीम ने महाबोधि सोसाइटी के पदाधिकारियों को भरोसा दिलाया कि वह दो से तीन माह में कलाकृतियों और दीवारों के संरक्षण के लिए काम शुरू कर देंगे।
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पिछले दिनों जापान सरकार के निर्देशन में यहां आई विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय टीम ने कलाकृतियों का बारीकी से निरीक्षण किया। उसके फोटो और वीडियो बनाए। जापानी टीम ने कलाकृतियों को उनके पहले के स्वरूप में लाने का काम जल्द शुरू कराने के संकेत भी दिए। साथ ही, मंदिर की दीवारों में आई दरार की मरम्मत कराने का भरोसा दिलाया।
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भारत और जापान के बीच संबंधों की प्रगाढ़ता का ही असर है कि मूलगंध कुटी विहार स्थित महाबोधि मंदिर के संरक्षण के लिए जापान सरकार ने कदम बढ़ाए हैं। पिछले दिसंबर महीने में पीएम मोदी के साथ जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे काशी आए थे। उसके बाद से काशी और जापान के रिश्तों में और मजबूती आई है। महाबोधि मंदिर की प्राचीन कलाकृतियों और दीवारों में आई दरार को दुरुस्त करने के लिए उठाए जा रहे इस कदम को भी उसीसे जोड़कर देखा जा रहा है।
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भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों को रखने के लिए 1931 में बनकर (1929 में शुरू हुआ था इसका निर्माण) तैयार हुए महाबोधि मंदिर की दीवारों में अब दरार आने के साथ ही उस पर उकेरी गई अनोखी चित्रकारी की रंगत भी फीकी पड़ गई है।
इनके संरक्षण के लिए महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों ने जापान सरकार से संपर्क किया था। हाल ही में जापान सरकार के निर्देशन में वहां के कलाकारों की तीन सदस्यीय टीम यहां महाबोधि मंदिर पहुंची थी। टीम ने धूमिल पड़ चुकीं मंदिर के अंदर की कलाकृतियों के अलावा दीवारों में आई दरार का निरीक्षण किया। उसकी मौजूदा स्थिति, संभावनाओं और उन्हें उनके स्वरूप में वापस लाने के विकल्पों पर मंथन किया। निरीक्षण के बाद टीम ने महाबोधि सोसाइटी के पदाधिकारियों को भरोसा दिलाया कि वह दो से तीन माह में कलाकृतियों और दीवारों के संरक्षण के लिए काम शुरू कर देंगे।