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महाभैरवाष्टमी : काशी में बाबा लाट भैरव की महाआरती, आकर्षक श्रृंगार ने भक्तों को मोहा; लगे जयकारे

Sat, 23 Nov 2024 09:40 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 23 Nov 2024 09:40 PM IST
सार

Varanasi News : ब्रह्म मुहूर्त में में बाबा लाट भैरव का विशेष श्रृंगार किया गया था। महाआरती के दाैरान हजारों भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया। इसके पहले भक्तों ने विधि-विधान से बाबा का पूजन-अर्चन किया।

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Maha Bhairavashtami Maha Aarti of Baba Lat Bhairav attractive decoration fascinated devotees
बाबा लाट भैरव के विशेष श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देवराज इंद्र जिनके पवित्र चरणों की सदैव सेवा करते हैं, जिनके मस्तक पर चंद्रमा शिरोभूषण के रूप में सुशोभित है, जिन्होंने सर्पों का यज्ञोपवीत अपने शरीर पर धारण किया है, नारद सहित बड़े-बड़े योगीवृंद जिनका वंदन करते हैं, ऐसे काशीपुरी के स्वामी बाबा श्री कपाल भैरव प्राकट्योत्सव के अवसर पर काशी के न्यायाधीश बाबा श्री लाट भैरव का भव्य अन्नकूट भोग श्रृंगार किया गया।

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शनिवार को महाभैरवाष्टमी के अवसर पर श्री कपाल भैरव अथवा लाट भैरव प्रबंधक समिति के तत्वावधान में विविध कार्यक्रम किये गए। ब्रह्म मुहूर्त में आचार्य रविंद्र त्रिपाठी के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा श्री के विग्रह को विधिवत गोमय, गोदुग्ध, दही, घी, गंगा जल, भष्म, शहद आदि से दशविध स्न्नान कराया गया।
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इसके बाद बाल रूप रजत मुखौटा को धारण कराकर नवीन वस्त्राभूषण, मुंडमाला आदि से अलंकृत कर आकर्षक श्रृंगार किया गया। प्रथम पूज्य देव गणेश, हनुमान जी, अष्ट भैरव, माता काली, वाहन स्वान का भी श्रृंगार किया गया था।

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Maha Bhairavashtami Maha Aarti of Baba Lat Bhairav attractive decoration fascinated devotees
बाबा लाट भैरव की उतारी गई महा आरती। - फोटो : अमर उजाला

विविध प्रकार के व्यंजनों का लगा भोग
सायंकाल भव्य अन्नकूट श्रृंगार कर झांकी सजायी गयीं। बाबा के चहुंओर मधुर स्वाद से सराबोर विविध प्रकार के व्यंजनों जैसे लड्डू, बर्फी, फल, नमकीन, मेवे आदि को पंक्तिबद्ध कर सजाया गया था।पूरे मंदिर प्रांगण को पंडाल का भव्य स्वरूप दिया गया था। मंदिर के चबूतरे पर संगीतमय सुंदरकांड का पाठ चल रहा था। 

वहीं समीप के रामबाग में नगर वधुओं ने बाबा के चरणों में हाजिरी लगाई।हर हर महादेव के गगनभेरी उद्घोष से सम्पूर्ण मंदिर परिक्षेत्र गूंजता रहा।भंडारे में बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।देर रात्रि पाक्षिक अष्टमी पूजन संपन्न हुआ। महाभैरवाष्टमी पर महाआरती का आयोजन किया गया।



पुजारी संजय पांडेय ने धूप, दीप, कपूर, लोहबान, पुष्प, वस्त्र, चँवर, जल आदि से आरती उतारी।आयोजन में प्रमुख रूप से समिति के अध्यक्ष रोहित जायसवाल (पार्षद), प्रधानमंत्री छोटेलाल जायसवाल, उपाध्यक्ष बसंत सिंह राठौर, मंत्री मुन्ना लाल यादव, विक्रम सिंह राठौर, छोट्टन केशरी, नंदलाल प्रजापति, बच्चे लाल, कर्णशंकर पांडेय, शिवम अग्रहरि, सुशील जायसवाल, अंकित, निक्की, घनश्याम, मंदीप सोनकर, नवीन, आलोक, हिमांशु, रितेश आदि रहें।

काशी में विराजमान अष्टभैरव
काशी में अष्टभैरव विराजमान हैं। इसमें दुर्गाकुंड पर चंड भैरव, हनुमानघाट पर रुद्रभैरव, कमच्छा पर क्रोधन भैरव व उन्मत्त भैरव, नखास पर भीषण भैरव, दारानगर में असितांग भैरव, सरैयां में लाट भैरव, गायघाट पर संहार भैरव विराजमान हैं। श्री कालभैरव को काशी का कोतवाला माना जाता है।

श्रीकृष्ण ने छलिया वेश धर भक्तों को किया निहाल
राधाकृपा परिवार की ओर से दुर्गाकुंड स्थित श्रीहनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय में चल रहे श्रीकृष्णलीला महोत्सव के दूसरे दिन वृंदावन से आए कलाकारों ने मुंदरी चोरी लीला की मनभावन प्रस्तुति देख भक्त विभोर हो गए। राष्ट्रपति पदक से पुरस्कृत रासाचार्य स्वामी फतेहकृष्ण शर्मा (रसराज) के निर्देशन में मुंदरी चोरी लीला हुई। 

श्रीकृष्ण की लीलाओं से ब्रज का कण-कण रससिक्त है। श्रीकृष्ण ने ब्रज रासेश्वरी श्री राधारानी को नृत्य सिखाते हुए उनकी मुद्रिका (अंगूठी) चुरा ली। जब सखियों को पता चला कि मुंदरी कोई और नहीं श्रीकृष्ण ने ही चुराई है तो सखियों के आग्रह पर राधारानी ने श्रीकृष्ण के शृंगार के आभूषण चोरी कर लिए। 

इसके बाद प्रभु ने विरहणी सखी का वेश धारण किया तो राधारानी ने प्रभु के आभूषणों से स्वयं श्रीकृष्ण का शृंगार कर ठाकुरजी को दर्शन दिए। युगल सरकार की इस अद्भुत छवि के दर्शन कर भक्त धन्य हुए। स्वामी रसराज ने कहा कि श्री राधारानी के लिए वर्णन आता हैं कि चौंसठ कला प्रवीण तदपि अति भोरी। यानी श्री राधारानी स्वयं 64 कलाओं में पारंगत हैं। 

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