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Navratri : पहली बार बाबा विश्वनाथ की चुनरी से सजीं मां विशालाक्षी, धाम से आई सामग्री से हुआ सोलह श्रृंगार
Sun, 14 Apr 2024 12:43 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Sun, 14 Apr 2024 12:43 PM IST
सार
नवरात्रि की पंचमी तिथि के अवसर पर पहली बार मां विशालाक्षी देवी का सोलह श्रृंगार बाबा विश्वनाथ धाम से आई सामग्री से किया गया। इस दौरान मां विशालाक्षी देवी के मंदिर में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।
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मां विशालाक्षी देवी के मंदिर में दर्शन करते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चैत्र नवरात्र की पंचमी पर पहली बार बाबा विश्वनाथ की चुनरी और धाम से आई सोलह श्रृंगार की सामग्री से माता विशालाक्षी का श्रृंगार हुआ। शनिवार को पंचम गौरी के रूप में विराजमान शक्तिपीठ मां विशालाक्षी देवी के मंदिर में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही।
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शनिवार को भोर में माता के विग्रह को पंचामृत से स्नान कराया गया। इसके बाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से आई सोलह श्रृंगार की सामग्री से मां विशालाक्षी का विशेष श्रृंगार किया गया। पूरे मंदिर परिसर को फूल और पत्तियों से सजाया गया। माता की मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। भोर से शुरू हुए दर्शन-पूजन का क्रम अनवरत देर रात तक चलता रहा। मंदिर के महंत पं. सुरेश कुमार तिवारी ने बताया कि यह वही शक्ति पीठ है जहां माता सती का नेत्र गिरा था।
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काशी भ्रमण करने के बाद बाबा काशी विश्वनाथ रात्रि में मां विशालाक्षी के मंदिर में विश्राम करते हैं। माता सुहागिनों की इष्ट देवी हैं। सच्चे मन और श्रद्धा से जो भक्त माता के दर्शन मात्र कर ले तो उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं। महत राजनाथ तिवारी ने कहा कि विश्वनाथ मंदिर की ओर से माता को नौ दिनों तक सोलह श्रृंगार अर्पित करने की नई परंपरा की शुरुआत हुई है।
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घर-घर जलेंगे दीप, होगी महानिशा पूजा
नवरात्र की सप्तमी तिथि को मां कालरात्रि की आराधना का विधान है। ज्योतिषविद विमल जैन ने बताया कि चैत्र शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि 14 अप्रैल को दिन में 11:45 बजे से अगले दिन 15 अप्रैल को दिन में 12:12 बजे तक रहेगी।
प्राचीन काली मठ में नवमी पर होगा अनुष्ठान का समापन
लक्ष्मीकुंड स्थित प्राचीन काली मठ में दिव्य आराधना महोत्सव का आयोजन हो रहा है। महंत पं ठाकुर प्रसाद दुबे के नेतृत्व में वैदिक ब्राह्मण के द्वारा नौ दिवसीय दुर्गा सप्तशती पाठ और दश महाविद्या पाठ चैत्र नवरात्र के प्रथमा तिथि से आरंभ हो गया है। अनुष्ठान का समापन नवरात्र की नवमी तिथि 17 अप्रैल को हवन, पूजन, कुंवारी कन्या पूजन और भंडारा के साथ होगा। मंदिर के पुजारी पं. विकास दुबे ने बताया कि उक्त अवसर पर सायं काल भजन के साथ मां का भव्य श्रृंगार और भंडारा कराया जाएगा।
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लक्ष्मीकुंड स्थित प्राचीन काली मठ में दिव्य आराधना महोत्सव का आयोजन हो रहा है। महंत पं ठाकुर प्रसाद दुबे के नेतृत्व में वैदिक ब्राह्मण के द्वारा नौ दिवसीय दुर्गा सप्तशती पाठ और दश महाविद्या पाठ चैत्र नवरात्र के प्रथमा तिथि से आरंभ हो गया है। अनुष्ठान का समापन नवरात्र की नवमी तिथि 17 अप्रैल को हवन, पूजन, कुंवारी कन्या पूजन और भंडारा के साथ होगा। मंदिर के पुजारी पं. विकास दुबे ने बताया कि उक्त अवसर पर सायं काल भजन के साथ मां का भव्य श्रृंगार और भंडारा कराया जाएगा।