साल में सिर्फ चार दिन भक्तों पर खजाना लुटाती हैं मां अन्नपूर्णा, माता के द्वार पर लगती है लंबी कतार
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माता अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के लिए आस्था का रेला उमड़ेगा। 25 अक्तूबर को धनतेरस के दिन से शुरू होकर अन्नकूट तक मां अन्नपूर्णा भक्तों को दर्शन देंगी और अपना खजाना भी लुटाएंगी। माता का खजाना पाने के लिए मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतार लगती है। मान्यता है कि माता के खजाने से पूरे वर्ष अन्न-धन की कमी नहीं रहती है। मंदिर परिसर में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पूरे मंदिर परिसर को झालरों से सजाया गया है।
माता अन्नपूर्णा का शुक्रवार को षोडशोपचार पूजन व भव्य मंगला आरती के पश्चात आम जन का दर्शन शुरू होगा। भक्तों में वितरित होने वाले खजाने का भी विधि-विधान से पूजन होगा। इसके बाद मंदिर के पट खोल दिए जाएंगे। भोग आरती के लिए दोपहर 12 से 12:30 बजे तक मंदिर बंद रहेगा। रात 11 बजे तक माता के दर्शन पूजन का सिलसिला चलेगा। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए वीआईपी दर्शन के लिए शाम 5 से 7 बजे दर्शन का समय निर्धारित किया गया है।
महंत रामेश्वरपुरी ने बताया कि मां अन्नपूर्णा धन की अधिष्ठात्री हैं। स्कंदपुराण के काशीखण्ड में उल्लेख है कि भगवान विश्वेश्वर गृहस्थ हैं और भवानी उनकी गृहस्थी चलाती हैं। अत: काशीवासियों के योग-क्षेम का भार इन्हीं पर है। ब्रह्मवैवर्त्तपुराण के काशी-रहस्य के अनुसार भवानी ही अन्नपूर्णा हैं। सामान्य दिनों में अन्नपूर्णा माता की आठ परिक्रमा की जाती है। प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन देवी के निमित्त व्रत रह कर उनकी उपासना का विधान है। प्रबंधक काशी मिश्रा ने बताया कि सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से सहायक भी तैनात किए गए हैं।
प्रतिबंधित वस्तुओं को साथ न लाएं
धनतेरस के दिन भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने अपील की है कि अपने साथ कोई ऐसी वस्तु लेकर न आएं जिससे कि सुरक्षा कारणों से रोक दिया जाए। दर्शन पूजन के दौरान अनावश्यक धक्का-मुक्की न करें। दिव्यांग और बुजुर्गों के लिए मंदिर प्रबंधन ने सहायक के तौर पर कुछ लोगों को तैनात किया गया है। दिव्यांग व बुजुर्गों को सीढ़ी के रास्ते सीधे दर्शन करवाकर निकास द्वार से बाहर पहुंचा दिया जाएगा।