{"_id":"593d08224f1c1ba95d9bebde","slug":"lucknow-pancham-tal-connected-with-rs-yadav","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"रियो ओलंपिक गया था आरएस यादव , खेल संगठनों में बना ली थी गहरी पकड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रियो ओलंपिक गया था आरएस यादव , खेल संगठनों में बना ली थी गहरी पकड़
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 11 Jun 2017 05:17 PM IST
विज्ञापन
रियो ओलंपिक में पीवी सिंधु एवं पुलेला गोपीचंद के साथ आरएस यादव
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अवैध वसूली के आरोप में गिरफ्तार किए गए चंदौली के एआरटीओ आरएस यादव का तार पंचम तल से जुड़ा है। सपा सरकार में एक प्रमुख सचिव का यादव पर हाथ था। इसी की बदौलत यादव एथलेटिक्स संघ का अध्यक्ष बनकर रियो ओलंपिक में गया था।
भ्रष्टाचार के आरोपी ने बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु एवं बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद के साथ अपनी एक फोटो फेसबुक पर पोस्ट की थी। शनिवार को गिरफ्तार होने से कुछ देर पहले उसने अपने फेसबुक से इस फोटो को छोड़ सारी फोटो हटा दी थी।
आरएस यादव अपने होटल में भी खेल खिलाड़ियों के साथ मीटिंग करता था। पंचम तल से जुड़ाव सपा सरकार में एक प्रमुख सचिव के कारण हुआ।
आरएस यादव ने प्रमुख सचिव को उपकृत करके खेल संगठनों में पैठ जमा ली।
यादव को जिला एथलेटिक्स संघ का अध्यक्ष बना दिया गया। किसी खेल एसोसिएशन की इससे ज्यादा दुर्गति क्या हो सकती है कि उसके अध्यक्ष को उस खेल के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। यूंकि खेल संगठनों से जुड़े तमाम अनुभवी पदाधिकारियों ने इसका विरोध किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
बताते हैं कि धनबल के बूते ये अधिकारी रियो ओलंपिक जाने में कामयाब रहा। इसके साथ पंचम तल का वो पावरफुल आईएएस अफसर भी साथ गया था। खेल संगठनों के लोगों का कहना है कि रियो जाकर खूब सैरसपाटा किया लेकिन खिलाड़ियों की कोई खोज खबर नहीं ली।
आरएस यादव के अध्यक्ष बनने के बाद से महिला खिलाड़ी असहज थीं। वह नहीं चाहती थीं कि उनके खेल संगठन का कोई ऐसा व्यक्ति अध्यक्ष हो जिसके बारे में उसको कोई जानकारी ही नहीं हो।
क्या है पंचम तल
लखनऊ का लालबहादुर शास्त्री भवन जिसे एनेक्सी भवन के नाम से भी जाना जाता है। इसी एनेक्सी भवन के पांचवे मंजिल पर है मुख्यमंत्री सचिवालय जिसे पंचम तल कहा जाता है। पंचम तल पर मुख्यमंत्री का सचिवालय है..यहां मुख्यमंत्री के ऑफिस के अलावा मुख्यमंत्री के सचिव बैठते है। यूपी में सबसे ताकतवर आफिस पंचम तल ही है।
विज्ञापन
भ्रष्टाचार के आरोपी ने बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु एवं बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद के साथ अपनी एक फोटो फेसबुक पर पोस्ट की थी। शनिवार को गिरफ्तार होने से कुछ देर पहले उसने अपने फेसबुक से इस फोटो को छोड़ सारी फोटो हटा दी थी।
विज्ञापन
आरएस यादव अपने होटल में भी खेल खिलाड़ियों के साथ मीटिंग करता था। पंचम तल से जुड़ाव सपा सरकार में एक प्रमुख सचिव के कारण हुआ।
आरएस यादव ने प्रमुख सचिव को उपकृत करके खेल संगठनों में पैठ जमा ली।
यादव को जिला एथलेटिक्स संघ का अध्यक्ष बना दिया गया। किसी खेल एसोसिएशन की इससे ज्यादा दुर्गति क्या हो सकती है कि उसके अध्यक्ष को उस खेल के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। यूंकि खेल संगठनों से जुड़े तमाम अनुभवी पदाधिकारियों ने इसका विरोध किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
बताते हैं कि धनबल के बूते ये अधिकारी रियो ओलंपिक जाने में कामयाब रहा। इसके साथ पंचम तल का वो पावरफुल आईएएस अफसर भी साथ गया था। खेल संगठनों के लोगों का कहना है कि रियो जाकर खूब सैरसपाटा किया लेकिन खिलाड़ियों की कोई खोज खबर नहीं ली।
आरएस यादव के अध्यक्ष बनने के बाद से महिला खिलाड़ी असहज थीं। वह नहीं चाहती थीं कि उनके खेल संगठन का कोई ऐसा व्यक्ति अध्यक्ष हो जिसके बारे में उसको कोई जानकारी ही नहीं हो।
क्या है पंचम तल
लखनऊ का लालबहादुर शास्त्री भवन जिसे एनेक्सी भवन के नाम से भी जाना जाता है। इसी एनेक्सी भवन के पांचवे मंजिल पर है मुख्यमंत्री सचिवालय जिसे पंचम तल कहा जाता है। पंचम तल पर मुख्यमंत्री का सचिवालय है..यहां मुख्यमंत्री के ऑफिस के अलावा मुख्यमंत्री के सचिव बैठते है। यूपी में सबसे ताकतवर आफिस पंचम तल ही है।
आरएस यादव का विवादों से रहा है पुराना नाता
arto
- फोटो : अमर उजाला
अवैध वसूली के आरोप में गिरफ्तार किए गए चंदौली के एआरटीओ आरएस यादव का विवादों से पुराना नाता रहा है। बनारस के एक प्रतिष्ठित एवं विवादित क्लब के एक सदस्य से नजदीकियों को लेकर काफी चर्चा में रहे हैं। ये चर्चा फिजा में तैरते हुए आम हो गई।
बताया जाता है कि इसी चर्चा को लेकर के एयरपोर्ट पर इनके साथ हाथापाई तक हुई। क्लब के सदस्यों के बीच यह मामला काफी चर्चा में रहा। भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि आठ साल पूर्व आरएस यादव पर हमला भी हुआ था। उनके ऊपर गोली चलाई गई थी। हालांकि गोली क्यों और किसने चलाई इसका पता आज तक नहीं पता चला।
गिरफ्तारी के लिए ऐसे बिछाया जाल
एआरटीओ आरएस यादव की गिरफ्तारी के लिए एसपी चंदौली संतोष सिंह ने ऐसा जाल बिछाया कि उसके बच निकलने के सारे रास्ते बंद हो गए। दिन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से गिरफ्तारी की हरी झंडी मिलने के बाद पुलिस ने आरएस यादव को सर्विलांस की मदद से ट्रेस करना शुरू कर दिया।
उसकी लोकेशन लखनऊ में मिली। चंदौली पुलिस लखनऊ जाने की तैयारी कर रही थी कि इसी बीच यादव की लोकेशन रायबरेली में मिली। इससे पता चला कि वह वाराणसी की ओर आ रहा है। बाद में चंदौली पुलिस ने जौनपुर पुलिस से संपर्क कर मछलीशहर में चेकिंग करने को कहा।
चार गाड़ियों की चेकिंग के बाद पांचवीं गाड़ी आरएस यादव की थी। पुलिस के परिचय पूछने पर आरएस यादव ने रुआब दिखाते हुए खुद को एआरटीओ बताया। पुलिस भी यही चाहती थी। पहचान जानने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। दिन में यादव लखनऊ तो गया लेकिन नेताओं और अफसरों में उसकी एक न चली।
कोतवाल के आवास में हुई खातिरदारी
चंदौली के एआरटीओ आरएस यादव की गिरफ्तारी के बाद इंस्पेक्टर मछलीशहर अपने अवास में ले गए जहां उसकी खूब खातिरदारी हुई। सूत्रों की माने तो उसे काजू की बर्फी खिलाई गई बिना चीनी की चाय भी नमकीन के साथ परोसी गई। एआरटीओ आवास से ही कई अधिकारियों और नेताओं को फोन कर अपनी गिरफ्तारी की सूचना दिया। इसके बाद जिले के पुलिस अफसरों के फोन घनघनाने लगे।
बताया जाता है कि इसी चर्चा को लेकर के एयरपोर्ट पर इनके साथ हाथापाई तक हुई। क्लब के सदस्यों के बीच यह मामला काफी चर्चा में रहा। भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि आठ साल पूर्व आरएस यादव पर हमला भी हुआ था। उनके ऊपर गोली चलाई गई थी। हालांकि गोली क्यों और किसने चलाई इसका पता आज तक नहीं पता चला।
गिरफ्तारी के लिए ऐसे बिछाया जाल
एआरटीओ आरएस यादव की गिरफ्तारी के लिए एसपी चंदौली संतोष सिंह ने ऐसा जाल बिछाया कि उसके बच निकलने के सारे रास्ते बंद हो गए। दिन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से गिरफ्तारी की हरी झंडी मिलने के बाद पुलिस ने आरएस यादव को सर्विलांस की मदद से ट्रेस करना शुरू कर दिया।
उसकी लोकेशन लखनऊ में मिली। चंदौली पुलिस लखनऊ जाने की तैयारी कर रही थी कि इसी बीच यादव की लोकेशन रायबरेली में मिली। इससे पता चला कि वह वाराणसी की ओर आ रहा है। बाद में चंदौली पुलिस ने जौनपुर पुलिस से संपर्क कर मछलीशहर में चेकिंग करने को कहा।
चार गाड़ियों की चेकिंग के बाद पांचवीं गाड़ी आरएस यादव की थी। पुलिस के परिचय पूछने पर आरएस यादव ने रुआब दिखाते हुए खुद को एआरटीओ बताया। पुलिस भी यही चाहती थी। पहचान जानने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। दिन में यादव लखनऊ तो गया लेकिन नेताओं और अफसरों में उसकी एक न चली।
कोतवाल के आवास में हुई खातिरदारी
चंदौली के एआरटीओ आरएस यादव की गिरफ्तारी के बाद इंस्पेक्टर मछलीशहर अपने अवास में ले गए जहां उसकी खूब खातिरदारी हुई। सूत्रों की माने तो उसे काजू की बर्फी खिलाई गई बिना चीनी की चाय भी नमकीन के साथ परोसी गई। एआरटीओ आवास से ही कई अधिकारियों और नेताओं को फोन कर अपनी गिरफ्तारी की सूचना दिया। इसके बाद जिले के पुलिस अफसरों के फोन घनघनाने लगे।