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सारनाथ में प्रेमी-प्रेमिका ने जहर खाकर जान दी, सुसाइड नोट में ये बातें लिखी...
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 24 Oct 2017 11:31 AM IST
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प्रेमी जोड़े ने निगला जहर
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वाराणसी के सारनाथ संग्रहालय के समीप सड़क किनारे सोमवार की दोपहर प्रेमी-प्रेमिका ने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी। दोनों की पहचान परमहंस नगर कॉलोनी निवासी रीतेश कुमार (25) और उसके पड़ोस की शिवानी (19) के रूप में हुई है। सूचना पर पहुंची पुलिस दोनों को दीनदयाल राजकीय अस्पताल ले गई, जहां रितेश की मौत हो गई। वहीं, गंभीर हालत में शिवानी को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया, जहां कुछ देर बाद उसने भी दम तोड़ दिया।
सारनाथ पुलिस के अनुसार, दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे। शादी की बात न बनती देख दोनों ने यह कदम उठाया। उनके पास से सारनाथ संग्रहालय की प्रवेश रसीद बरामद हुई, जिसके पीछे लिखा था कि हम दोनों अपनी मर्जी से सुसाइड कर रहे हैं। पर्ची पर घर का पता और मोबाइल नंबर भी लिखा था।
बिहार में कृषि विभाग में एसडीओ के तौर पर तैनात कमलेश प्रसाद परमहंस नगर कॉलोनी में मकान बनवा कर रहते हैं।
उनका बेटा रीतेश बीकॉम करने के बाद बैंकिंग परीक्षा की तैयारी कर रहा था। कमलेश के पड़ोसी सुरेश की दो बेटियों और एक बेटे में सबसे बड़ी शिवानी भी पढ़ाई पूरी कर रीतेश के साथ बैंकिंग परीक्षाओं की कोचिंग करती थी। दोनों नौकरी की तलाश में थे।
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बताया जाता है कि सोमवार की दोपहर दोनों सारनाथ स्थित संग्रहालय पहुंचे। वहां का प्रवेश टिकट खरीद कर दोनों अंदर गए और वहां काफी देर तक बातें कीं। फिर एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए बाहर निकले। कुछ दूर तक टहलने के बाद वे सड़क किनारे बैठ गए और वहीं उन्होंने लाई-चना में विषाक्त पदार्थ मिलाकर निगल लिया। थोड़ी देर बाद दोनों को उल्टी होने लगी।
उनकी हालत बिगड़ती देख वहां गुजर रहे एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी के कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस दोनों को सारनाथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई। जहां डॉक्टर ने उन्हें दीनदयाल राजकीय अस्पताल रेफर कर दिया। दीनदयाल अस्पताल में रीतेश को मृत घोषित कर दिया गया जबकि शिवानी को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया।
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सारनाथ पुलिस के अनुसार, दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे। शादी की बात न बनती देख दोनों ने यह कदम उठाया। उनके पास से सारनाथ संग्रहालय की प्रवेश रसीद बरामद हुई, जिसके पीछे लिखा था कि हम दोनों अपनी मर्जी से सुसाइड कर रहे हैं। पर्ची पर घर का पता और मोबाइल नंबर भी लिखा था।
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बिहार में कृषि विभाग में एसडीओ के तौर पर तैनात कमलेश प्रसाद परमहंस नगर कॉलोनी में मकान बनवा कर रहते हैं।
उनका बेटा रीतेश बीकॉम करने के बाद बैंकिंग परीक्षा की तैयारी कर रहा था। कमलेश के पड़ोसी सुरेश की दो बेटियों और एक बेटे में सबसे बड़ी शिवानी भी पढ़ाई पूरी कर रीतेश के साथ बैंकिंग परीक्षाओं की कोचिंग करती थी। दोनों नौकरी की तलाश में थे।
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बताया जाता है कि सोमवार की दोपहर दोनों सारनाथ स्थित संग्रहालय पहुंचे। वहां का प्रवेश टिकट खरीद कर दोनों अंदर गए और वहां काफी देर तक बातें कीं। फिर एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए बाहर निकले। कुछ दूर तक टहलने के बाद वे सड़क किनारे बैठ गए और वहीं उन्होंने लाई-चना में विषाक्त पदार्थ मिलाकर निगल लिया। थोड़ी देर बाद दोनों को उल्टी होने लगी।
उनकी हालत बिगड़ती देख वहां गुजर रहे एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी के कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस दोनों को सारनाथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई। जहां डॉक्टर ने उन्हें दीनदयाल राजकीय अस्पताल रेफर कर दिया। दीनदयाल अस्पताल में रीतेश को मृत घोषित कर दिया गया जबकि शिवानी को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया।
घरवालों ने समझाया था पहले कुछ कर लो तो करें शादी
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बीएचयू ट्रॉमा सेंटर से शिवानी के परिवारीजन उसे अपनी तसल्ली के लिए डीरेका स्थित अस्पताल ले गए। वहां के डॉक्टरों ने भी उसे मृत घोषित कर दिया। सारनाथ थानाध्यक्ष ने बताया कि दोनों के परिवारीजनोें ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया तो पंचनामा भर कर शव उनके सुपुर्द कर दिया गया। दोनों के परिवारीजनों का एक-दूसरे पर कोई आरोप नहीं था।
रीतेश और शिवानी का प्रेमप्रसंग उनके घर वालों की जानकारी में था। बताया जाता है कि दोनों के परिवारीजनों ने उन्हें समझाया था कि पढ़ाई-लिखाई पूरी करने के बाद पहले अपने मुकाम तक पहुंच जाओ। नौकरी के बाद दोनों के शादी करने में उन्हें कोई हर्ज नहीं है।
मगर, दोनों घरवालों की सुनने को तैयार नहीं थे। घटना के बाद दोनों के परिवारीजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पास-पड़ोस के लोग दोनों परिवारों को ढांढस बंधाने में जुटे थे।
निजी कंपनी में कार्यरत शिवानी के पिता सुरेश ने कहा कि सोचे थे कि बड़ी बेटी एक अच्छे मुकाम पर पहुंच कर छोटे भाई-बहनों को प्रेरित करेगी। मगर, उसी बेटी की अर्थी को कंधा देना पड़ेगा यह सपने में भी नहीं सोचा था। सारे सपने टूट गए। उधर, रीतेश के परिवारीजन कुछ कहने की स्थिति में नहीं थे। हर किसी की आंख में सिर्फ आंसू थे।