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Varanasi News: योग निद्रा से जागेंगे भगवान श्रीहरि, 12 से गूंजेगी शहनाई
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नवंबर में विवाह के 10 और दिसंबर महीने में आठ मुहूर्त
देव प्रबोधिनी एकादशी 12 नवंबर को, होगा चातुर्मास का समापन
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। चार महीने की योग निद्रा के बाद भगवान श्री हरि विष्णु 12 नवंबर को जागेंगे। इसके साथ ही चार महीने से मांगलिक कार्यों पर लगा विराम भी हट जाएगा। नवंबर और दिसंबर में 18 दिन विवाह के मुहूर्त मिलेंगे। इसके बाद खरमास की शुरुआत हो जाएगी और सभी मांगलिक कार्य मकर संक्रांति तक बंद रहेंगे।
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 11 नवंबर को शाम 6:47 बजे लगेगी और 12 नवंबर को शाम 4:06 बजे तक रहेगी। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र 12 नवंबर को सुबह 7:53 बजे से उसी दिन अर्धरात्रि के पश्चात 5:41 मिनट तक रहेगा। हरिप्रबोधिनी एकादशी का व्रत उदयातिथि के अनुसार 12 नवंबर को रखा जाएगा। कार्तिक शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि से कार्तिक पूर्णिमा तक शुद्ध देशी घी के दीपक जलाने से जीवन के सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। देव प्रबोधिनी एकादशी से भीष्म पंचक व्रत की शुरुआत होगी। 12 नवंबर से विवाह समेत सभी मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएंगे।
विवाह के मुहूर्त
नवंबर : 12, 13, 16, 17, 18, 24, 25, 26, 28, 30
दिसंबर : 1, 2, 3, 4, 5, 9, 10, 11
जनवरी 2025 : 16, 18, 19, 20, 21, 24, 26, 27
फरवरी : 1, 2, 3, 8, 12, 14, 15, 16, 22, 23, 24
मार्च : 1, 2, 3
अप्रैल : 15, 16, 20, 25, 26
मई : 1, 7, 8, 9, 11, 15, 16, 22, 23, 24, 27, 28
जून : 3, 4, 5
नवंबर : 2, 3, 4, 7, 8, 12, 13, 14, 15, 16, 18, 20, 21, 24
दिसबंर : 1, 4
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देव प्रबोधिनी एकादशी 12 नवंबर को, होगा चातुर्मास का समापन
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। चार महीने की योग निद्रा के बाद भगवान श्री हरि विष्णु 12 नवंबर को जागेंगे। इसके साथ ही चार महीने से मांगलिक कार्यों पर लगा विराम भी हट जाएगा। नवंबर और दिसंबर में 18 दिन विवाह के मुहूर्त मिलेंगे। इसके बाद खरमास की शुरुआत हो जाएगी और सभी मांगलिक कार्य मकर संक्रांति तक बंद रहेंगे।
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 11 नवंबर को शाम 6:47 बजे लगेगी और 12 नवंबर को शाम 4:06 बजे तक रहेगी। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र 12 नवंबर को सुबह 7:53 बजे से उसी दिन अर्धरात्रि के पश्चात 5:41 मिनट तक रहेगा। हरिप्रबोधिनी एकादशी का व्रत उदयातिथि के अनुसार 12 नवंबर को रखा जाएगा। कार्तिक शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि से कार्तिक पूर्णिमा तक शुद्ध देशी घी के दीपक जलाने से जीवन के सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। देव प्रबोधिनी एकादशी से भीष्म पंचक व्रत की शुरुआत होगी। 12 नवंबर से विवाह समेत सभी मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएंगे।
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विवाह के मुहूर्त
नवंबर : 12, 13, 16, 17, 18, 24, 25, 26, 28, 30
दिसंबर : 1, 2, 3, 4, 5, 9, 10, 11
जनवरी 2025 : 16, 18, 19, 20, 21, 24, 26, 27
फरवरी : 1, 2, 3, 8, 12, 14, 15, 16, 22, 23, 24
मार्च : 1, 2, 3
अप्रैल : 15, 16, 20, 25, 26
मई : 1, 7, 8, 9, 11, 15, 16, 22, 23, 24, 27, 28
जून : 3, 4, 5
नवंबर : 2, 3, 4, 7, 8, 12, 13, 14, 15, 16, 18, 20, 21, 24
दिसबंर : 1, 4