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वाराणसी : रामनगर की रामलीला में इंद्रदेव भी भगवान राम के स्वागत के लिए पहुंचे

Sat, 14 Sep 2019 01:16 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 14 Sep 2019 01:16 PM IST
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lord ram born and rain in ramlila of ramnagar varanasi
भगवान स्वरूप को रामलीला स्थल तक ले जाते लोग। - फोटो : अमर उजाला

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥ जिस दिन का राजा दशरथ समेत तीनों लोकों को इंतजार था, वह घड़ी आ गई। अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु ने त्रेतायुग में भगवान श्रीराम के रूप में धरती पर अवतार ले लिया। भरत, लक्ष्मण और शत्रुघभन के साथ राम के अवतार की सूचना से संपूर्ण जगत में खुशियों की बहार छा गई। भगवान इंद्र ने भी प्रसन्न होकर मेघ बरसाकर प्रभु का स्वागत किया। अयोध्यावासियों ने रामजन्म की खुशी में घी के दीए जलाए।

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शुक्रवार को रामलीला के दौरान बरसात ने खलल डाला लेकिन लीला प्रेमी अपने स्थान पर ही जमे रहे। बरसात के कारण 20 मिनट तक लीला प्रभावित हुई। रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के दूसरे दिन किला रोड स्थित अयोध्या मैदन में भगवान राम के जन्मोत्सव की लीला हुई। पुत्र सुख से वंचित राजा दशरथ गुरु वशिष्ठ से अपना दुख कहते हैं, तब वशिष्ठ उनसे पुत्रेष्टि यज्ञ करने की सलाह देते हैं। यज्ञ की समाप्ति पर अग्दिेव प्रकट होते हैं और तीनों रानियों को हव्य देते हैं।
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गर्भ से बाहर निकलते ही नारायण ने अपने विराट स्वरूप के दर्शन माता कौशल्या को कराए तो वह डर गईं। उन्होंने भगवान से बालरूप धारण करने की प्रार्थना की। दासियों से पुत्र जन्म की सूचना मिलते ही राजा दशरथ की खुशी का ठिकाना नहीं रहता है। पूरी अयोध्या श्रीराम जन्म का उत्सव मनाने लगती है। घी के दिए जलाए जाते हैं। सोहर गूंज उठती है।

गुरु वशिष्ठ चारों भाईयों का नामकरण करते हैं। गुरु वशिष्ठ राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघभन का यज्ञोपवीत कराते हैं। चारों भाई गुरु से विद्या अध्ययन के लिए जाते हैं और अल्प समय में ही विद्या प्राप्त कर लेते हैं। पिता की आज्ञा लेकर श्रीराम अपने मित्रों के साथ शिकार के लिए जाते हैं और मृग का शिकार करके ले आते हैं। पिता को दिखाकर कहते हैं कि इसे हमने मारा है। राज दशरथ प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही चारों भाईयों की नयनाभिराम आरती के साथ दूसरे दिन की लीला को विश्राम दिया जाता है। 

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जाल्हूपुर की रामलीला :
चिरईगांव विकासखंड के टूड़ीनगर जाल्हूपुर में अति प्राचीन रामलीला में शुक्रवार को रामजन्म की लीला का मंचन हुआ। चारों तरफ मंगल गीत एवं सोहर गीतों से अयोध्या में खुशहाली का माहौल हो जाता है। महाराज दशरथ नगर वासियों को उपहार भेंट करते हैं। ब्राह्मणों को दान देते हैं।

इसके अलावा भगवान राम के साथ चारों भाइयों के बाल रूप के दर्शन व बाल क्रीड़ा का मनोहारी मंचन किया गया। जिसे देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए। जाल्हूपुर में माह भर चलने वाली रामलीला श्री श्री 1008 रामरमी सरकार ने शुरू कराया था। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद उनके जेष्ठ पुत्र आनंद देव सरकार के सानिध्य में रामलीला होती है। व्यास की भूमिका शिवबालक मिश्रा निभा रहे हैं।

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