{"_id":"6720f796c5c41a12c50754b9","slug":"lord-dhanvantari-s-court-opened-for-five-hours-grand-worship-of-three-hundred-year-old-idol-2024-10-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi: पांच घंटे के लिए खुला भगवान धन्वंतरी का दरबार, तीन सौ साल पुरानी प्रतिमा का भव्य पूजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi: पांच घंटे के लिए खुला भगवान धन्वंतरी का दरबार, तीन सौ साल पुरानी प्रतिमा का भव्य पूजन
Tue, 29 Oct 2024 08:26 PM IST
नितीश कुमार पांडेय
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: नितीश कुमार पांडेय
Updated Tue, 29 Oct 2024 08:26 PM IST
सार
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरी की पूजा का विधान है। आयुर्वेद के देवता की सैकड़ों साल पुरानी प्रतिमा के साल में एक बार पांच घंटे के लिए दर्शन होते हैं। वाराणसी में भक्तों ने दर्शन कर आशीर्वाद मांगा।
विज्ञापन
भगवान धन्वंतरी की तीन सौ साल पुरानी प्रतिमा का भव्य पूजन
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
भगवान विष्णु के अवतार एवं त्रिदेवों में से एक आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि का जन्मोत्सव धूमधाम से सुड़िया स्थित वैद्यराज स्व. पं शिव कुमार शास्त्री के धन्वंतरि निवास में मनाया गया। धनतेरस के दिन भगवान गणेश माता लक्ष्मी के पूजन से सुख समृद्धि एवं भगवान धन्वंतरि के पूजन से मनुष्य आरोग्यता के साथ खुशहाल जीवन जीता है।
विज्ञापन
ऐसी मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि का जन्म समुद्रमंथन से धनतेरस के ही दिन हुआ था। इस अवसर पर मंगलवार को धन्वंतरि निवास के श्री धन्वंतरि धर्मामृत औषधालय मंदिर में स्थापित भगवान धन्वंतरि के अष्ठधातु की मूर्ति को दोपहर में शास्त्रोचित विधि से स्नान कराकर चांदी के सिंहासन पर विराजमान कराया गया।
विज्ञापन
भगवान धन्वंतरि एक हाथ अमृत कलश दूसरे में चक्र तीसरे में शंख एवं चौथे हाथ में जोंक के साथ उनके मुख से दिव्य आभा की चमक बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। भगवान का श्रृंगार दुर्लभ आयुर्वेदिक औषधियों जैसे केसर, कस्तूरी, अंबर, अश्वगंधा, शंखपुष्पी, मूसली सहित स्वर्ण, हीरे, माणिक, पन्ना से किया गया था।
विज्ञापन
मंदिर प्रांगण में शहनाई की मंगलध्वनि के साथ पांच ब्राह्मणों द्वारा विधिविधान से पूजन अर्चन किया गया। वैद्यराज परिवार से पं रामकुमार शास्त्री, पं नन्द कुमार शास्त्री, पं समीर कुमार शास्त्री सहित पुत्रगण उत्पल शास्त्री, आदित्य विक्रम शास्त्री, मिहिर विक्रम शास्त्री कोमल शास्त्री ने भगवान को भोग लगाकर आरती की और सभी के मंगलकामना एवं आरोग्य सुख समृद्धि का आशीर्वाद लिया। शाम ठीक 5 बजे मंदिर का पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।
रात 10 बजे तक देश विदेश के हजारों श्रद्धालुओं सहित काशीवासियों ने भगवान धन्वंतरि के दर्शन कर आरोग्य अमृतरस रूपी प्रसाद को ग्रहण किया। इस अवसर पर काशी के गणमान्य नागरिकों सहित विधायक एवं वीआईपी अधिकारियों ने भी भगवान से आरोग्य सुख का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर राकेश सारस्वत, सर्वेश नारायण पवन सिंह, मनोज जायसवाल सहित काशी के गणमान्य लोग उपस्थित रहें।