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Varanasi News: मूल नक्षत्र में हुआ भगवान बालाजी का विवाह
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- दक्षिण भारतीय विधि से निभाई गई 150 साल प्राचीन परंपरा
- तिरूपति मंदिर के अनुसार ही काशी में भी हुआ विवाहोत्सव
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। काशी में विराजमान भगवान बालाजी का विवाहोत्सव मूल नक्षत्र में हुआ। भगवान के विवाह पूजन अनुष्ठान में सौभाग्यवती महिलाओं के साथ ही कुंवारी कन्याओं ने भी हिस्सा लिया। पूजन समारोह में भगवान बालाजी का विवाह माता पद्मावती और माता भू-देवी के साथ दक्षिण भारतीय रीति-रिवाज के साथ कराया गया।
बुधवार को बालाजी घाट पर भगवान वेंकटेश्वर के विवाहोत्सव का श्रीगणेश हुआ। विवाह से पहले भगवान बालाजी की प्रतिमा को स्नान कराकर हल्दी का लेप लगाया गया। इसके बाद भगवान बालाजी, माता पद्मावती (लक्ष्मी) और माता भू-देवी की मूर्तियों का शृंगार किया गया। वैदिक ब्राह्मणों ने दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार पूरे विधि-विधान से वैदिक मंत्रोच्चार कर भगवान बालाजी का विवाह संपन्न करवाया। पूरा मंदिर दक्षिण भारतीय गाजे-बाजे की धुन से गुंजायमान रहा।
मंदिर के पुजारी प्रभात कुमार शर्मा ने बताया कि बालाजी महाराज का ब्रह्म महोत्सव प्रतिपदा से आरंभ होकर एकादशी तक चलता है। इसके तहत मूल नक्षत्र में बालाजी का विवाहोत्सव संपन्न होता है। इसी नक्षत्र में तिरुपति बालाजी में भी मूल नक्षत्र में विवाह उत्सव संपन्न होता है। उसी परंपरा के अनुसार काशी में बालाजी मंदिर में भी विवाहोत्सव किया जाता है। यह परंपरा डेढ़ सौ साल से भी अधिक प्राचीन है।
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- तिरूपति मंदिर के अनुसार ही काशी में भी हुआ विवाहोत्सव
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। काशी में विराजमान भगवान बालाजी का विवाहोत्सव मूल नक्षत्र में हुआ। भगवान के विवाह पूजन अनुष्ठान में सौभाग्यवती महिलाओं के साथ ही कुंवारी कन्याओं ने भी हिस्सा लिया। पूजन समारोह में भगवान बालाजी का विवाह माता पद्मावती और माता भू-देवी के साथ दक्षिण भारतीय रीति-रिवाज के साथ कराया गया।
बुधवार को बालाजी घाट पर भगवान वेंकटेश्वर के विवाहोत्सव का श्रीगणेश हुआ। विवाह से पहले भगवान बालाजी की प्रतिमा को स्नान कराकर हल्दी का लेप लगाया गया। इसके बाद भगवान बालाजी, माता पद्मावती (लक्ष्मी) और माता भू-देवी की मूर्तियों का शृंगार किया गया। वैदिक ब्राह्मणों ने दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार पूरे विधि-विधान से वैदिक मंत्रोच्चार कर भगवान बालाजी का विवाह संपन्न करवाया। पूरा मंदिर दक्षिण भारतीय गाजे-बाजे की धुन से गुंजायमान रहा।
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मंदिर के पुजारी प्रभात कुमार शर्मा ने बताया कि बालाजी महाराज का ब्रह्म महोत्सव प्रतिपदा से आरंभ होकर एकादशी तक चलता है। इसके तहत मूल नक्षत्र में बालाजी का विवाहोत्सव संपन्न होता है। इसी नक्षत्र में तिरुपति बालाजी में भी मूल नक्षत्र में विवाह उत्सव संपन्न होता है। उसी परंपरा के अनुसार काशी में बालाजी मंदिर में भी विवाहोत्सव किया जाता है। यह परंपरा डेढ़ सौ साल से भी अधिक प्राचीन है।
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