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एक दिन में ही ढीले पड़ गए
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 15 Apr 2016 02:16 AM IST
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वरुणा नदी क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई में वीडीए के दोहरे मापदंड को देखकर आप हैरान रह जाएंगे। अमर उजाला में छपी खबरों का संज्ञान लेकर कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने सख्ती की तो वरुणा किनारे अवैध निर्माणों पर वीडीए की नींद खुली। नदी क्षेत्र की नापी के साथ अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए माहौल बनाया गया। वीडीए के नोटिस पर बुद्ध विहार कालोनी में खुद एक भवन स्वामी ने अपना अवैध निर्माण तोड़ने की पहल भी की। इस निर्माण को तोड़ने का काम तो गुरुवार को भी चला लेकिन वीडीए की सारी कवायद चौबीस घंटे में ही ढीली पड़ गई।
गुरुवार को न वीडीए की टीम पहुंची, न अभियान चला और न ही किसी नए अतिक्रमण पर हथौड़े चले। पूछने पर वीडीए के अफसरों ने इसकी वजह छुट्टी का दिन होना बताया जबकि अभियान लगातार जारी रखने के निर्देश दिए गए थे। इतना ही नहीं, 200 से अधिक अवैध निर्माण हैं। इनमें कई नेता, डॉक्टर, प्रोफेसर, वकील, बिल्डर, होटल व्यवसायी आदि शामिल हैं लेकिन वीडीए प्रशासन अब तक महज छह भवनों को नोटिस जारी कर पाया है वह भी बुद्ध विहार कॉलोनी में। बाकी अवैध निर्माण जैसे उसे नजर ही नहीं आ रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि गुरुवार को जहां एक तरफ भवन स्वामी अपना अवैध निर्माण तुड़वा रहा था, उससे कुछ ही दूरी पर धड़ल्ले से एक नया अवैध निर्माण कराया जा रहा था।
यह सब कुछ खुलेआम हो रहा था लेकिन छुट्टी का बहाना कर अभियान से किनारा कसने वाले वीडीए के अधिकारियों को शायद कोई परवाह नहीं। हकीकत तो यह है कि इसी स्थान से होकर वीडीए की टीम बुधवार को गुजरी थी लेकिन उसे अवैध निर्माण जाने क्याें नजर नहीं आया। जानकारों का दावा है कि वीडीए महज खानापूर्ति करना चाहता है। अवैध निर्माण कराने वालों में जो पहुंच वाले हैं उनसे वीडीए ने दूरी बनाए रखी है। आला अधिकारियों के दबाव पर अवैध निर्माणों को ढहाने का रस्म पर अदा किया गया। वीडीए का यह रवैया सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट पर भारी पड़ने के साथ ही प्रशासन को भी मुश्किल में डाल सकता है।
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वरुणा कॉरिडोर मामले में विकास की उल्टी गंगा बहाने वालों की शिकायत अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से की जाएगी। इसे लेकर गंभीर सत्या फाउंडेशन के सचिव चेतन उपाध्याय गुरुवार को दिल्ली रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि वरुणा कॉरिडोर में बाधक बने अवैध निर्माण हटने चाहिए। एक समान कार्रवाई वीडीए को करने की आवश्यकता है। जब बड़े लोगों से कार्रवाई शुरू होगी तो छोटे स्तर के लोग तो अपने आप तोड़ने लगेंगे।
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गुरुवार को न वीडीए की टीम पहुंची, न अभियान चला और न ही किसी नए अतिक्रमण पर हथौड़े चले। पूछने पर वीडीए के अफसरों ने इसकी वजह छुट्टी का दिन होना बताया जबकि अभियान लगातार जारी रखने के निर्देश दिए गए थे। इतना ही नहीं, 200 से अधिक अवैध निर्माण हैं। इनमें कई नेता, डॉक्टर, प्रोफेसर, वकील, बिल्डर, होटल व्यवसायी आदि शामिल हैं लेकिन वीडीए प्रशासन अब तक महज छह भवनों को नोटिस जारी कर पाया है वह भी बुद्ध विहार कॉलोनी में। बाकी अवैध निर्माण जैसे उसे नजर ही नहीं आ रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि गुरुवार को जहां एक तरफ भवन स्वामी अपना अवैध निर्माण तुड़वा रहा था, उससे कुछ ही दूरी पर धड़ल्ले से एक नया अवैध निर्माण कराया जा रहा था।
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यह सब कुछ खुलेआम हो रहा था लेकिन छुट्टी का बहाना कर अभियान से किनारा कसने वाले वीडीए के अधिकारियों को शायद कोई परवाह नहीं। हकीकत तो यह है कि इसी स्थान से होकर वीडीए की टीम बुधवार को गुजरी थी लेकिन उसे अवैध निर्माण जाने क्याें नजर नहीं आया। जानकारों का दावा है कि वीडीए महज खानापूर्ति करना चाहता है। अवैध निर्माण कराने वालों में जो पहुंच वाले हैं उनसे वीडीए ने दूरी बनाए रखी है। आला अधिकारियों के दबाव पर अवैध निर्माणों को ढहाने का रस्म पर अदा किया गया। वीडीए का यह रवैया सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट पर भारी पड़ने के साथ ही प्रशासन को भी मुश्किल में डाल सकता है।
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वरुणा कॉरिडोर मामले में विकास की उल्टी गंगा बहाने वालों की शिकायत अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से की जाएगी। इसे लेकर गंभीर सत्या फाउंडेशन के सचिव चेतन उपाध्याय गुरुवार को दिल्ली रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि वरुणा कॉरिडोर में बाधक बने अवैध निर्माण हटने चाहिए। एक समान कार्रवाई वीडीए को करने की आवश्यकता है। जब बड़े लोगों से कार्रवाई शुरू होगी तो छोटे स्तर के लोग तो अपने आप तोड़ने लगेंगे।